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CBI का आरोप : NDTV ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए टैक्स हेवन देशों में बनाई कंपनियां

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 August 2019, 18:09 IST

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एनडीटीवी के प्रमोटरों प्रणय रॉय, राधिका रॉय, पूर्व सीईओ विक्रमादित्य चंद्रा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के तहत एक नया मनी लॉन्डरिंग का मामला दर्ज किया है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सीबीआई ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया है कि 2004 से 2010 के बीच एनडीटीवी ने हॉलैंड, यूके, दुबई, मलेशिया, मॉरीशस जैसे टैक्स हैवेन में लगभग 32 सहायक फर्मों को स्थापित किया.

सीबीआई के अनुसार इन फर्मों के पास कोई व्यापार लेनदेन नहीं था और ये केवल विदेश से गलत तरीके से फंड लाने के लिए बने गई थी. सीबीआई के अनुसार एनडीटीवी नेटवर्क पीएलसी (एनएनपीएलसी), लंदन को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईबीपी) से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीएल) को एफडीआई मानदंडों के उल्लंघन में कथित तौर पर 130-160 मिलियन डॉलर की कीमत पर लाने की मंजूरी मिली.

 

सीबीआई की प्राथमिकी में कहा गया है कि सितंबर 2009 तक, एनएनपीएलसी लंदन को 163.43 मिलियन डॉलर की कुल एफडीआई प्राप्त हुई. क्विंट के अनुसार विक्रम चंद्रा के दिल्ली स्थित घर पर सीबीआई ने सर्च की.

एनडीटीवी ने अपने बयां में कहा ''एक के बाद एक कई मामलों के बावजूद, जिसमें जांच जान-बूझकर अटकाई गई, एजेंसियों को NDTV द्वारा किसी भ्रष्टाचार के कोई सबूत नहीं मिले हैं. NDTV के संस्थापकों, राधिका रॉय और प्रणय रॉय ने और साथ ही कंपनी ने अपने खिलाफ़ दर्ज सभी मामलों में पूरा सहयोग किया. आज़ाद प्रेस के निरंतर उत्पीड़न के सिलसिले के तौर पर, अब NDTV के गैर-समाचार कारोबार में NBCU द्वारा 150 मिलियन डॉलर के निवेश का एक नया CBI केस दर्ज किया गया है''.

एनडीटीवी ने कहा ''NBCU एक विशाल अमेरिकी समूह है, जिसकी कमान तब जनरल इलेक्ट्रिक के हाथ में थी. इस केस में यह हास्यास्पद आरोप लगाया गया है कि अमेरिका और भारत में सभी प्रासंगिक अधिकारियों के लिए घोषित लेनदेन के ज़रिये अज्ञात सरकारी लोगों के लिए मनी लॉन्डरिंग की गई''.

आगे कहा गया है '' इस अहम समय में, NDTV और उसके संस्थापकों की भारतीय न्यायपालिका में पूरी आस्था है और वे कंपनी की पत्रकारिता की ईमानदारी को लेकर प्रतिबद्ध हैं. बदनीयत और फ़र्ज़ी आरोपों के ज़रिये आज़ाद और निष्पक्ष ख़बरों को रोकने की कोशिश कामयाब नहीं होगी. यह एक कंपनी या व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि प्रेस की आज़ादी को बनाए रखने की कहीं ज़्यादा व्यापक लड़ाई है - जिसके लिए भारत हमेशा से जाना जाता रहा है''.

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First published: 21 August 2019, 18:06 IST
 
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