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किताब का खुलासा: सोनिया गांधी की जासूसी करा रहे थे नरसिम्हा राव

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 June 2016, 15:43 IST
(पीटीआई)

एक किताब में दावा किया गया है कि दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव अपने शासन काल में भारतीय खुफिया एजेंसी (आईबी) के जरिए कांग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गांधी की जासूसी करा रहे थे.

विनय सीतापति ने अपनी आने वाली किताब ‘हाफ लॉयन: हाउ पीवी नरसिम्‍हाराव ट्रांसफॉर्म्‍ड इंडिया’ में किया है. यह किताब 27 जून से बाजार में उपलब्‍ध होगी.

किताब के लेखक विनय सीतापति ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के लिए लिखे एक लेख में बताया है कि मई 1995 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्‍हाराव ने सोनिया गांधी की जासूसी करने के लिए इंटेलिजेंस ब्‍यूरो की मदद ली थी.

विनय सीतापति की किताब

सीतापति की इस किताब में पूर्व पीएम नरसिम्‍हाराव के निजी कागजात और 100 लोगों के साक्षात्‍कार के माध्यम से जानकारी इकट्ठा की गई है.

किताब के मुताबिक नरसिम्‍हाराव ने उस समय आईबी से पूछा था कि उनकी कैबिनेट में शामिल कितने मंत्री उनके समर्थक हैं और कितने सोनिया गांधी के? किताब में यह भी बताया गया है कि उस समय सोनिया गांधी और नरसिम्‍हा राव के बीच रिश्‍ते ठीक नहीं थे.

राव के द्वारा मांगी गई जानकारी के मुताबिक आईबी ने उनकों कुछ व्‍यक्तियों के नाम, राज्‍य, जाति और उम्र मुहैया कराई थे. उदाहरण के तौर पर आईबी के नोट में एमएस अय्यर के सामने लिखा था, "तमिलनाडु, ब्राह्मण, 52, 10 जनपथ समर्थक, प्रधानमंत्री के अयोध्‍या मामले को हैंडल करने के रवैये के आलोचक हैं.

आईबी के नोट में नेताओं का हवाला

इसके अलावा अय्यर बैंक स्कैम में बनी जेपीसी में पार्टी के हितों का ध्‍यान रखते हैं." मार्गरेट अल्‍वा के सामने लिखा था, "कर्नाटक, ईसाई, 53, राव समर्थक, राजनीतिक लाइटवेट, संगठन में सही जगह दिए जाने पर मंत्रिमंडल से निकाला जा सकता है. ऐसा नहीं होने पर कर्नाटक के ईसाई नाराज हो सकते हैं."

राव को भेजे आईबी के नोट में आखिरी नाम उन लोगों के थे, जिन्‍हें संगठन में भेजे जाने पर विचार हो रहा था. इसमें सबसे ऊपर शरद पवार का नाम था. इस संबंध में नोट में लिखा था, "महाराष्‍ट्र, मराठा, संदेहास्‍पद, एक अच्‍छे आयोजक और प्रभावशाली नेता हैं. काम के आदमी साबित हो सकते हैं."

किताब में किए दावों के मुताबिक नरसिम्हा राव इस रिपोर्ट से पहले भी सोनिया गांधी के प्रभाव की जानकारी के लिए आईबी का इस्‍तेमाल कर चुके थे.

7 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्‍वंस के बाद राव ने सोनिया गांधी के आधिकारिक आवास 10 जनपथ पर आईबी अधिकारी तैनात कर दिया था. उसके पीछे राव का मकसद था कि यह पता लगाया जा सके कि पार्टी के कौन-कौन से नेता उनके खिलाफ बातें करते हैं. आईबी की रिपोर्ट में बंगले के अंदर की एक बातचीत का भी जिक्र था.

इसमें कहा गया, "सोनिया गांधी से विचार-विमर्श के दौरान अर्जुन सिंह, दिग्विजय सिंह, अजीत जोगी, सलामतउल्‍लाह और अहमद पटेल ने बाबरी मामले की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री के तरीके पर नाराजगी जाहिर की थी."

पार्टी के जरिए राव पर नजर!

किताब में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि जब नरसिम्‍हा राव सोनिया गांधी पर नजर रखने के लिए सरकारी तंत्र का इस्‍तेमाल कर रहे थे, उस समय सोनिया गांधी भी पार्टी के जरिए राव पर नजर रख रही थीं.

राव सरकार के पहले दो साल में तो सोनिया अपने पति राजीव गांधी के निधन की वजह से उतना ध्यान नहीं दे रही थीं, लेकिन 1992 के बाद सोनिया ने पार्टी में राव विरोधी नेताओं को जमकर बढ़ावा दिया.

इनमें अर्जुन सिंह, एनडी तिवारी, नटवर सिंह और अन्‍य कांग्रेसी नेता लगभग रोज ही सोनिया गांधी से मिलते और उनसे राव की शिकायत करते थे. हालांकि इसके कोई सबूत नहीं हैं, लेकिन पार्टी में नारायण दत्त तिवारी वाले गुट को सोनिया गांधी का वरदहस्‍त प्राप्त था.

उस समय के एक मंत्री ने बताया, "सोनिया गांधी को कैबिनेट मीटिंग में होने वाली चर्चाओं की पूरी जानकारी रहती थी. कई मंत्री उनके घर जाकर मीटिंग के बारे में ब्रीफ दिया करते थे."

राव के अंतिम संस्कार विवाद का जिक्र

किताब में इस बात का भी जिक्र है कि 2004 में जब नरसिम्हा राव का निधन हुआ, तो उनका परिवार चाहता था कि उनका अंतिम संस्‍कार दिल्‍ली में ही हो.

इस मामले में राव के बेटे प्रभाकर ने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह से कहा था, "यह उनकी कर्मभूमि रही है." लेकिन सोनिया गांधी के कुछ खास लोगों ने ऐसा नहीं होने दिया और राव का पार्थिव शरीर दिल्ली से हैदराबाद भेज दिया गया.

उसके बाद प्रभाकर ने आरोप लगाया था, "सोनिया जी ऐसा नहीं चाहती थी कि उन्‍हें पूरे देश का नेता माना जाए."

First published: 24 June 2016, 15:43 IST
 
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