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साइबर अपराध एक दशक में 2000 फीसदी बढ़े हैं, किसी भी अपराध से ज्यादा तेज

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 1 September 2016, 7:55 IST
(कैच)
2,949,400

कुल संज्ञेय अपराध भारत में वर्ष 2015 में भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज किए गए. आईपीसी के तहत दर्ज अपराधों में महाराष्ट्र और मप्र क्रमश: 9.3 और 9.1 फीसदी के साथ सबसे आगे रहे.

वर्ष 2005 में दर्ज कुल अपराधों की संख्या 1,822,602 थी.

पिछले एक दशक में क्राइम रिपोर्टिंग की संख्या में 62 फीसदी वृद्धि देखी गई.

आईपीसी के तहत दर्ज अपराधों में चोरी के मामलों की संख्या सबसे ज्यादा थी.हर घंटे आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत औसतन 337 मामले दर्ज किए गए और 414 लोग गिरफ्तार किए गए. वर्ष 2015 में.

34,651

बलात्कार के कुल मामले दर्ज किए गए 2015 में. वर्ष 2014 में 36,735 बलात्कार के मामले दर्ज हुए थे. इसका मतलब यह हुआ कि वर्ष 2015 में दुष्कर्म के मामलों की क्राइम दर घटी.

एक दशक पहले, केवल 18,359 दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए थे. वर्ष 2015 की तुलना में यह संख्या आधी थी.

हत्या के मामलों की संख्या में कोई बदलाव नहीं दिखा. वर्ष 2005 में हत्या की 32,719 घटनाएं हुईं थी जबकि 2015 में 32,127.

अपहरण और बहला-फुसलाकर भगा ले जाने वाली घटनाओं की संख्या जो 2005 में 22,832 थी, वह 2015 में बढ़कर 82,999 हो गई. दिल्ली और असम अपहरण और बहला-फुसला कर भगा ले जाने जैसी घटनाओं में सबसे आगे रहे.

94,172

बाल अपराध दर्ज हुए 2015 में. बच्चों के खिलाफ अपराधों में महाराष्ट्र शीर्ष पर रहा.

बाल अपराधों की जो संख्या वर्ष 2014 में 89,423 थी, वह 2015 में बढ़कर 94,172 हो गई यानी 5.3 फीसदी तक का इजाफा.

बच्चों के प्रति 44.5 फीसदी अपराध उनके अपहरण और उन्हें बहला-फुसलाकर ले जाने के थे.

25.8

फीसदी तक मानव तस्करी के मामले बढ़े 2015 में.

वर्ष 2015 में 6,877 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2014 में 5,466 मामले दर्ज हुए थे.

मानव तस्करी के सबसे अधिक मामले असम में 21.7 फीसदी दर्ज हुए जबकि पश्चिम बंगाल में 18.2 और तमिलनाडु में 8.4 फीसदी.

4.4

फीसदी अनुसूचित जाति के प्रति अपराधों में कमी आई है. वर्ष 2014 में यह संख्या 47,064 थी जो वर्ष 2015 में घटकर 45.003 हो गई.

जातीय अपराधों के मामले में उत्तर प्रदेश 18.6 फीसदी, राजस्थान 15.6, बिहार 14.3 फीसदी के साथ सभी राज्यों में शीर्ष पर रहे.

सकारात्मक रूप से, अनुसूचित जन-जातियों के प्रति अपराधों में भी कमी आई है. 2014 में 11,451 अपराधों की तुलना में वर्ष 2015 में 10,914 अपराध दर्ज किए गए यानी 4.7 फीसदी तक की कमी देखी गई.

First published: 1 September 2016, 7:55 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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