Home » इंडिया » New Education Policy 2020: Know about new education policy 10 Important points
 

New Education Policy 2020: नई शिक्षा नीति के तहत हुए कई महत्वपूर्ण बदलाव, बदल जाएगी पूरी शिक्षा व्यवस्था, जानिए 10 बड़ी बातें

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 July 2020, 11:23 IST

New Education Policy 2020 : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी दे दी और साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है. केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मीडिया से बात करते हुए नई शिक्षा नीति का ऐलान किया और इस दौरान उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक ही नियामक होगा और एमफिल को बंद कर दिया जाएगा.

इससे पहले साल 1986 में नई शिक्षा नीति लागू की गई थी और साल 1992 में कुछ बदलाव किए गए थे. पूर्व इसरो प्रमुख के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति ने नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार किया है. नई शिक्षा नीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं जिसे कई लोग खुलकर समर्थन भी कर रहे हैं. देश की शिक्षा नीति में 34 सालों से बदलाव नहीं हुआ था, ऐसे में इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

नई शिक्षा नीति में डिजिटल लर्निंग को दुरूस्त करने के लिए एक राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच बनाया जाएगा. उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने कहा, "ई-पाठ्यक्रम शुरू में आठ क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किए जाएंगे और वर्चुअल लैब विकसित किए जाएंगे."

 

नई शिक्षा नीति के तहत हुए 10 बड़े बदलाव

नई नीति के तहत स्कूल पाठ्यक्रम के 10 + 2 ढांचे की जगह 5 + 3 + 3 + 4 का नया पाठयक्रम संरचना लागू किया जाएगा. इसका मतलब है कि पहले के पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूल के तीन साल और कक्षा 1 व कक्षा 2 के दो साल सहित फाउंडेशन स्टेज शामिल होंगे. इसके अगले तीन साल कक्षा 3 से 5 की तैयारी के चरण में विभाजित किया जाएगा. इसके बाद के तीन साल मध्य चरण कक्षा 6 से 8 और माध्यमिक अवस्था के चार वर्ष कक्षा 9 से 12 होंगे.


नई नीति के तहत पाँचवी क्लास तक मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई का माध्यम रखने की बात कही गई है. इसे कक्षा आठ या उससे आगे भी बढ़ाया जा सकता है. विदेशी भाषाओं की पढ़ाई सेकेंडरी लेवल से होगी. हालांकि नई शिक्षा नीति में यह भी कहा गया है कि किसी भी भाषा को थोपा नहीं जाएगा. बता दें, दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने नई नीति के मसौदे में इस बिंदु को लेकर आपत्ती जताई थी कि हिंदी थोपी जा रही है.

 

छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे. इसके लिए इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद से ही इंटर्नशिप करवाई जाएगी. म्यूज़िक और आर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा. इन्हें पाठयक्रम में लागू किया जाएगा.

स्कूलों में शैक्षणिक धाराओं, पाठ्येतर गतिविधियों और व्यावसायिक शिक्षा के बीच ख़ास अंतर नहीं किया जाएगा.

नई शिक्षा नीति के अनुसार विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली आम प्रवेश परीक्षा होगी. ये परीक्षा एनटीए यानी नेशनल टेस्ट‍िंग एजेंसी कराएगी.

उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा (लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर). अब यूजीसी और एआईसीटीई समाप्त कर दिए जाएंगे और पूरे उच्च शिक्षा के लिए एक नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा.

पहली बार मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम लागू किया गया है. आप इसे ऐसे समझ सकते हैं. आज की व्यवस्था में अगर चार साल इंजीनियरिंग पढ़ने या छह सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारणवश आगे नहीं पढ़ पाते हैं तो आपके पास कोई उपाय नहीं होता, लेकिन मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफ़िकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जाएगी. इससे उन छात्रों को बहुत फ़ायदा होगा जिनकी पढ़ाई बीच में किसी वजह से छूट जाती है.

जो छात्र रिसर्च करना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा, जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे. लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए (MA) के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद सीधे पीएचडी (PhD) कर सकते हैं. उन्हें एमफ़िल (M.Phil) की ज़रूरत नहीं होगी.

शोध करने के लिए नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (एनआरएफ़) की स्थापना की जाएगी. एनआरएफ़ का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध की संस्कृति को सक्षम बनाना होगा. एनआरएफ़ स्वतंत्र रूप से सरकार द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा.

उच्च शिक्षा संस्थानों को फ़ीस चार्ज करने के मामले में और पारदर्शिता लानी होगी.

सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि GDP का 6% शिक्षा में लगाया जाए जो अभी 4.43% है. इसमें बढ़ोतरी करके शिक्षा का क्षेत्र बढ़ाया जाएगा.

शिक्षा प्रणाली में बदलाव करते हुए उच्च गुणवत्ता और व्यापक शिक्षा तक सबकी पहुँच सुनिश्चित की गई है. इसके जरिए भारत का निरंतर विकास सुनिश्चित होगा साथ ही वैश्विक मंचों पर - आर्थिक विकास, सामाजिक विकास, समानता और पर्यावरण की देख - रेख, वैज्ञानिक उन्नति और सांस्कृतिक संरक्षण के नेतृत्व का समर्थन करेगा.

जो छात्र रिसर्च करना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा, जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे. लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए (MA) के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद सीधे पीएचडी (PhD) कर सकते हैं. उन्हें एमफ़िल (M.Phil) की ज़रूरत नहीं होगी.

शोध करने के लिए नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (एनआरएफ़) की स्थापना की जाएगी. एनआरएफ़ का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध की संस्कृति को सक्षम बनाना होगा. एनआरएफ़ स्वतंत्र रूप से सरकार द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा.

उच्च शिक्षा संस्थानों को फ़ीस चार्ज करने के मामले में और पारदर्शिता लानी होगी.

सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि GDP का 6% शिक्षा में लगाया जाए जो अभी 4.43% है. इसमें बढ़ोतरी करके शिक्षा का क्षेत्र बढ़ाया जाएगा.

शिक्षा प्रणाली में बदलाव करते हुए उच्च गुणवत्ता और व्यापक शिक्षा तक सबकी पहुँच सुनिश्चित की गई है. इसके जरिए भारत का निरंतर विकास सुनिश्चित होगा साथ ही वैश्विक मंचों पर - आर्थिक विकास, सामाजिक विकास, समानता और पर्यावरण की देख - रेख, वैज्ञानिक उन्नति और सांस्कृतिक संरक्षण के नेतृत्व का समर्थन करेगा.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय का बदला गया नाम, अब 'शिक्षा मंत्रालय' से होगी पहचान

First published: 29 July 2020, 22:33 IST
 
अगली कहानी