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ओडिशा: बाघों की गिनती पर नक्सली हमले का साया

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 January 2016, 18:00 IST

नक्सली हमले के डर से ओडिशा सरकार की बाघों की गिनती करने की योजना अधर में लटक सकती है. ओडिशा सरकार फरवरी के पहले हफ्ते से राज्य में बाघों की गिनती करने जा रही है.

नक्सलियों के खौफ के कारण माना जा रहा है कि अधिकारी बाघों की गिनती के लिए शायद ही सुनबेड़ा वन्यजीव अभयारण्य पहुंचें. बीते कुछ सालों में यह अभयारण्य नक्सलियों के गढ़ के रूप में उभर कर सामने आया है.

2004 में नुआपाड़ा जिले के इस अभयारण्य के लाल गलियारे (रेड कारिडोर) का हिस्सा बनने के बाद से यहां पर बाघों की गणना नहीं की गई है. केंद्र सरकार ने इस अभयारण्य को 2014 में सैद्धांतिक रूप से बाघ संरक्षित क्षेत्र घोषित किया था.

2004 की गणना के मुताबिक, सुनबेड़ा में 32 बाघ और 36 तेंदुए थे

नक्सलियों ने इस अभयारण्य में पहली बड़ी वारदात मई 2012 में की थी, जब इनके हमले में नौ पुलिसकर्मी मारे गए थे. इसके बाद से 600 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य से वन्यजीव प्रेमी और पर्यटक दूर रहते हैं.

नक्सली अभयारण्य के अंदर और आस-पास के इलाकों में कई वन रक्षक और पुलिस अधिकारियों की हत्या कर चुके हैं. हालांकि, ओडिशा सरकार को उम्मीद है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों के की तैनाती की वजह से इस बार यहां बाघों की गिनती हो सकेगी.

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वाइल्डलाइफ) एसएस श्रीवास्तव ने कहा, 'हम इस बार बाघों की गिनती को लेकर आशान्वित हैं. पुलिस के अलावा केंद्रीय बल भी तैनात हैं. अगर कोई अनचाही घटना हुई तो हम गिनती छोड़ देंगे. लेकिन, आज की तारीख में यह तय है कि हम गिनती करने जा रहे हैं.'

2004 की गणना के मुताबिक, सुनबेड़ा में 32 बाघ और 36 तेंदुए थे. टाइगर अनुमान रपट-2014 में कहा गया है कि ओडिशा में बाघों की संख्या 28 ही है. इस आंकड़ें को ओडिशा का वन विभाग मानने के लिए तैयार नहीं है. विभाग का अनुमान है कि राज्य में 60 बाघ हो सकते हैं. (आईएएनएस)

First published: 25 January 2016, 18:00 IST
 
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