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मिस्टर एंड मिसेज सिद्धू के लिए बीजेपी की बेताबी

राजीव खन्ना | Updated on: 24 April 2016, 8:56 IST
QUICK PILL

आम आदमी पार्टी में शामिल होने के अफवाहों के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नवजोत सिंह सिद्धू को राज्यसभा भेज रही है. पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी नेतृत्व सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू को पार्टी में बनाए रखने के लिए बेताब है.

पंजाब की राजनीति में ताकतवर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और कांग्रेस के बीच आम आदमी पार्टी ने कम ही समय में तेजी को खुद को स्थापित किया है. पिछले लोकसभा चुनाव में पंजाब में आम आदमी पार्टी को चार सीटें मिली थी. पिछले कुछ महीनों से सिद्धू दंपत्ति की आप में जाने की अफवाहें उड़ रही थी.

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ऐसी खबरें आ रही थीं कि 'आप' नवजोत सिंह सिद्धू को 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की योजना बना रही है.

पंजाब में बीजेपी के लिए सिद्धू जरूरी क्यों हैं?

क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू पंजाब में युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं. अमृतसर से सिद्धू तीन बार लोकसभा का चुनाव लड़ा है (इसमें एक उप चुनाव भी शामिल है) और तीनों बार वह विजयी रहे हैं. सिद्धू का राजनीतिक दामन साफ है और उनकी निष्ठा पर भी कोई सवाल नहीं है.

विश्लेषकों के अनुसार राज्य में अपनी मजबूती के लिए बीजेपी को सिद्धू की जरूरत है. सिद्धू के राजनीतिक जीवन पर नजर रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार के अनुसार, 'पंजाब में पार्टी को एक सिख चेहरा चाहिए. यहां बीजेपी की उपस्थिति केवल शहरों तक सीमित है. सिख नेता नहीं हो तो बीजेपी को सिर्फ हिंदुओं की पार्टी के तौर पर जाना जाएगा. बीजेपी में सिद्धू एक मात्र जाट सिख हैं जिनकी लोगों के बीच अपील है.'

विश्लेषकों के अनुसार राज्य में अपनी मजबूती के लिए बीजेपी को नवजोत सिंह सिद्धू की जरूरत है

पिछले चार मौके पर बीजेपी ने अकाली दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है. राज्य में विधानसभा की 117 सीटों में से बीजेपी 23 पर चुनाव लड़ती है. 2007 में उसे सबसे ज्यादा 19 सीटें मिली थी जबकि पिछले चुनाव में बीजेपी को 19 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. पार्टी को महज 7.15 फीसदी मत मिले.

पार्टी के साथ सिद्धू का मोहभंग

2014 के अाम चुनाव में अरुण जेटली को अमृतसर से बीजेपी का उम्मीदवार बनाया है तब सिद्धू ने राजनीतिक चुप्पी साध ली. कथित तौर पर खबरे आईं कि सिद्धू ने जेटली के लिए प्रचार करने और किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ने के लिए मना कर दिया है. बीजेपी पूर्ण बहुमत से सत्ता में आ गई लेकिन अमृतसर में कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह के हाथों जेटली को हार का सामना करना पड़ा. विडंबना है कि सिंह भी अमृतसर में बाहरी उम्मीदवार थे जो सिर्फ पटियाला से जेटली को हराने के लिए आए थे.

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पर्यवेक्षकों का कहना है कि राज्य में अकाली दल के नेताओं के साथ सिद्धू के साथ ठकराव उस समय शुरू हुआ जब उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र अनदेखी के लिए पंजाब के वित्त मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया पर निशाना साधा. अकाली नेता सिद्धू को अमृतसर सीट से बेदखल करना चाहते थे और उन्हें लगता था कि वे किसी को भी यह सीट जीताने में मदद कर सकते हैं. ऐसा माना जाता है कि इसी वजह से जेटली को अमृतसर से चुनाव लड़ने के लिए कहा गया.

चुनाव के बाद बीजेपी ने सिद्धू को मनाने के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में पद की पेशकश की जिसे उन्होंने ठुकरा दिया.

सिद्धू को पहले राज्यसभा क्यों नहीं भेजा गया?

पिछले महीने पंजाब से बीजेपी ने श्वेत मलिक को राज्यसभा भेजा था. पर्यवेक्षकों के अनुसार नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पसंद होने के बावजूद सिद्धू के नाम पर सहमति नहीं बन पाई. एक कारण यह बताया गया कि अमृतसर में मिली हार के बाद जेटली और उनके समर्थक लगातार सिद्धू का विरोध कर रहे थे. उनका मानना है कि सिद्धू द्वारा चुनावी प्रचार नहीं करने के चलते बीजेपी को सीट गंवानी पड़ी.

अब बीजेपी ने सिद्धू को क्यों चुना

सिद्धू की चुप्पी के बीच एक अप्रैल को फेसबुक पर सिद्धू की पत्नी नवजोत की ओर से लिखा गया था, 'आखिरकार मैंने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है. मेरे ऊपर जो भार था वो अब खत्म हो गया.' इसके बाद ऐसी संभावनाएं व्यक्त की जाने लगी कि सिद्धू दंपति जल्द ही बीजेपी छोड़कर आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर लेगी. सूत्रों के अनुसार इसके तुरंत बाद बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व डैमेज कंट्रोल मोड में चला गया.

बीजेपी द्वारा स्थिति संभालने की कवायद

राजनीतिक विश्लेषक बलजीत बल्ली कहते हैं कि राज्यसभा में सिद्धू को नामित करके बीजेपी ने सही कदम उठाया है. अब पार्टी सिद्धू का उपयोग उत्तर प्रदेश सहित कई आगामी विधानसभा चुनावों में कर सकती है. अगर पंजाब में सिद्धू अकाली दल के लिए चुनाव प्रचार नहीं भी करते हैं तो भी उनकी उपस्थिति से बीजेपी को फायदा होगा.

बीजेपी ने सिद्धू को मनाने के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में पद की पेशकश की जिसे उन्होंने ठुकरा दिया

पर्यवेक्षकों के अनुसार सिद्धू दंपत्ति ने आप पार्टी का दामन थाम लिया होता तो राज्य में अकाली-बीजेपी गठबंधन को भारी नुकसान उठाना पड़ता. पंजाब के एक बीजेपी नेता कुछ समय पहले अनौपचारिक बातचीत में कहा था कि हम सिद्धू  को खोने का नुकसान नहीं झेल सकते. अगर सिद्धू पार्टी से चले जाते तो पार्टी नेताओं को चुनाव में समय बर्बाद करने से घर पर बैठना ज्यादा बेहतर होता.

सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर अमृतसर पूर्व से विधायक हैं. वह लगातार बीजेपी नेतृत्व से मांग कर रही हैं कि पंजाब में पार्टी को अकाली दल से अलग होकर चुनाव लड़ना चाहिए. शनिवार को उन्होंने एक बार फिर से अकाली-बीजेपी गठबंधन पर सवाल उठाते हुए बागी तेेवर दिखाया है.

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नवजोत कौर से एक बार फिर से कहा है कि अकाली दल के साथ उन्हें गंभीर मतभेद हैं और वह उऩके साथ चुनाव नहीं लड़ सकती. पार्टी भी समझ रही है कि उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू और अकाली दल के बीच मतभेद हैं इसलिए उन्हें  पंजाब से दूर रखा जा रहा है.

हालांकि पंजाब बीजेपी के एक वर्ग का मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष के रूप में विजय सांपला की नियुक्ति में देरी अकेले चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर पानी फेर चुका है.

First published: 24 April 2016, 8:56 IST
 
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