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छगन भुजबल के बचाव में उतरे एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार

अश्विन अघोर | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST
QUICK PILL
  • लंबी खामोशी के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस प्रमुख शरद पवार ने छगन भुजबल और समीर भुजबल का बचाव करते हुए कहा है कि पार्टी किसी भी कीमत पर भुजबल का साथ नहीं छोड़ेगी.
  • कुछ दिनों पहले ही ईडी ने दिल्ली के महाराष्ट्र सदन के निर्माण में हुई कथित घपलेबाजी के मामले में कार्रवाई करते हुए भुजबल के भतीजे को गिरफ्तार किया है. इस मामले में भुजबल के बेटे को भी गिरफ्तार होने की संभावना है.

कई महीनों की खामोशी के बाद आखिरकार राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने छगन भुजबल का बचाव किया है. नई दिल्ली में महाराष्ट्र सदन के निर्माण में कथित वित्तीय घपलेबाजी और मुंबई के कलिना में जमीन हड़पने के मामले में एनसीपी नेता छगन भुजबल को फिलहाल ईडी और एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है.

मंगलवार को मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए पवार ने समीर भुजबल की गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया. समीर भुजबल पूर्व एनसीपी सांसद छगन भुजबल के भतीजे हैं.

शरद पवार ने कहा कि छगन भुगबल के भतीजे की गिरफ्तारी राजनीति बदले की कार्रवाई है  

पवार ने कहा, 'यह राज्य के इतिहास में पहली बार हो रहा है जब दो अलग-अलग एजेंसियां एक ही मामले की जांच कर रही हैं. शिकायकर्ता की मंशा पर सवाल उठाने की पूरी गुंजाइश है क्योंकि वह एक ऐसी पार्टी से जुड़े हुए हैं जो फिलहाल राज्य और केंद्र की सत्ता में है.' उन्होंने कहा कि एनसीपी पूरी तरह से भुजलब के साथ खड़ी है और वह किसी भी हद तक जाकर उनकी मदद करेगी. 

उन्होंने कहा, 'भुजबल के परिवार को इस हालात में छोड़ने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता. भुजबल परिवार के खिलाफ पड़ रहे लगातार छापों का एकमात्र मकसद उन्हें आपराधिक मामलों में फंसाना है. मुझे इस मामले में सरकार की मंशा पर वाकई में शक है.'

जांच करने वाली एजेंसियों पर सवाल उठाते हुए पवार ने कहा कि सरकार अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल कर रही है. इस बीच अमेरिका में सामाजिक न्याय पर एक सम्मेलन में भाग लेने गए छगन भुजबल ने कहा कि नई दिल्ली के महाराष्ट्र सदन में हुई कथित घपलेबाजी में समीर और पंकज भुजबल का कोई हाथ नहीं है. उन्होंने कहा, 'नई दिल्ली में महाराष्ट्र सदन के निर्माण से जुड़ा फैसला तत्कालीन कैबिनेट ने लिया था. मैं इन फैसलों के लिए अकेले जिम्मेदार नहीं हो सकता.'

ओबीसी अधिकारों से जुड़े सामाजिक मुद्दों को आगे बढ़ाए जाने में भुजबल की अहम भूमिका रही है

इस मामले में पवार ने एक साल तक कुछ नहीं बोला और उनकी इस चुप्पी को लेकर राजनीतिक सवाल उठने लगे थे. भुजबल को एनसीपी के कार्यकाल में कई अहम जिम्मेदारियां मिली थीं. उन्होंने शिवसेना का साथ छोड़कर पवार से हाथ मिलाया था जब वह कांग्रेस में थे. इसके बाद जब पवार ने अपनी पार्टी बनाई तब भी भुजबल उनके साथ खड़े रहे. राज्य में ओबीसी अधिकारों से जुड़े सामाजिक मुद्दों को आगे बढ़ाए जाने में भुजबल की अहम भूमिका रही है. 

हालांकि इन सबके बावजूद एंटी करप्शन ब्यूरो और ईडी की कार्रवाई के खिलाफ पवार ने कुछ नहीं बोला. ऐसी भी अटकलें लगाई जाने लगीं कि पवार 2015 के बीच जितेंद्र अवहद को ओबीसी नेता के तौर पर आगे बढ़ा रहे हैं.

लेकिन मंगलवार को यू-टर्न लेते हुए पवार ने लोगों को चौंका दिया. भुजबल के बचाव का दूसरा कारण भी है. समीर के गिरफ्तार होने और भुजबल के बेटे पंकज की गिरफ्तारी की प्रबल संभावना के बीच छगन भुजबल ने अपना व्हाट्सएप डीपी चेंज कर लिया जिसमें एक व्यक्ति के हाथों में चाकू है और वह दूसरे व्यक्ति पर पीछे से वार कर रहा है.

पवार की पार्टी के अधिकांश बड़े नेता विवादों में हैं और ऐसे में उन्होंने पार्टी की छवि को बचाने की कोशिशें तेज कर दी हैं

छगन भुजबल के एक करीबी नेता ने अपना नाम नहीं प्रकाशित किए जाने की शर्त पर बताया, 'बदले डीपी की मदद से भुजबल ने यह संदेश देने की कोशिश की कि शरद पवार ने उनकी पीठ में छुरा भोंका है.' जब इस बारे में पवार से पूछा गया तो उन्होंने जवाब देने की बजाए मुस्कुरा इस सवाल को टाल दिया.

पवार की पार्टी के अधिकांश बड़े नेता विवादों में हैं और ऐसे में उन्होंने पार्टी की छवि को बचाने की कोशिशें तेज कर दी हैं. अजित पवार, सुनील तातकरे, छगन भुजबल और पवार जितेंद्र अवहद के खिलाफ कानूनी मामले चल रहे हैं जो आने वाले समय में इनके राजनीतिक करियर के लिहाज से खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे में पवार के पास इन नेताओं के बचाव के अलावा कोई और विकल्प नहीं है. केवल इस तरीके से ही वह अपनी पार्टी के नेताओं के भरोसे को मजबूत कर सकते हैं.

हालांकि यह आश्चर्य की ही बात है कि केंद्र में नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली के साथ बेहतर संबंध होने के बावजूद शरद पवार की पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और उसके कई नेताओं के खिलाफ कानूनी मामले चल रहे हैं.

शरद पवार के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने कहा कि छगन भुजबल के खिलाफ की गई कार्रवाई कानून और जांच में मिले सबूतों के आधार पर की गई है.

एनसीपी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई

अजित पवार फिलहाल एनसीपी में दूसरे बड़े नेता है. कांग्रेस-एनसीपी शासनकाल में अजित पवार के पास वित्त, सिंचाई और ऊर्जा मंत्रालय का प्रभार था.

सुनील तटकारे भी कोंकण क्षेत्र के कद्दावर नेता है. उनके पास भी अहम मंत्रालयों का प्रभार था. अजित और तटकरे को 35,000 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले का सामना करना पड़ रहा है. 1999-2009  के बीच पवार के पास सिंचाई विभाग का प्रभार था. सुनील तटकरे 2009 में सिंचाई मंत्री बने और 2014 तक उनके पास कार्यभार रहा. तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा था कि वह सिंचाई की स्थिति को लेकर सफेद पत्र जारी करेंगे और इसके मुताबिक तटकरे के खिलाफ वित्तीय घोटाले का आरोप बनता है. तटकरे के खिलाफ 140 फर्जी कंपनियों को बनाने का आरोप है.

जितेंद्र अवहद और निरंजन दावखरे

जितेंद्र अवहद ने पार्टी के भीतर ओबीसी नेता के तौर पर छगन भुजबल को विस्थापित किया. 2014  के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी में उनकी स्थिति और अधिक मजबूत हुई. जल्द ही अपनी धारदार भाषण और आक्रामक छवि की वजह से वह हर जगह छा गए.  

हालांकि ठाणे के एक बिल्डर सूरज परमार की खुदकुशी के बाद अवहद घेरे में आ गए. पुलिस को परमार की घर से एक डायरी मिली जिसमें ठाणे के विभिन्न नेताओं को पैसे दिए जाने का जिक्र था. इसमें एनसीपी कॉरपोरेटर हनुमंत जगदाले और नजीब मुल्ला जैसे नेता शामिल थे. परमार ने अपनी डायरी में लिखा था कि जगदाले और मुल्ला की तरफ से परेशान किए जाने के बाद उन्होंने बड़ी मात्रा में रकम का भुगतान किया. 

पुलिस ने इस मामले में इन दोनों के अलावा कांग्रेस के विक्रांत चव्हाण और एमएनएस के सुधाकर चव्हाण को भी गिरफ्तार किया. मुल्ला की गिरफ्तारी से अवहद को बड़ा झटका लगा. मुल्ला को अवहद का दायां हाथ समझा जाता था. 

First published: 3 February 2016, 11:03 IST
 
अश्विन अघोर @catchnews

मुंबई स्थित स्वतंत्र पत्रकार

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