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नेहरू और सोनिया की आलोचना पर नपे सुधीर जोशी

आशीष कुमार पाण्डेय | Updated on: 29 December 2015, 8:24 IST

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मुंबई कांग्रेस के मुखपत्र 'कांग्रेस संदेश' के कंटेंट एडिटर सुधीर जोशी को पद से हटा दिया गया है.  अख़बार में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेसी की मौजूदा अध्यक्षा सोनिया गांधी पर आलोचनात्मक लेख छपने के बाद ये कार्रवाई हुई है. अख़बार ने सरदार वल्लभभाई पटेल की तारीफ़ भी की थी.

'कांग्रेस दर्शन' में कश्मीर के मुद्दे पर नेहरू को कठघरे में खड़ा किया गया है.  लेख के अनुसार कश्मीर के मसले पर यदि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तत्कालीन गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के सुझावों को दरकिनार नहीं करते या उनकी सलाह पर अमल करते तो कश्मीर, चीन, तिब्बत और नेपाल का विवाद इतना भयावह नहीं होता.

'कांग्रेस दर्शन' के संपादक पार्टी के नेता संजय निरुपम हैं. अपनी गलती को स्वीकार करते हुए उन्होंने दोषियों को दंडित करने की बात कही थी.

'कांग्रेस दर्शन' अख़बार में सोनिया गांधी के पिता को मुसोलिनी की सेना में सिपाही और फासिस्ट बताया गया

अखबार के हालिया संस्करण में सोनिया गांधी पर भी सवाल खड़े किए गए हैं. लेख के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के पिता मुसोलिनी की सेना में सिपाही थे और वे फासिस्ट थे. कांग्रेस का मुखपत्र यह भी लिखता है कि सोनिया पार्टी की प्राथमिक सदस्य बनने के महज 62 दिनों के भीतर ही अध्यक्षा भी बन गईं थीं.

लेख में सोनिया की भारतीय नागरिकता का जिक्र भी नकारात्मक संदर्भ में आया है. उसके मुताबिक राजीव गांधी से शादी के 16 साल बाद सोनिया गांधी ने भारत की नागरिकता ग्रहण की.

यह संस्करण 'सोनिया गांधी कार्य गौरव विशेषांक' के नाम से प्रकाशित किया गया है. इसमें सोनिया से संबंधित दो लेख छपे हैं. इन लेखों में सोनिया गांधी से जुड़े ऐसे तथ्यों का जिक्र किया गया है जिसे पार्टी नेतृत्व शायद ही बर्दाश्त करे.

'कांग्रेस दर्शन' में सरदार पटेल की तारीफ़ में छपे लेख में नेहरू और महात्मा गांधी की आलोचना की गयी है

'सचमुच वे सरदार थे' शीर्षक से छपे लेख में देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल का महिमामंडन वाला एक लेख प्रकाशित हुआ है. इस लेख में महात्मा गांधी और पंडित नेहरू की आलोचना की गई है. लेख कहता है, "ज्यादातर कांग्रेस समितियों का समर्थन होने के बावजूद केवल गांधीजी की इच्छा के चलते सरदार पटेल को प्रधानमंत्री की दौड़ से दूर रखा गया."

यह ऐसी लाइन है जो लंबे समय से संघ के एजेंडे का हिस्सा रही है. लेख में आगे लिखा गया है, 'पटेल को कई बार गांधीजी के कहने पर कांग्रेस अध्यक्ष पद की दावेदारी से दूर होना पड़ा. अगर पटेल को नेहरु ने सुना होता तो कश्मीर समस्या का जन्म ही नहीं होता.

जब सन् 1947 में जब ब्रिटिश हुकुमत ने अपनी सत्ता का हस्तांतरण भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे के रूप में किया था तब आजाद भारत की 556 रियासतों ने भारत में विलय को स्वीकार कर लिया लेकिन 3 रियासतों जिनमें जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू-कश्मीर ने भारत में विलय मे इनकार कर दिया था. लेकिन तत्कालीन गृह मंत्री पटेल की कुशलता से जूनागढ़ और हैदराबाद के मसले को सुलझा लिया गया.

ख़बरों के अनुसार वल्लभभाई पटेल नहीं चाहते थे कि जवाहरलाल नेहरू कश्मीर को मसले को संयुक्त राष्ट्र लेकर जाएं

हालांकि कश्मीर के तत्कालीन महाराज हरि सिंह ने इंस्टूमेंन्ट अॉफ एक्सेशन यानी भारत के साथ विलयपत्र पर हस्ताक्षर करने में आनाकानी की. इसका फायदा उठाते हुए पाकिस्तान ने कबायलियों के जरिए कश्मीर पर आक्रमण कर दिया. इस हमले से घबरा कर महाराजा हरि सिंह ने भारत में शामिल होने की हामी भर दी. बदले में भारत ने कश्मीर में सेना भेजकर पाकिस्तानी हमले को नाकाम किया.

लेकिन विवाद ने तब बड़ा रुप ले लिया जब नेहरू इस मामले को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में लेकर  चले गये और आज भी यह विवाद बना हुआ है. तत्कालीन दस्तावेजों और लोगों की कही-सुनी पर भरोसा करें तो उस समय पटेल नहीं चाहते थे कि नेहरू इस मसले को यूएन में ले जायें.

यह बात एक हद तक सही है कि इस मसले पर नेहरू और पटेल के बीच वैचारिक असहमती थी. यह तो रहा वह संक्षिप्त इतिहास जिसका जिक्र आज मुंबई कांग्रेस के मुख्यपत्र कांग्रेस दर्शन में परोक्ष रूप से किया गया है. इसके अलावा इशारों-इशारों में इस लेख में गांधी, नेहरू और पटेल के बीच के सत्ता के समीकरण को भी लिख दिया गया है.

इस लेख के प्रकाशन से घबराये हुए कांग्रेस नेता संजय निरुपम अब लेख से अपना पल्ला झाड़ रहे हैं. निरुपम ने इसे संपादकीय टीम की भूल बताते हुए संबंधित लोगों पर कार्रवाई की बात की है.
 
दिलचस्प है कि बीते कुछ समय से आरएसएस और भाजपा दोनों ही पटेल को राष्ट्रवादी और वैचारिक रूप से समान मानते हुए स्वयं को पटेल का उत्तराधिकारी घोषित करने में लगे हुए हैं.

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First published: 29 December 2015, 8:24 IST
 
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