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एनआईटी श्रीनगर बना राष्ट्रवाद का नया अखाड़ा

गौहर गिलानी | Updated on: 8 April 2016, 8:22 IST
QUICK PILL
  • एनआईटी श्रीनगर में क्रिकेट मैच को लेकर कश्मीरी और गैर-कश्मीरी छात्रों के बीच विवाद हो गया. गैर-कश्मीरी छात्रों ने अपनी सुरक्षा को लेकर मानव संसाधन मंत्रालय से लगायी गुहार.
  • केंद्र सरकार ने छात्रों की सुरक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस को हटाकर सीआरपीएफ तैनात किया. राज्य में हाल ही में बनी पीडीपी-बीजेपी सरकार आलोचना के घेरे में.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, श्रीनगर में एक क्रिकेट मैच को लेकर बवाल मचा हुआ है. ये विवाद तब शुरू हुआ जब एनआईटी में पढ़ने वाले जम्मू-कश्मीर के कुछ स्थानीय छात्रों ने टी-20 वर्ल्ड कप के भारत और वेस्टइंडीज के बीच 31 मार्च को हुए सेमीफाइनल में भारत की हार के बाद जश्न मनाना शुरू कर दिया.

राज्य के बाहर के छात्रों ने इसका विरोध किया. दोनों पक्षों के बीच इसे लेकर बहस हो गयी जो विवाद में बदल गयी. एनआईटी में 1800 गैर-स्थानीय और 150 स्थानीय छात्र हैं.

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राज्य में हाल ही में गठित पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार इस मुद्दे पर आलोचना में घिर गयी है.

कश्मीर में भारतीय क्रिकेट टीम का विरोध नई बात नहीं है. सुनील गावस्कर ने अपनी किताब 'रन्स एन रुइंस' में लिखा है कि जब 1983 में वो श्रीनगर के शेरे-कश्मीर स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ क्रिकेट खेल रहे थे तो स्थानीय दर्शक उन्हें हूट कर रहे थे और वेस्टइंडीज को शाबासी दे रहे थे.

विवाद


जम्मू-कश्मीर से बाहर के छात्रों ने घटना के बाद संस्थान के निदेशक के दफ्तर के बाहर जाकर विरोध प्रदर्न किया. वो कश्मीरी छात्रों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे. छात्रों ने संस्थान में तिरंगा फहराने की भी कोशिश की. वहीं कुछ कश्मीरी छात्रों ने भारत से 'आज़ादी' के नारे लगाए.

बाहरी छात्रों ने आरोप लगाया है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उनपर लाठीचार्ज किया. पुलिस ने इससे इनकार किया है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कैच को बताया, "नॉन-लोकल लड़के राई का पहाड बना रहे हैं. ये बहुत छोटा मसला है. कैम्पस में ऐसी बहसें सामान्य बात हैं. आपको पीड़ित बनकर मामले को देशभक्ति का रंग देकर गरमाना नहीं चाहिए."

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कश्मीरी छात्रों का दावा है कि भारत की हार के बाद गैर-कश्मीरी छात्रों ने उन्हें 'मारा-पीटा.' एनआईटी में मीडिया समेत सभी बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है. बाहरी छात्र सोशल मीडिया के माध्यम से 'कैम्पस के अंदर के हालात' पर जानकारी साझा कर रहे हैं. छात्र सोशल मीडिया पर 'सेव द स्टूडेंट्स ऑफ एनआईटी इन श्रीनगर' कैंपन भी चला रहे हैं.

छात्र अपने परिवारवालों और दोस्तों से मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय से मदद करने की गुहार लगाने के लिए कह रहे हैं. मंगलवार को एनआईटी तीसरे वर्ष के छात्र संस्थान के निदेशक रजत गुप्ता से मिले. उन्होंने मामले में एचआरडी मंत्रालय के सीधे हस्तक्षेप की मांग की.

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एनआईटी के रजिस्ट्रार फैयाज़ मीर ने कैच को बताया एचआरडी ने "छात्रों की शिकायत सुनने के लिए" एक टीम भेजी है.

उन्होंने बताया, "गैर-स्थानीय छात्रों ने कुछ मांगे रखी हैं. एक बार जब बैठक हो जाएगी तब मामला ज्यादा स्पष्ट हो सकेगा."

गैर-स्थानीय छात्र एनआईटी परिसर में तिरंगा झंडा फहराने की मांग कर रहे हैं. जबकि स्थानीय छात्र अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को रखने की आजादी मांग रहे हैं.

सुरक्षा पर भरोसा


गैर-स्थानीय छात्रों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है. जिसके बाद केंद्र सरकार ने एनआईटी की सुरक्षा में तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस को हटाकर सीआरपीएफ की दो कंपनियां तैनात की हैं. इस फैसले पर भी विवाद हो गया है.

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने टवीट किया, "जम्मू-कश्मीर पुलिस की जगह सीआरपीएफ लगाना और एचआरडी की टीम के पहुंचने से पूरा पता चल रहा है कि दिल्ली का महबूबा मुफ्ती में कितना भरोसा है."

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नाम न देने की शर्त पर एक वरिष्ठ राजनीतिक टिप्पणीकार ने कहा, "ये स्थानीय पुलिस का अपमान है."

वो कहते हैं, "जिसने कश्मीर में चरमपंथ की कमर तोड़ दी. जिसने 2009 और 2010 में कई किशोर प्रदर्शनकारियों की जान ले ली आज भारत सरकार एनआईटी के छोटे से मामले में उन्हीं पर भरोसा नहीं कर रही है."

मामले की गंभीरता


हज़रतबल के सब-डिविजनल पुलिस अफसर साजाद बुखारी कहते हैं कि "हालात नियंत्रण में हैं."

वो कहते हैं, "अब हालात पूरी तरह सामान्य हैं. एचआरडी की टीम गैर-स्थानीय छात्रों से मिली है. उन्होंने अपनी मांगे रखी हैं. मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि अब यहां कानून-व्यवस्था की कोई दिक्कत नहीं है."

गैर-स्थानीय छात्रों के दावे के नकारते हुए स्थानीय छात्र कह रहे हैं कि एनआईटी में सोमवार से 'सामान्य कक्षाएं' शरू हो चुकी हैं. एनआईटी पिछले शुक्रवार को बंद हुआ था.

एक स्थानीय छात्र ने कहा, "जानबूझ कर स्थानीय और गैर-स्थानीय छात्रों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश की जा रही है."

अलगाववादी नेता यासिन मलिक कहते हैं कि भारतीय मीडिया छोटे से मामले को तूल दे रहा है

जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने छात्रों और उनके परिवारवालों को आश्वासन दिया है कि उन्हें 'चिंता करने की जरूरत' नहीं है. उन्होंने कहा है कि एनआईटी का मामला 'प्रशासनिक' है न कि 'सुरक्षा व्यवस्था' का.

अख्तर ने कहा कि ये मुद्दा स्थानीय बनाम गैर-स्थानीय का नहीं है.

राजनीतिक नतीजे


अलगाववादी नेता यासिन मलिक पूरे मामले में 'भारतीय मीडिया की भूमिका' पर सवाल उठाते हैं.

मलिक ने कैच से कहा, "इंडियन मीडिया हिस्टीरिया पैदा कर रहा है. ये बहुत छोटा सा मामला है लेकिन इंडियन मीडिया इसे बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है."

कट्टरपंथी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कहा कि "एनआईटी जैसी घटनाओं के गंभीर नतीजे हो सकते हैं."

गिलानी ने कहा, "कश्मीर से बाहर कश्मीरी छात्रों का उत्पीड़न अक्सर होता है. ये हैरान कर देने वाली बात है कि अब कश्मीर के अंदर ऐसा होने लगा है. हमें पूरे मामले में साजिश की बू आ रही है."

दूसरी तरफ आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बुधवार को जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया.

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एबीवीपी के नेता राजेंद्र कुमार ने कहा, "राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और एनआईटी के छात्रों को सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए."

First published: 8 April 2016, 8:22 IST
 
गौहर गिलानी @catchnews

श्रीनगर स्थित पत्रकार, टिप्पणीकार और राजनीतिक विश्लेषक. पूर्व में डॉयचे वैले, जर्मनी से जुड़े रहे हैं.

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