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मोदी सरकार ने बिना आवेदन वित्त मंत्री जेटली के पूर्व सचिव को बनाया सूचना आयुक्त, उठ रहे सवाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 January 2019, 19:09 IST

केंद्र की मोदी सरकार में चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हुई है. अब इस पर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल, उनमें पूर्व विधि सचिव सुरेश चंद्रा का नाम भी शामिल है, जबकि उन्होंने इस पद के लिए आवेदन ही नहीं किया था. गौर करने वाली बात है कि चंद्रा चयन समिति के सदस्य वित्त मंत्री अरुण जेटली के निजी सचिव भी रहे हैं.

केंद्रीय सूचना आयोग में 20 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक हुई थी. जिसमें चार लोगों को सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी. 1 जनवरी, 2019 को मोदी सरकार इन चार सदस्यों की नियुक्ति कर दी गई. नियुक्त होने वालों में पूर्व आईएफएस अधिकारी यशवर्द्धन कुमार सिन्हा, पूर्व आईएएस अधिकारी नीरज कुमार गुप्ता, पूर्व आईआरएस अधिकारी वनजा एन. सरना और पूर्व विधि सचिव सुरेश चंद्रा शामिल हैं.

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इस नियुक्ति के साथ ही इस पर विवाद होना शुरू हो गया है. आरोप है कि मोदी सरकार ने बिना आवेदन ही सूचना आयुक्त के पद पर पूर्व विधि सचिव सुरेश चंद्रा की नियुक्त कर दी. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा वेबसाइट पर अपलोड की गई नियुक्ति की फाइलों से यह खुलासा हुआ.

खुलासे के अनुसार, सुरेश चंद्रा ने इस पद के लिए आवेदन ही नहीं किया था. इसके बावजूद उन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया है. नये नियुक्त चारों अधिकारी साल 2018 में ही रिटायर हुए हैं और इनमें शामिल सुरेश चंद्रा वित्त मंत्री अरुण जेटली के निजी सचिव रह चुके हैं. खास बात ये है कि अरुण जेटली चयन समिति के सदस्य भी थे.

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डीओपीटी के मुताबिक सूचना आयुक्त के पद के लिए कुल 280 लोगों ने आवेदन किया था, लेकिन इस सूची में सुरेश चंद्रा का नाम शामिल ही नहीं है. आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुरेश चंद्रा की केंद्रीय सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ति में मोदी सरकार ने मनमानी की है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि खुद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि सर्च कमेटी सूचना आयुक्त के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों में से ही योग्य लोगों को शॉर्टलिस्ट करेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

First published: 22 January 2019, 19:09 IST
 
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