Home » इंडिया » NET not required for students whom MPhil-Phd registered before 2009
 

पीएचडी-एमफिल छात्रों के लिए नेट पास करना जरूरी नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 April 2016, 20:26 IST

शिक्षा में शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एक नया फैसला किया है. इसके मुताबिक 11 जुलाई 2009 से पहले पीएचडी या एमफिल के लिए पंजीकृत छात्र-छात्राएं को नेट पास करना जरूरी नहीं है.

यूजीसी के नए फैसले के मुताबिक ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने एमफिल या पीएचडी पाठ्यक्रम के लिए पंजीकरण 11 जुलाई 2009 से पहले करा लिया था और वे सहायक प्रोफेसर पद की पात्रता की अन्य आवश्यक शर्तों पर खरे उतरते हैं तो फिर उन्हें इस पद के लिए नेट परीक्षा पास करना जरूरी नहीं है.

बताया जाता है कि यूजीसी का यह फैसला हजारों पीएचडीधारकों के लिए फायदा पहुंचाने वाला साबित होगा. गौरतलब है कि यूजीसी के दिशानिर्देशों के मुताबिक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर आवेदन करने के लिए अनिवार्य योग्यता नेट (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) पास और पीएचडी होना जरूरी है.

पढ़ेंः निजी कॉलेजों को मिल सकता है आईआईटी की फीस बढ़ने का फायदा

इस बाबत केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि यूजीसी के इस फैसले से विभिन्न पदों के लिए शिक्षकों की नियुक्तियों में सहायता मिलेगी.

Smriti Irani lead

महिलाओं की बढ़ेगी हिस्सेदारी

मंगलवार को स्मृति ईरानी ने बताया कि महिला उम्मीदवारों और दिव्यांगों को एमफिल और पीएचडी करने के लिए एक या दो वर्षों का अतिरिक्त वक्त दिया जाएगा 

इसका मतलब कि अभी तक जिस एमफिल को दो वर्षों में पूरा करना होता था उसे महिलाएं-दिव्यांग तीन वर्षों में पूरा कर सकेंगे.

वहीं, पीएचडी के अधिकतम वक्त छह वर्षों का होता था जिसके लिए महिलाओं-दिव्यांगों को आठ वर्ष में पूरा करने का मौका मिलेगा.

पढ़ेंः लंबी उम्र चाहिए तो जापानियों की तरह खाइए

इतना ही नहीं पीएचडी के दौरान विवाह हो जाने की सूरत में महिला को दूसरे विश्वविद्यालय में शोध का मौका मिलेगा. पहले विवि से शोध के क्रेडिट को दूसरे में स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

इतना ही नहीं महिलाओं को एमफिल-पीएचडी के दौरान 240 दिनों का मातृत्व अवकाश या बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश मिलेगा.

यूजीसी के मुताबिक एमफिल और पीएचडी जैसे शोध पाठ्यक्रमों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब एक फीसदी है. इस कदम से महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ सकेगी.

First published: 13 April 2016, 20:26 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी