Home » इंडिया » nayantara sahgal and sahitya akademi president vishwant prasad tiwari on award return
 

ये खबर झूठी है, मैंने अवार्ड वापस नहीं लिया हैः नयनतारा सहगल

लमत आर हसन | Updated on: 11 February 2017, 6:47 IST

नयनतारा सहगल अंग्रेजी की वरिष्ठ और सम्मानित लेखिका हैं. पिछले साल अक्टूबर में उन्होंने देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार वापस कर दिया था. शुक्रवार को मीडिया में अचानक ये खबर चलने लगी कि उन्होंने लौटाया गया अवार्ड फिर से स्वीकार कर लिया है, लेकिन ये खबर गलत थी.

सहगल ने कैच से बातचीत में कहा, "ये खबर झूठी है, मैंने जो अवार्ड लौटाया था उसे वापस नहीं लिया है." वो कहती हैं कि जिस माहौल की वजह से मैंने अवार्ड लौटाया था वो माहौल अभी नहीं बदला है.

सहगल कहती हैं, "मेरी और बाकी लेखकों की अभिव्यक्ति की आजादी की लड़ाई अभी जारी है."

साहित्य अकादमी ने हाल ही में पुरस्कार वापस करने वाले सभी लेखकों को पत्र लिखकर कहा कि उसकी नई नीति के अनुसार वो वापस किए गए अवार्ड अपने पास नहीं रख सकती. अकादमी ने सहगल का एक लाख रुपये का चेक भी लौटा दिया, जिसे उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में अकादमी को दिया था.

पढ़ेंः पुरस्कार वापसी और बीफ बवाल के लिए जाना जाएगा साल 2015

सहगल को 1986 में 'रिच लाइक अस' उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था.

सहगल ने कैच को बताया, "अकादमी ने एक पत्र लिखकर कहा है कि उसने नई नीति बनायी है जिसके तहत वो वापस किए गए अवार्ड अपने पास नहीं रख सकती. उन्हें ये फैसला करने में इतने महीने लग गए. उन्होंने ये पहले क्यों नहीं किया?"

सहगल कहती हैं, "अकादमी को मैंने अक्टूबर में एक लाख रुपये का जो चेक दिया था अब वो वैध नहीं है. चेक की वैधता जारी किए जाने की तारीख से तीन महीने तक ही रहती है. अब अगर अकादमी उसे लौटा रही है तो ये उसका मामला है."

सहगल इस बात से नाराज हैं कि किसी ने उनसे इस खबर की पुष्टि के लिए बात करनी जरूरी नहीं समझा.

मीडिया में खबर आने के बाद जारी एक हस्ताक्षरित बयान में सहगल ने कहा, "मैं साफ कर दूं कि मैं न तो अवार्ड वापस ले रही हूं, न ही चेक, जो पहले ही अवैध हो चुका है. मेरा विरोध प्रतिरोध की आवाजों को दबाने के खिलाफ था और मैं अभिव्यक्ती की आजादी की आवाज उठाती रहूंगी."

पढ़ेंः कलबुर्गी हत्या के विरोध में लेखक ने साहित्य अकादमी पुरस्कार ठुकराया

पिछले साल अभिव्यक्ति की आजादी और असहिष्णुता के मुद्दे पर दर्जनों लेखकों, कलाकारों, विद्वानों, वैज्ञानिकों, फिल्मकारों ने विभिन्न तरीकों से विरोध जताया था.

सहगल के लौटाए गए अवार्ड को वापस लेने की अफवाह को भी कुछ लेखक प्रतिरोध की आवाज को दबाने के एक खास तरीके के रूप में देख रहे हैं.

लेखिका गीता हरिहरन कहती हैं, "हम जिस माहौल में रह रहे हैं ये उसका एक हिस्सा है. इसके तहत अफवाह फैलाकर झूठ बोलकर विरोध की आवाज को दबा देने की कोशिश की जाती है. रोहित वेमुला की मौत पर उठे सवाल और उसके बारे में बोले गए झूठ से लेकर लौटाए गए अवार्ड 'वापस लेने' तक में ये कोशिश साफ झलकती है."

साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी कहते हैं कि लेखकों से अवार्ड दोबारा लेना असंभव है.

तिवारी ने कैच को बताया, "अकादमी के कार्यकारी बोर्ड ने दिसंबर में ये फैसला लिया कि अकादमी लेखकों से अवार्ड वापस नहीं लेगी. हमने सभी लेखकों को पत्र लिखकर कहा कि वो अपने अवार्ड वापस नहीं कर सकते."

पढ़ेंः 'फासीवाद की पहचान है कि वह सबसे पहले राजनीति को खारिज करता है'

तिवारी ने कहा, "अगर हमें अवार्ड वापस लेना होता तो हम नयनतारा सहगल का चेक भुना चुके होते. हमने उन्हें चेक लौटा दिया. अब लेखक जो कह रहे हैं उन्हें कहने दीजिए."

ये पूछने पर कि क्या कार्यकारी बोर्ड की बैठक थोड़ी जल्दी नहीं की जा सकती थी? तिवारी ने कहा, "हमने अक्टूबर में बैठक की थी फिर दिसंबर में की. इसब बीच हमने पचासों कार्यक्रम कराए. हमारा पास बहुत सारा काम होता है. जिनमें व्यस्त रहते हैं."

तिवारी ने कहा, "रिकॉर्ड को बदला नहीं सकता. साहित्य अकादमी से पुरस्कृत लेखकों की रचनाएं कई भाषाओं में अनुदित हो चुकी हैं. 'साहित्य अकादमी पुरस्कार किसे मिला?' सामान्य ज्ञान के परीक्षाओं में पूछा जाने वाला लोकप्रिय सवाल है. आप इसे कैसे बदल देंगी?"

तिवारी ने कहा कि वो इस मामले में अकादमी द्वारा उठाए गए कदम से संतुष्ट हैं और वो देश भर के लेखकों के साथ हैं.

तिवारी को भरोसा है कि अकादमी देर-सबेर इन लेखकों का भरोसा फिर जीत लेगी और सब कुछ सामान्य हो जाएगा.

बहरहाल, नयनतारा सहगल के रुख को देखते हुए ऐसा नहीं लगता नहीं कि ये राह इतनी आसान होगी.

First published: 23 January 2016, 1:52 IST
 
लमत आर हसन @LamatAyub

संवाददाता, कैच न्यूज़

पिछली कहानी
अगली कहानी