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PM मोदी 60 साल में तैयार हुए नेशनल वॉर मेमोरियल का आज करेंगे उद्धाटन, जानें क्या है इसमें खास

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 February 2019, 10:11 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 60 साल में तैयार हुए नेशनल वॉर मेमोरियल का उद्धाटन करेंगे. इसे इंडिया गेट के पास 40 एकड़ में बनाया गया है. ये स्मारक उन उन जवानों के प्रति सम्मान का सूचक होगा जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी. जारी किए गए प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस कार्यक्रम का आयोजन सेना की परंपरा के अनुसार होगा, जिसे जवानों को समर्पित किया जाएगा. मेमोरियल को देश की रक्षा की खातिर शहीद होने वाले 25 हजार 942 से वीर जवानों की याद में बनाया गया है.

सैन्य बैंड सहित जवानों ने रविवार की शाम नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीदों को सलामी दी. इस स्मारक के चारों ओर दूधिया लाइटें भी लगाई गई हैं. इस मेमोरियल वॉर को विजय चौक से आसानी से देखा जा सकता है.

खबरों के मुताबिक, शहीदों की याद में स्मारक और संग्रहालय बनाने पर विचार सबसे पहले वर्ष 1968 में ही किया गया था, जोकि अब देश को मिला है. साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के कुछ ही माह बाद 2015 में इसे अंतिम अनुमति दी गई. इसके बाद से ही इंडिया गेट के पास इसका निर्माण शुरू किया गया.

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इसे ऐसे तैयार किया गया है, जिससे राजपथ और इसकी भव्य संरचना के साथ कोई छेड़छाड़ न हो. इससे लगे प्रस्तावित नेशनल वॉर म्यूजियम के लिए उपयुक्त डिजाइन तय करने की प्रक्रिया चल रही है. इसकी शुरुआती लागत करीब 500 करोड़ रुपए है और इसे तैयार होने में अभी और कुछ साल लगेंगे.

21 परमवीर चक्र विजेताओं की लगी है मूर्ति

मेमोरियल के केंद्र में 15 मीटर ऊंचा स्मारक स्तंभ बनाया गया है. इस पर भित्ति चित्र, ग्राफिक पैनल, शहीदों के नाम और 21 परमवीर चक्र विजेताओं की मूर्ति बनाई गई है. ये स्मारक चार चक्रों पर केंद्रित है, जिसमें अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र, रक्षक चक्र शामिल हैं. इसमें थल सेना, वायुसेना और नौसेना के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई है. शहीदों के नाम दीवार की ईंटों में उकेरे गए हैं. इस स्मारक के निचले भाग में अमर जवान ज्योति जैसा बनाया गया है.

4 साल पहले निर्माण को मिली थी मंजूरी

नेशनल वॉर मेमोरियल बनाने का प्रस्ताव सशस्त्र बलों द्वारा पहली बार 1960 में दिया गया था. सरकारों की उदासीनता, ब्यूरोक्रेट्स और सेना के बीच गतिरोध से इसका निर्माण नहीं हो सका. मोदी सरकार ने अक्टूबर 2015 में इस स्मारक के निर्माण को मंजूरी दी थी.

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First published: 25 February 2019, 9:58 IST
 
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