Home » इंडिया » Catch Hindi: narendra modi and rss are in logger head over bandaru dattatreya
 

क्या बंडारू दत्तात्रेय को लेकर नरेंद्र मोदी और संघ के बीच ठन गई है?

समीर चौगांवकर | Updated on: 23 January 2016, 8:59 IST
QUICK PILL
  • हैदराबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी के दलित शोध छात्र रोहित वेमुला के मामले में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरान और बंडारू दत्तात्रेय पर आरोप लगे हैं. दत्तात्रेय ने ईरानी के मंत्रालय को छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था.
  • प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दत्तात्रेय को बर्खास्त करना चाहते हैं कि लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया.

बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर से खुद को जोड़ने में लगी भाजपा की कोशिशें औंधे मुंह गिरती दिख रही हैं. हैदराबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी के दलित छात्र की आत्महत्या ने पार्टी और सरकार दोनों को संकट में डाल दिया है. इस मामले में सरकार के दो मंत्रियों के आरोपों के घेरे में आने के कारण प्रधानमंत्री की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

खबर है कि दलित छात्रों के निलंबन और आत्महत्या के मामले में घेरे में आए श्रम राज्यमंत्री बंडारू दत्तात्रेय को लेेकर प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी और संघ परिवार के बीच मतभेद उभर आए हैं.

पढ़ेंः रोहित वेमुला खुदकुशी: सियासत तेज, बीजेपी शीर्ष नेतृत्व चुप

प्रधानमंत्री कार्यालय के एक सूत्र बताते है कि दलितों को भाजपा से जोड़ने में जुटे मोदी इस घटना का पटाक्षेप करने के लिए बंडारू दत्तात्रेय का इस्तीफा चाहते थे. लेकिन संघ बंडारू दत्तात्रेय को मंत्री बनाए रखने पर अड़ गया है. उसने प्रधानमंत्री को साफ शब्दों में दत्तात्रेय के इस्तीफे से रोक दिया.

दत्तात्रेय पिछड़े कुर्मा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. उन्होंने संघ संगठन के साथ ही भाजपा को भी लंबा समय दिया है. कहा जा रहा है कि संघ के वरदहस्त के कारण मोदी चाह कर भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं.

तेलंगाना में दत्तात्रेय की छवि एक मेहनती कार्यकर्ता की है. एक ऐसे राज्य में जहां भाजपा का कोई नाम लेने वाला नहीं था वहां पर दत्तात्रेय ने पार्टी को लंबा समय दिया है और उसका संगठन खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई है.

दत्तात्रेय पिछड़े कुर्मा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. उन्होंने संघ संगठन के साथ ही भाजपा को भी लंबा समय दिया है

दत्तात्रेय पहली बार में मोदी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए गए थे. बाद में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए और संघ के दबाव में दत्तात्रेय को मंत्री बनाया गया था. बंडारू दत्तात्रेय संघ के पूर्णकालिक प्रचारक रहे हैं.

1980 के दौरान दत्तात्रेय आन्ध्र प्रदेश में भाजपा के संगठन महामंत्री थे. बाद में गृहस्थ जीवन अपनाने के कारण दत्तात्रेय संघ के पूर्णकालिक प्रचारक नहीं रहे. लेकिन हैदराबाद में भाजपा को खड़ा करने में वे लगातार लगे रहे.

दत्तात्रेय अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी मंत्री थे. भाजपा को इस बात की भी चिंता सता रही है कि कुछ ही महीने बाद बंगाल, केरल, तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव होना है. इन राज्यों में दलितों की संख्या अच्छी-खासी है.

पढ़ेंः रोहित खुदकुशी: शिक्षकों और छात्रों ने स्मृति ईरानी को झूठा कहा

प्रधानमंत्री को इसी बात की चिंता है कि कहीं रोहित की आत्महत्या के चक्कर में पार्टी से दलित पूरी तरह अलग न हो जाएं. सूत्र बताते हैं कि मोदी ने इन सब बातों का आकलन करके अपनी मंशा संघ के प्रमुख नेताओं तक भेजी थी लेकिन संघ ने फिलहाल दत्तात्रेय का इस्तीफा न लेने की सलाह प्रधानमंत्री को दी है.

मोदी को इस बात का डर है कि अल्पसंख्यकों के साथ दलितों के जुड़ने पर ना सिर्फ केरल, तमिलनाडु और बंगाल के चुनाव पर असर पड़ेगा बल्कि अगले साल उत्तर प्रदेश और पंजाब में भी इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है.

दूसरी तरफ देशभर में हो रहे प्रदर्शन को देखते हुए हैदराबाद युनिवर्सिटी ने चार छात्रों का निलंबन वापस ले लिया है. सूत्र बताते है सरकार इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए है. मामला और गंभीर होने की स्थिति में सरकार यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को पद से हटा सकती है.

प्रधानमंत्री को इसी बात की चिंता है कि कहीं रोहित की आत्महत्या के चक्कर में पार्टी से दलित पूरी तरह अलग न हो जाएं

विभिन्न मुद्दों को लेकर संसद के दो सत्र बर्बाद होने के बाद अब मोदी सरकार के सामने बजट सत्र को हर हाल में सुचारू रूप से चलाने की चुनौती भी है. सरकार को फरवरी में होने वाले बजट सत्र में दलितों के नाम पर विपक्ष के हंगामा करने की भी चिंता सता रही है.

केन्द्र सरकार बजट सत्र में कई महत्वपूर्ण बिलों को पास कराना है. प्रधानमंत्री की कोशिश थी कि बंडारू दत्तात्रेय का इस्तीफा लेकर वह दलित समर्थक छवि बना सकेंगे और साथ ही बजट सत्र भी आसानी से पार हो जाएगा. लेकिन संघ के रुख ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

संघ के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि हैदराबाद के दो विश्वविद्यालय हैदराबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी और उस्मानिया युनिवर्सिटी हमेंशा से उग्र वामपंथ का गढ़ रहा है और इसको नियंत्रित करने के लिए इन दोनों विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का मजबूत होना जरूरी है.

पढ़ेंः रोहित वेमुला की याद में एक 'मित्र' का पत्र

हैदराबाद युनिवर्सिटी में चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बारे में संघ का अपना आकलन है कि यह सब दलित छात्रों को न्याय दिलाने से ज्यादा एबीवीपी को कमजोर और बदनाम करने के लिए प्रायोजित किया जा रहा है. इसलिए ऐसे समय में बंडारू दत्तात्रेय का इस्तीफा एबीवीपी और संघ कार्यकर्ताओं को हैदराबाद में कमजोर करेगा.

संघ इस मामले में एक अलग ही रणनीति पर चलता दिख रहा है. उसका आकलन है कि जैसे पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में गजेेंन्द्र चौहान का लंबे समय तक विरोध के बाद छात्रों का आंदोलन कमजोर पड़ गया, उसी तरह एक समय के बाद हैदराबाद में भी छात्रों का विरोध ठंडा पड़ जाएगा.

यह तय हो गया है कि संघ उग्र वामपंथियों से भरी यूनिवर्सिटी के एक दलित छात्र के लिए अपने राष्ट्रवादी नेता की बलि नहीं देगा.

First published: 23 January 2016, 8:59 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

पिछली कहानी
अगली कहानी