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अल्पसंख्यक आयोग: गोरक्षक हैं मेवात में मुस्लिम महिलाओं से गैंगरेप के अभियुक्त

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST
(विकास कुमार)

मेवात के डींगरहेड़ी गांव में मुस्लिम दंपति की हत्या और डबल गैंगरेप कांड में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने रिपोर्ट तैयार कर ली है. रिपोर्ट में गिरफ़्तार मुलज़िमों को गोरक्षक और वारदात  में उनकी भूमिका के बारे में बताया गया है. इसे तैयार करने के लिए आयोग के अध्यक्ष नसीम अहमद और सदस्य प्रवीण डावर की टीम ने गांव का दौरा किया था.

मुस्लिम दंपति की हत्या और एक नाबालिग समेत दो के साथ गैंगरेप के मामले में पीड़ितों से मुलाकात के बाद जो रिपोर्ट तैयार की गई है, उसने गोरक्षकों को कठघरे में खड़ा कर दिया है. डींगरहेड़ी कांड को लेकर यह रिपोर्ट हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भी भेजी गई है.   

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग

क्या कहती है अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट?

रिपोर्ट के मुताबिक, "इस घटना से इलाके के लोग सदमे में हैं. मुस्लिम समुदाय में वारदात के बाद से काफी नाराजगी है. जिसकी प्रमुख वजह अभियुक्तों का गोरक्षक होना है. ऐसे गुनहगारों को सख्त संदेश देने की जरूरत है कि इस तरह के संगीन अपराधों के लिए उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. मेवात जिले के संदर्भ में ऐसा कदम उठाना न्यायसंगत होगा.

रिपोर्ट में लिखा है, "घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि गैंगरेप से पहले महिलाओं से से अभियुक्तों ने इस बात को लेकर कहासुनी की कि उन्होंने गोमांस (बीफ) खाया था. लेकिन इस अहम तथ्य को सीआरपीसी में 164 के तहत बयान दर्ज कराते वक्त छोड़ दिया गया कि अभियुक्त गोरक्षक थे." 

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अल्पसंख्यक आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "इस केस को लेकर पुलिस की भूमिका की बड़े पैमाने पर आलोचना हुई है. हालांकि राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी है, लेकिन कानून-व्यवस्था चूंकि राज्य का विषय है इसलिए सरकार को सलाह दी जाती है कि इलाके में सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएं और इलाके के लोगों का पुलिस की कार्यप्रणाली में भरोसा बहाल हो सके."

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग

डींगरहेड़ी गांव में क्या हुआ था?

मालूम हो कि 24-25 अगस्त की दरमियानी रात एक बजे मेवात ज़िले के डींगरहेड़ी गांव में एक ही परिवार पर पड़ोसी गांव मुहम्मदपुर के कुछ युवकों ने हमला कर दिया था. यहां दो दंपतियों और उनके बच्चों को मार-मारकर अधमरा कर दिया गया था. फिर एक नाबालिग समेत दो महिलाओं का सभी घायलों के सामने ही गैंगरेप किया गया था.

बाद में अस्पताल ले जाते समय इब्राहिम और उनकी पत्नी रशीदन की मौत हो गई थी. तावड़ू पुलिस इसे सामान्य लूटपाट मानकर जांच कर रही थी लेकिन पुलिस की भूमिका संदिग्ध होने पर एक एसआईटी गठित करके जांच उसे सौंप दी गई थी. मगर एसआईटी ने भी निष्पक्ष जांच की बजाय इसमें लीपापोती शुरू कर दी और कोई खुलासा नहीं हो पाया. इसके विरोध में एक सितंबर को हुई महापंचायत में जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी.

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बुधवार दोपहर सीएम मनोहर लाल खट्टर से 11 सदस्यीय डेलिगेशन की मुलाकात के बाद केस सीबीआई को ट्रांसफर किए जाने का दबाव बढ़ गया है. पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी और मुआवज़ा भी मिल सकता है.

First published: 28 September 2016, 11:44 IST
 
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