Home » इंडिया » Catch Hindi: narendra modi address in world sufi forum in delhi
 

नरेंद्र मोदी का इश्क़ सूफियाना

सादिक़ नक़वी | Updated on: 18 March 2016, 23:29 IST

"यह सूफीवाद की भावना, देश से प्रेम और राष्ट्र पर गर्व भारत में मुसलमानों को परिभाषित करता है. वे हमारे देश की शांति, विविधता और आस्था की समानता की कालातीत संस्कृति को प्रतिबिंबित करते हैं. वे भारत की लोकतांत्रिक परंपरा में हैं, देश में अपने स्थान के प्रति आश्वस्त है और राष्ट्र के भविष्य में विश्वास रखते हैं. और सबसे बढ़कर वे भारत की उस इस्लामिक विरासत के मूल्यों से प्रभावित हैं जो इस्लाम के उच्चतम आदर्शों को कायम रखते हैं. और जिसने हमेशा आतंकवाद तथा उग्रवाद की ताकतों से नकारा है." ये शब्द हैं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के. वो गुरुवार को दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में वर्ल्ड सूफी फोरम के उद्घाटन कार्यक्रम बोले रहे थे.

मोदी का भाषण केवल सम्मेलन में आए हजारों मुसलमान या भारतीय अल्पसंख्यक ही नहीं पूरी दुनिया सुन रही थी. उनके इस भाषण को उनका मुसलमानों की तरफ हाथ बढ़ाने के अब तक के सबसे बड़ा प्रयास कहा जा सकता है.

पढ़ेंः सोशल मीडिया पर पहले भी तस्वीरें बनती रही हैं, इस गिरफ्तारी का क्या अर्थ है

इस कार्यक्रम का आयोजन भारत के सूफी मत मानने वालों की संस्था 'आल इंडिया उलेमा एंड मशाएख बोर्ड' (एआईउएमबी) ने किया है.

मोदी ने कहा, "हम सब, हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई, जैन, बुद्धवाद, पारसी, धर्म में विश्वास रखने वाले, और न रखने वाले सभी भारत के अभिन्न अंग हैं."

सूफीवाद की भावना, देश से प्रेम और राष्ट्र पर गर्व भारत में मुसलमानों को परिभाषित करता हैः नरेंद्र मोदी

भारत में मुसलमानों में करीब 80 प्रतिशत इस्लाम के सुफी और शिया धारा से जुड़े हुए हैं. अगले महीने जिन राज्यों में विधान चुनाव होने वाले हैं उनमें असम और पश्चिम बंगाल में अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी है. असम में करीब 35 प्रतिशत मुसलमान हैं और उनमें से ज्यादातर सुफीवाद को मानने वाले हैं. अगले साल उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं. जहां बडी मुस्लिम आबादी रहती है.

मोदी एआईउएमबी के संस्थापक हजरत अशरफ के ठीक बाद बोले. अशरफ ने अपने भाषण में सरकार से भारत की गंगा-जमुनी तहजीब को बहाल करने के उपाय करने के लिए कहा. उन्होंन सरकार से आतंकवाद और सांप्रदायिकता को बढ़ावा देनी वाली ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की. उन्होंने देश तोड़ने की कोशिश करने वाली ताकतों के खिलाफ बोलते हुए कहा कि ऐसी ताकतों को उनकी सही जगह पहुंचा देना चाहिए.

पढ़ेंः राजनाथ सिंह को मीडिया से पता चला कि पाक जांच दल भारत आएगा

साल 2014 में केंद्र में बीजेपी गठबंधन की सरकार आने के बाद से ही उसपर बहुसंख्यकवाद का आरोप लगता रहा है. पीएम मोदी की भी आरएसएस और बीजेपी से जुड़े उन लोगों पर लगाम लगाते नहीं दिखे जो उनसे अलग दृष्टिकोण रखने वाले हर आदमी को निशाना बनाते रहे.

नौ फरवरी को जेएनयू में एक कार्यक्रम के बाद राष्ट्रवाद को लेकर शुरू हुई बहस के बाद सरकार जिस तरह छात्रों और स्कालरों के साथ पेश आयी उसके बाद समाज के एक तबके में सरकार के प्रति अविश्वास बढ़ गया.

'भारत माता की जय', 'नारा-ए-तकबीर' और 'नारा-ए-हैदरी' के नारों के बीच पीएम ने अपने भाषण में अल्लाह और अली की कुछ इस कदर तारीफ कर रहे थे जैसे वो वैश्विक मुस्लिम समुदाय को संबोधित कर रहे हों. 

आम तौर पर हिन्दी में बोलने वाले मोदी सूफी सम्मेलन में अंग्रेजी में बोले. उन्होंने कहा, "यह संसार के लिए बड़ी महत्ता रखने वाला असाधारण कार्यक्रम है, जो मानव जाति के लिए समय की मांग है. इस समय जब हिंसा की काली परछाइयां बड़ी होती जा रही हैं,तो आप उम्मीद का नूर या रोशनी हैं."

सम्मेलन में ईरान, इराक़, पाकिस्तान, यमन समेत कई देशों के प्रतिनिधि आए हैं. अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्लाह, गुजरात हज कमेटी के अध्यक्ष एमके चिश्ती और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी सम्मेलन के पहले दिन मौजूद थे.

पढ़ेंः आखिर किस संवेदनशील टेप की बात कर रहे हैं मनीष तिवारी

भारत सरकार सूफी इस्लाम को एक सॉफ्ट पावर के रूप में कट्टरपंथी इस्लाम के जवाब में पेश करना चाहती है.

मोदी ने कहा, "जब जवान हंसी को बंदूूकें खामोश कर रही हैं, ऐसे समय में आपकी आवाज मरहम है."

पीएम ने अपने भाषण में महान सूफी संतों ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती, निजामुद्दान औलिया और बख्तियार काकी के उद्धरण प्रयोग किए. उन्होंने पश्चिम एशिया के शरणार्थी समस्या पर भी बोला.

मोदी ने ये कहकर पाकिस्तान को भी संदेश देना चाहा कि सूूफीमत पूरे दक्षिण एशिया की साझी विरासत है.

उन्होंने कहा, "जब सूफीवाद के आध्यात्मिक प्रेम जिसमें आतंकवाद की हिंसक शक्ति नहीं होती, तब इसका प्रवाह सीमा को पार करता है, ऐसे में यह क्षेत्र अमीर खुसरो के कहे के मुताबिक धरती पर स्वर्ग होगा."

आतंकवाद के खिलाफ युद्ध किसी धर्म के खिलाफ टकराव नहीं है, ऐसा हो ही नहीं सकताः नरेंद्र मोदी

मोदी ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा, "वास्तव में जब आतंकवाद और कट्टरवाद हमारे कालखंड में बहुत ज्यादा विध्वंसक शक्ति बन जाएं, सूफीवाद के संदेश वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक हो जाते हैं."

पीएम ने आतंकवाद और मजहब को न जोड़ने की जरूरत पर भी बल दिया. उन्होंने कहा, "आतंकवाद के खिलाफ युद्ध किसी धर्म के खिलाफ टकराव नहीं है, ऐसा हो नहीं सकता."
 
हालांकि कुछ मुस्लिम संगठनों ने कार्यक्रम में मोदी की शिरकत की आलोचना की है. जमात-ए-उलेमा-ए-हिन्द के प्रमुख अरशद मदनी ने कहा कि वो होते तो नरेंद्र मोदी को कार्यक्रम में नहीं बुलाते.

पढ़ेंः उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्या को मिली अंतरिम जमानत

कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने ऐसी आलोचना का जवाब दिया. मौलाना सैयद तनवीर हाशमी ने कहा, "ये मौलवयों का नहीं, सूफियों का कार्यक्रम है. मौलवी जो करना चाहते हैं वो उन्हें करने दीजिए. हम अपना काम करते रहेंगे."

हजरत अशरफ ने भी कार्यक्रम में मोदी को न बलाने पर आपत्ति जताने वालों की आलोचना की. उन्होंने वहाबियों की तरफ इशारा करते हुए कहा, "ये मुट्ठीभर लोग हैं. जो शांति नहीं चाहते. हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें समाज में कोई जगह न मिले."

मोदी ने अपने भाषण में आजादी की लड़ायी में मौलाना हुसैन अहमद मदनी जैसे नेताओं के योगदान का हवाला दिया. उन्होंने कहा, "मौलाना आजाद जैसे हमारे महानतम नेताओं, मौलाना हुसैन मदानी जैसे महान अध्यात्मिक नेताओं और लाखों साधारण नागरिकों ने धर्म के आधार पर विभाजन के विचार को नकार दिया."

First published: 18 March 2016, 23:29 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी