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'मेरा नाम खान है और मैं नरेंद्र मोदी का प्राउड फैन हूं'

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 March 2016, 17:39 IST

मंजूर अहमद खान को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे कपड़े पहनना पसंद है. वो अक्सर मोदी जैसी सदरी पहने नज़र आते हैं. वो मोदी की चाल-ढाल की भी नकल करते हैं.

उनकी घड़ी में कमल का फूल बना है. उनकी पेन पर नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगी है. उन्होंने अपने फोन का डायलर ट्यून अमिताभ बच्चन की फिल्म देशप्रेमी के एक गाने को बना रखा है.

खान खुद को 'मोदी का भक्त' नहीं मानते. वो खुद को भारतीय प्रधानमंत्री का 'प्राउड फ़ैन' बताते हैं.

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मंजूर अहमद खान भारतीय मोदी आर्मी की जम्मू-कश्मीर शाखा के प्रमुख हैं. उनका दावा है कि उनके संगठन में कुल 11 हजार सदस्य हैं. वो बताते हैं कि इनमें से नौ हजार लोग घाटी के हैं, दो हजार जम्मू के और 100 लोग लद्दाख के हैं. उनका मकसद 'नरेंद्र मोदी की विचारधारा और मिशन का प्रचार' करना है.

अपने मकसद को पूरा करने के लिए मंजूर अहमद और उनके साथी घाटी के अंदरूनी इलाकों समेत नियंत्रण रेखा से सटे गांवों में जाकर "लोगों को मोदी की विकास योजनाओं और केंद्रीय नीतियों के बारे में बताते हैं."

मंजूर कहते हैं, "हम हरनेठ गए थे. आपको पता है ये कहां है? ये उरी(उत्तरी कश्मीर का सीमावर्ती) से भी 25 किलोमीटर अंदर जंगल में है. वहां पहंचने के लिए हमें छह किलोमीटर पैदल चलना पड़ा."

वो बताते हैं कि वो जम्मू से सटे किश्तवाड़ा में भी गए थे. करीरी, बारा ऋषि और ऐसे कई जगहों का नाम खान गिनाते हैं जहां उनकी टीम मोदी के प्रचार के लिए गयी थी.

मंजूर अहमद खान भारतीय मोदी सेना के जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष हैं. वो मोदी और उनकी योजनाओं का प्रचार करते हैं

आखिर इन सुदूर गांवों में जाकर वो क्या करते हैं? मंजूर कहते हैं,"हम गांव वालों को इकट्ठा करते हैं. उन्हें मोदी जी के नेतृत्व और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुद्रा लोन, स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाओं के बारे में बताते हैं."

Manzoor Ahmad Khan in modi jacket
मंजूर कहते हैं कि इससे गांववालों में भरोसा पैदा होगा और वो अपने अधिकारों के लिए आगे आएंगे. नतीजतन, ये गांववाले मोदी के करीब आएंगे.
घाटी में भारतीय मोदी आर्मी का स्थापना करीब छह महीने पहले हुई थी. मंजूर बताते हैं कि उनका संगठन पानीपत स्थित भारतीय मोदी आर्मी(बीएमए) की जम्मू-कश्मीर शाखा है.

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बीएमए की स्थापना हरियाणा के पानीपत में करीब छह साल पहले हुई थी. संगठन का दावा है कि पूरे भारत में करीब 18 लाख लोग उससे जुड़े हुए हैं. राजीव अहूजा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

आपको ये जानकर शायद हैरत होगी कि श्रीनगर में बीएमए का दफ्तर अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के दफ्तर के ठीक सामने है.

28 फरवरी को मंजूर अहमद ने शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में एक समारोह का आयोजन किया था. उस दिन हाल खचाखच भरा था.

मंजूर अहमद बताते हैं कि करीब 1500 लोग कार्यक्रम में शामिल हुए. बीएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव अहूजा, राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष विजय विक्रम सिंह, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नेताओं के साथ मंजूर अहमद ने भी सभा को संबोधित किया था.
Manzoor Ahmad Khan lead
कार्यक्रम में सेना और अर्धसैनिक बलों की बटालियन बढ़ाने की मांग की गयी ताकि स्थानीय युवकों को रोजगार मिल सके.

मंजूर अहमद खान कहते हैं कि उन्हें बीजेपी नेता परषोत्तम रुपला भारत मोदी रत्न अवार्ड दे चुके हैं

हालांकि स्थानीय बीजेपी नेता मंजूर अहमद की बढ़ती गतिविधियों से बहुत खुश नहीं हैं. बीजेपी खुद को बीएमए से दूर ही रखती है. पार्टी का कहना है कि बीएमए नरेंद्र मोदी के नाम का इस्तेमाल करना चाहता है. बीजेपी पुलिस में इस बाबत शिकायत भी दर्ज करायी है ताकि बीएमए के खिलाफ कार्रवाई की जा सके.

राज्य बीजेपी के महासचिव अशोक कौल कहते हैं, "इन लोगों को बेनकाब करना जरूरी है. बीजेपी का मोदीजी का नाम इस्तेमाल करने वाले इस संगठन से कोई लेना-देना नहीं."

कौल कहते हैं कि बीजेपी इन लोगों को मोदी के नाम का इस्तेमाल नहीं करने देगी.

Manzoor Ahmad Khan taking award

मंजूर अहमद बीजेपी के रवैये से जरा भी विचलित नजर नहीं आते. वो कहते हैं कि बीजेपी उनके संगठन के काम से घबरा गयी है. वो कहते हैं, "सबसे पहले तो मैं ये साफ कर दूं कि हम बीजेपी से नहीं मोदीजी से जुड़े हुए हैं. हम उनके फैन हैं. दूसरी बात, हम कोई पार्टी नहीं है, हम एक संगठन हैं."

मंजूर कहते हैं, "यहां की बीजेपी को लगता है हम उनकी जगह छीन रहे हैं. वो हमारे अच्छे कामों से भी खुश नहीं हैं."

मंजूर अहमद उत्तरी कश्मीर के बांदिपुर जिले के बरार गांव के रहने वाले हैं. राजनीति में आने से पहले वो चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े थे. साल 2008 में वो आल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक के टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. बाद में वो किसान मोर्चा और बीएमए से जुड़ गए.

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मंजूर बहुत गर्व के साथ बताते हैं कि उन्हें बीजेपी नेता परषोत्तम रुपला ने भारत मोदी रत्न अवार्ड दिया था. वो बड़े फख्र के साथ ये भी बताते हैं कि किसान चैनल के लॉन्च के मौके पर वो उद्योग भवन में नरेंद्र मोदी से मिल चुके हैं.

मंजूर कहते हैं, "मुझे किसी से राजनीतिक प्रमाणपत्र नहीं चाहिए. मेरा काम मोदीजी का संदेश फैलाना है और वो मैं करता रहूंगा."
 
कश्मीर घाटी में बीएमए को लेकर शंका का माहौल है. संगठन के नाम में लगेे 'सेना' शब्द को लेकर लोगों को ज्यादा एतराज़ है.
 
श्रीनगर के कारोबारी गुलाम मोहम्मद लोन कहते हैं, "वो खुद को सेना क्यों कहते हैं? क्या ये इखवान की तरह आतंकवादी-विरोधी ग्रुप है? हमें सरकार से इसका जवाब चाहिए."

लोन कहते हैं, "कहीं ये आरएसएस का घाटी में भेष बदलकर अपना मकसद पूरा करने का तरीका तो नहीं? हमें शक है कि ये उनका कोई खेल हो सकता है."

मंजूर अहमद ऐसी आशंकाओं को खारिज करते हैं. वो कहते हैं, "ऐसा बिल्कुल नहीं है. हम हथियार लेकर नहीं चलते. न ही हम पुलिस या सेना से जुड़े हुए हैं."

हालांकि वो ये कहना नहीं भूलते कि "अगर इससे हमारे काम में मदद मिलती है तो हम सुरक्षा बलों के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं."

(सभी तस्वीरें रियाज़ वानी)

First published: 31 March 2016, 17:39 IST
 
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