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एस जयशंकर की डिप्लोमेसी के आगे चीन और पाकिस्तान ने टेके थे घुटने, नरेेंद्र मोदी ने बनाया कैबिनेट मंत्री

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 May 2019, 12:12 IST

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपश ली. उनके मंत्रिमंडल में सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को शामिल किया जाना रहा. एस जयशंकर को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. एस जयशंकर पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं. माना जा रहा है मोदी सरकार उनको बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है.

एस जयशंकर विदेश सचिव रहते कूटनीतिक मामलों में अपना लोहा मनवा चुके हैं. चीन और पाकिस्तान के साथ अन्य पड़ोसी देशों के बीच संबंधों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. माना जा रहा है कि दक्षिण एशिया में चीन और पाकिस्तान से निपटने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है. वह जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक मोदी सरकार में विदेश सचिव रहे हैं. 

विदेश सचिव रहने से पहले एस जयशंकर सिंगापुर में उच्चायुक्त, चीन-अमेरिका के राजदूत जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. भारत और अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. अमेरिका में भारतीय राजदूत रहने के दौरान उनके बेहतर प्रदर्शन ने उन्हें विदेश सचिव के प्रतिष्ठित पद पर पहुंचाया था.

एस जयशंकर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज से स्नातक किया है. इसके बाद राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री ली है. एस जयशंकर ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एमफिल और पीएचडी की है. साल 1977 के बैच के IFS अधिकारी एस जयशंकर का पहला बड़ा काम तब हुआ जब उन्हें मॉस्को में भारतीय दूतावास में तीसरा सचिव और पहला सचिव नियुक्त किया गया. एस जयशंकर को रूसी भाषा के अलावा जापानी और हंगेरियन भाषाओं की भी अच्छी समझ है.

सुजाता सिंह को अचानक हटाकर उन्हें बनाया विदेश सचिव

साल 2015 में मोदी सरकार ने पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह को अचानक से अनौपचारिक ढंग से पद से हटा दिया. इसके बाद उनकी जगह एस जयशंकर को यह पद दिया गया. एस जयशंकर को विदेश सचिव बनाए जाने पर कई वरिष्ठों की अनदेखी भी हुई, लेकिन उनके टैलेंट पर कभी संदेह नहीं किया गया. माना जाता है कि मोदी और एस जयशंकर के रिश्ते तब से हैं जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे.

डोकलाम विवाद को सुलझाने में थी बड़ी भूमिका

एस जयशंकर ने विदेश सचिव के रूप में भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी. एस  जयशंकर ने कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता में बाहरी मामलों की एक समिति को यह समझाया कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दुनिया का सबसे बड़ा रियल एस्टेट विवाद है. उन्होंने बताया कि समिति को इसमें बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

भारत-अमेरिका परमाणु समझौते में निभाई थी बड़ी भूमिका

एस जयशंकर को भारत में रणनीतिक मामलों के सबसे शक्तिशाली दिमागों में से एक माना जाता है. उनके पिता के. सुब्रह्मण्यम ने देश की पहली परमाणु शक्ति और आयुधशाला का प्रबंधन करने और पहले उपयोग न करने की नीति को तैयार किया था. अमेरिका में विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में जयशंकर ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर बातचीत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्होंने अधिक रक्षा सहयोग के मामले में दोनों देशों के लिए एक व्यवहार्य, सुसंगत नीति बनाई थी.

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First published: 31 May 2019, 12:10 IST
 
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