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नरोदा पाटिया नरसंहार: जानिए कौन हैं माया कोडनानी, जिन्हें 28 साल की सजा के बाद बरी कर दिया गया

आदित्य साहू | Updated on: 20 April 2018, 13:07 IST

गुजरात हाईकोर्ट ने साल 2002 के नरोदा पाटिया दंगों की आरोपी और 28 साल की सजा की अभियुक्त माया कोडनानी को बरी कर दिया है. हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए भाजपा सरकार में पूर्व मंत्री माया कोडनानी को बरी किया है. अदालत ने कहा कि वारदात वाली जगह पर कोडनानी की मौजूदगी के कोई सबूत नहीं मिले हैं. इसके अलावा हाईकोर्ट ने अन्य आरोपी बाबू बजरंगी की सजा बरकरार रखी है. इस मामले अन्य 31 दोषियों की सजा को भी बरकरार रखा है. अदालत में हरीश छारा और सुरेश लांगड़ा को भी दोषी माना गया है.

इस फैसले की जो सबसे चौकाने वाली बात है वह है माया कोडनानी का बरी होना. 28 साल की सजा भुगत रही माया कोडनानी को हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. आप भी जानिए कौन हैं माया कोडनानी और क्या हुआ था 28 फरवरी की उस रात अहमदाबाद के नरोदा पाटिया इलाके में 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी.

कौन हैं माया कोडनानी?
माया कोडनानी भाजपा से तीन बार की विधायक रह चुकी हैं. वह नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री थी. वह नरेंद्र मोदी की काफी करीबी मानी जाती थीं. वो पहली महिला वर्तमान विधायक थीं जिन्हें गोधरा दंगों के बाद सजा हुई थी. उन पर आरोप था कि हत्या करने वाली भीड़ का नेतृत्व कोडनानी ने किया था.

माया का परिवार बंटवारे से पहले पाकिस्तान के सिंध परिवार में रहता था लेकिन बाद में गुजरात आकर बस गया. पेशे से माया कोडनानी गाइनकालजिस्ट थी और साथ-साथ आरआरएस से भी जुड़ी थीं. नरोदा में उनका अपना मेटर्निटी अस्पताल था फिर वो स्थानीय राजनीति में सक्रिय हो गईं. साल 1998 में वो नरोदा से विधायक चुनी गईं. साल 2002 के गुजरात दंगों के बाद ही हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में वह फिर विजयी रहीं. साल 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भी माया कोडनानी जीतीं और गुजरात सरकार में मंत्री बन गईं.

साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने उन्हें पूछताछ के लिए समन किया. बाद में उन्हें गिरफ़्तार भी कर लिया गया, जिसकी वजह से उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. हालांकि जल्द ही वह जमानत पर रिहा हो गईं. 29 अगस्त 2012 को आख़िरकार कोर्ट ने उन्हें मामले में दोषी करार दिया था.

क्या हुआ था उस रात?
27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगियां जलाने की घटना के बाद नरोदा पाटिया सबसे बुरी तरह जला था. नरोदा पाटिया नरसंहार को गुजरात दंगे के दौरान सबसे भीषण नरसंहार बताया जाता है. यह केस भी सबसे विवादास्पद केसों में है. ये गुजरात दंगों से जुड़े नौ मामलों में एक है, जिनकी जांच एसआईटी ने की थी.

विश्व हिन्दू परिषद ने 28 फरवरी, 2002 को बंद का आह्वान किया था. इसी दौरान नरोदा पटिया इलाके में उग्र भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया था. अगस्त 2009 में इस मामले में 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए थे. जबकि सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त विजय शेट्टी की मौत हो गई.

अदालत ने सुनवाई के दौरान 327 लोगों के बयान दर्ज किए. 29 अगस्त को न्यायधीश ज्योत्सना याग्निक की अध्यक्षता वाली अदालत ने बीजेपी विधायक और नरेन्द्र मोदी सरकार में पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी को हत्या और षड़यंत्र रचने का दोषी पाया. 

अमित शाह को कोर्ट ने बुलाया था गवाही के लिए
पिछले साल सितंबर में गुजरात की विशेष एसआईटी अदालत ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को समन जारी किया था. एसआईटी अदालत ने अमित शाह को 18 सितंबर को कोर्ट में आकर गवाही देने के लिए कहा था. दरअसल गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी नरोदा गाम नरसंहार मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एवं 13 अन्य को उनकी अनुपस्थिति साबित करने के लिए उन्हें समन जारी करने की मांग करते हुए विशेष एसआईटी अदालत में अर्जी दी थी.

अदालत ने अप्रैल 2017 में कोडनानी की यह अर्जी मान ली थी. कोडनानी ने अदालत से शाह एवं अन्य को अपने बचाव गवाह के रूप में बुलाने की मांग की थी ताकि यह साबित हो कि वह 28 फरवरी, 2002 को नरोदा गाम नरसंहार से जुड़े अपराध स्थल पर मौजूद नहीं थीं.

इससे पहले विशेष एसआईटी अदालत ने माया कोडनानी को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का पता ढूंढने के लिए और चार दिन दिए थे, क्योंकि वह नरोदा गाम नरंसहार मामले में अपने बचाव में उन्हें अदालत में पेश करवाना चाहती थीं. कोडनानी ने अदालत से कहा था कि वह उनका पता नहीं ढूंढ पाई हैं, जिस पर अदालत का समन पहुंचाया जा सके.

अदालत ने 4 सितंबर को उन्हें अमित शाह का पता ढूंढने के लिए 8 सितंबर तक का वक्त दिया था, लेकिन कोडनानी के वकील ने और समय की मांग की थी. इस पर कोर्ट ने कोडनानी के वकील को और चार दिन देते हुए मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 सितंबर तय की थी. नरोदा पाटिया नरसंहार के मामले में कोडनानी को 28 साल की सजा सुनाई गई थी लेकिन फिलहाल वह बरी हो गई हैं.

First published: 20 April 2018, 13:07 IST
 
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