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360 लोगों की जिंदगी बचाने वाली नीरजा को पाकिस्तान ने भी किया था सलाम

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 September 2017, 11:34 IST

नीरजा भनोट का नाम सुनते ही शरीर में एक सिरहन-सी पैदा हो जाती है. आंखें नम और सिर गर्व से झुक जाता है कि इतनी छोटी-सी उम्र कोई इतना बहादुर हो सकता है कि अपनी जान की परवाह किए बिना 360 लोगों की जिंदगी बचा जाए.

7 सितंबर 1963 को चंडीगढ़ के एक पंजाबी परिवार में जन्मी नीरजा ने आज से 31 साल पहले यानी 5 सितंबर, 1986 को अपनी जिंदगी गंवा हाईजैक हो चुके प्लेन में मौजूद लोगों की जान बचाई थी. नीरजा की कराची में आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. वे पैन अमेरिकन वर्ल्ड एयरवेज की कर्मचारी थीं. मुंबई से न्यूयॉर्क जा रहे पैन एम फ्लाइट 73 को कराची में चार आतंकियों ने हाईजैक कर लिया तब वे प्लेन में सीनियर एयर होस्टेस थीं. उन्होंने प्लेन में सवार 360 पैसेंजर्स की जान बचाई थी.

आतंकी प्लेन को इजराइल में किसी निर्धारित जगह पर क्रैश कराना चाहते थे लेकिन नीरजा ने उनका प्लान फेल कर दिया. इस घटना से बचकर निकले यात्री माइकल थेक्सटन ने एक बुक लिखी थी. इस बुक में माइकल ने दावा किया कि उन्होंने हाईजैकर्स को बात करते हुए सुना था कि वे जहाज को 9/11 की तरह इजराइल में किसी निर्धारित निशाने पर क्रैश कराना चाहते थे.

हाईजैक के दौरान आतंकियों ने नीरजा और उसकी सहयोगियों को बुलाया और कहा कि वो सभी यात्रियों के पासपोर्ट इक्ट्ठा करें ताकि वो किसी अमेरिकन नागरिक को मारकर पाकिस्तान पर दबाव बना सकें. नीरजा ने सभी यात्रियों के पासपोर्ट इकट्ठे किए लेकिन विमान में बैठे 5 अमेरिकी यात्रियों के पासपोर्ट छुपाकर बाकी सभी आतंकियों को सौंप दिए. आतंकियों ने एक ब्रिटिश को विमान के गेट पर लाकर पाकिस्तानी सरकार को धमकी दी कि यदि पायलट नहीं भेजा तो वह उसको मार देंगे. लेकिन नीरजा ने उस आतंकी से बात करके ब्रिटिश नागरिक को भी बचा लिया.

जब 4 हथियारबंद लोगों ने प्लेन को हाईजैक किया तब फ्लाइट में 360 यात्री और 19 क्रू मेंबर्स थे. प्लेन हाईजैक के बाद चालक दल के तीनों सदस्य यानी पायलट, को-पायलट और फ्लाइट इंजीनियर कॉकपिट छोड़कर भाग गए थे. प्लेन का फ्यूल समाप्त हो गया और अंधेरा छा गया. नीरजा इसी वक्त का इंतजार कर रही थी. अंधेरे में उसने तुरंत प्लेन के सारे इमरजेंसी गेट खोल दिए. यात्री उन गेट्स से बाहर कूदने लगे. यात्रियों को अंधेरे में प्लेन से कूदकर भागता देख आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी. इसमें कुछ यात्री घायल जरूर हुए लेकिन इनमें से 360 पूरी तरह से सुरक्षित थे. सभी यात्रियों को बाहर निकाल नीरजा जैसे ही प्लान से बाहर जाने लगी तभी उन्हें बच्चों के रोनी आवाज सुनाई दी.

दूसरी ओर, पाकिस्तानी सेना के कमांडो भी प्लेन में आ चुके थे. उन्होंने तीन आतंकियों को मार गिराया था. नीरजा ने बच्चों को खोज निकाला और जैसे ही वे प्लेन के इमरजेंसी गेट की ओर बढ़ने लगी. तभी चौथा आतंकी सामने आ गया. नीरजा ने बच्चों को नीचे धकेल दिया और उस आतंकी से भिड़ गई. आतंकी ने नीरजा के सीने में कई गोलियां उतार दीं. नीरजा के इस बलिदान पर भारत ही नहीं पूरा पाकिस्तान भी रोया था. भारत सरकार ने इस काम के लिए नीरजा को बहादुरी के लिए सर्वोच्च वीरता पुरस्कार 'अशोक चक्र' से सम्मानित किया.

नीरजा यह पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की महिला रहीं. इतना ही नहीं, नीरजा को पाकिस्तान सरकार की तरफ से 'तमगा-ए-इंसानियत' और अमेरिकी सरकार की तरफ से 'जस्टिस फॉर क्राइम अवॉर्ड' से नवाजा.

First published: 5 September 2017, 11:34 IST
 
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