Home » इंडिया » Navratri will begin one month after Pitrupaksha
 

पितृपक्ष के एक महीना बाद शुरू होगा नवरात्र, इतने सालों बाद बन रहा है विशेष संयोग

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 August 2020, 16:01 IST

हर वर्ष पितृ पक्ष के समापन के अगले दिन से नवरात्र का आरंभ हो जाता है. घर स्थापना के साथ 9 दिनों तक नवरात्र की पूजा होती है. यानी पितृ अमावस्या के अगले दिन से प्रतिपदा के साथ शारदीय नवरात्र का आरंभ हो जाता है जो कि इस साल नहीं होगा.

वेद के मुताबिक पंचांगों के आधार पर मनाए जाने वाले सनातनी धर्मावलंबियों के पर्व-त्यौहार में कई बार अचंभा हो जाता है. ऐसा ही अचंभा 2020 में होने जा रहा है, जब आश्विन का शारदीय नवरात्र एक माह से देर शुरू होगा.


इस बार पितृपक्ष समाप्त होते ही मलमास शुरू जाएगा जिसके कारण पितृपक्ष और नवरात्र के बीच एक महीने का अंतर आ जाएगा. हालांकि आश्विन महीने में मलमास लगना और एक महीने एक अंतर पर दुर्गा पूजा आरंभ होना कोई नई बात नहीं. इस तरह का योग 19 सालों बाद बन रहा है. आश्विन मास में मलमास लगने के कारण चार महीने का चातुर्मास इस बार पांच महीने का होगा.

शताब्दी पंचांग के मुताबिक 2001 में भी आश्विन में मलमास लगने के कारण पितृपक्ष के एक महीन बाद नवरात्र शुरू हुआ था. उन्होंने बताया कि मिथिला, बनारसी एवं शताब्दी पंचांग के अनुसार इस साल आश्विन माह में अधिकमास होगा, यानी दो आश्विन मास होंगे.

 Muharram 2020: इस बार कब से शुरू हो रहा है मुहर्रम ? जानिए इससे जुड़ा हुआ इतिहास

शुद्ध आश्विन माह का पहला पक्ष यानी कृष्ण पक्ष तीन से 17 सितम्बर तथा द्वितीय पक्ष यानी शुक्ल पक्ष 17 से 31 अक्टूबर तक होगा. बीच में 18 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक अशुद्ध आश्विन माह यानी मलमास रहेगा.

भादो माह की पूर्णिमा तिथि दो सितम्बर को अगस्त मुनि को तर्पण करने के बाद तीन सितम्बर से पितृपक्ष शुरू हो जाएगा और पिता पक्ष की मृत्यु तिथि के दिन पिंडदान और तर्पण के साथ क्रमश: यह अमावस्या को समाप्त होगी.

इस साल मां दुर्गा घोड़ा पर आ रही हैं, जिसमें क्षत्र भंग का योग हैं जबकि भैंस पर होने वाली विदाई शोक और संताप कारक हो सकता है. दशहरा के बाद 25 नवम्बर को देवोत्थान एकादशी के साथ ही चातुर्मास का समापन हो जाएगा जिसके बाद विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश समेत सभी मांगलिक कार्य सुचारू रूप से शुरू हो जाएंगे.

सूत्रों के मुताबिक एक सूर्य वर्ष 365 दिन छह घंटे का होता है जबकि चंद्र 354 दिनों का माना जाता है. इन दोनों सालों के बीच के अंतर से हर तीन सालों में एक महीने अतिरिक्त होने से उसे अधिकमास या मलमास कहा गया है.

Hartalika Teej 2020: हरितालिका तीज का व्रत करवाचौथ से भी ज्यादा माना जाता है कठिन, ये है खास वजह

First published: 21 August 2020, 16:01 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी