Home » इंडिया » Netaji files reveal: Bose did suffer burns in Taiwan plane crash
 

16 जनवरी को खुलेगा नेताजी की मौत का रहस्य

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST
QUICK PILL
  • पिछले साल 14 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार वालों से मुलाकात कर उनसे जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का फैसला किया था. मोदी के इस फैसले के बाद से नेताजी की गुमशुदगी को लेकर जारी रहस्य सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बिंदु बन चुका है.
  • लंदन में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार आशीष रॉय की वेबसाइट www.bosefiles.info के मुताबिक कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रेसिडेंट सुभाष चंद्र बोस जापानी एयरफोर्स के बमवर्षक विमान में सवार थे जो ताइपेई में क्रैश कर गया.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 119वीं जन्मतिथि में कुछ ही हफ्ते बचे हुए हैं. इस दिन के पहले उनकी मौत और गुमशुदगी को लेकर जारी रहस्य के खुलने की उम्मीद की जा रही है. 

9 जनवरी को लंदन के एक वरिष्ठ पत्रकार आशीष रॉय की तरफ से चलाई जाने वाली वेबसाइट पर फारमोसा द्वीप पर हुए विमान हादसे की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक कर दी है. फारमोसा द्वीप को फिलहाल ताइवान के नाम से जाना जाता है और यहीं पर 1945 में हुए विमान हादसे में कथित तौर पर नेताजी की मौत हो गई थी. 

सबूत बताते हैं कि बोस उस विमान में सवार थे और विमान के क्रैश होने की वजह से वह घायल हो गए. लेकिन क्या 18 अगस्त 1945 को उनकी मृत्यु हो गई? इस बारे में वेबसाइट अगले शनिवार यानी 16 जनवरी को जानकारी सार्वजनिक करेगा. इसके एक हफ्ते बाद ही नेताजी का जन्मदिन है.

एक वेबसाइट के खुलासे के मुताबिक  1945 में हुए विमान हादसे में नेताजी गंभीर रूप से घायल हो गए थे

पिछले साल 14 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार वालों से मुलाकात कर उनसे जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का फैसला किया था. मोदी के इस फैसले के बाद से नेताजी की गुमशुदगी को लेकर जारी रहस्य सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बिंदु बन चुका है.

रॉय की वेबसाइट के मुताबिक कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रेसिडेंट सुभाष चंद्र बोस जापानी एयरफोर्स के बमवर्षक विमान में सवार थे जो ताइपेई में क्रैश कर गया.

अभी तक क्या है जानकारी

जापानी के लड़ाकू विमान ने वियतनाम के तुरेन से उड़ान भरी थी और अन्य यात्रियों एवं चालक दल के 12 या 13 सदस्यों के अलावा इसमें नेताजी भी सवार थे. वेबसाइट के मुताबिक यह जानकारी 1956 में भारत सरकार की तरफ से गठित की गई जांच समिति के समक्ष दर्ज कराई गई गवाही के मुताबिक है. 

समिति की अध्यक्षता इंडियन नेशनल आर्मी के जनरल शाहनवाज खान ने की थी. इंडियन नेशनल आर्मी का गठन दूसरे विश्व युद्ध के दौरान किया गया था जिसमें कई भारतीय राष्ट्रवादी शामिल थे.

बोस के विमान के उड़ान भरने के बाद की विस्तृत जानकारी:

  • कैप्टन नकामुरा ताइपेई एयरपोर्ट पर ग्राउंड इंजीनियरिंग के प्रभारी थे.
  • मेजर तारो कोनो जो जापान के एयर स्टाफ ऑफिसर थे और विमान में सवार यात्रियों में से एक थे.
  • कर्नल हबीबुर्ररहमान बोस के निजी सचिव और सहयोगी यात्री थे.
  • लेफ्टिनेंट कर्नल शाइरो नोनोगाकी भी विमान में सवार थे.
  • इंजन में लगी आग

विमान के उड़ने के पहले मेजर कोनो ने इस बात की भनक लगी कि 'विमान में बाईं तरफ का इंजन ठीक से काम नहीं कर रहा है.' उन्होंने इंजीनियर की मदद से इंजन की जांच की और फिर उन्हें लगा कि इंजन ठीक से काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि इंजीनियर ने भी इस बात को प्रमाणित किया कि इंजन ठीक से काम कर रहा है.

कैप्टन नकामुरा ने मेजर कोनो के साथ इस बात पर सहमति जताई, 'बाईं तरफ के इंजन में खराबी थी.' लेकिन उन्हें यह आश्वासन दिया गया कि पायलट को इंजन को लेकर कोई आपत्ति नहीं है. पायलट ने बताया कि इंजन अभी बिलकुल नया है. 

नकामुरा ने बताया कि पायलट ने इंजन की दोबारा टेस्टिंग की और फिर उसे एडजस्ट करते हुए बताया कि इसे चलाया जा सकता है. हालांकि विमान के उड़ान भरने के तत्काल बाद ही कर्नल रहमान को तेज आवाज सुनाई दी जो कि विस्फोट की तरह था.

कैप्टन नकामुरा इस स्थिति को जमीन से देख रहे थे. उन्होंने कहा कि इस धमाके बाद विमान अपने रास्ते से 30-40 मीटर घिसक गया. इसके बाद उन्होंने कुछ गिरते हुए देखा. बाद में वह इस बात की पुष्टि कर सके कि गिरने वाला समान प्रोपेलर था.

विमान के उड़ान भरने के ठीक बाद कर्नल रहमान को धमाके की आवाज सुनाई दी जो कैनन शॉट की तरह था

नकामुरा ने पुष्टि करते हुए बताया कि 'विमान रनवे से करीब 100 मीटर बाद क्रैश कर गया और इसके साथ ही उसमें आग लग गई.'

बच गए बोस

कर्नल रहमान बताते हैं कि इसके बाद 'बोस ने उन्हें विमान के आगे से बाहर निकलने का आदेश दिया क्योंकि पीछे के सभी रास्ते बंद हो चुके थे.' बोस खुद आग से बाहर निकले क्योंकि कचड़े की वजह से सभी रास्ते बंद हो चुके थे. रहमान बताते हैं, 'वास्तव में वह आग से बाहन निकले. मैं भी उनके पीछे उसी रास्ते से बाहर आया.'

रहमान ने देखा कि बोस के कपड़ों में आग लगी हुई थी, जिसे बुझाना मुश्किल था. उन्होंने देखा कि बोस के माथे पर गहरे चोट का निशान था और उनका चेहरा आग की वजह से झुलस गया था. नेताजी ने उन्हें कहा कि शायद अब वह नहीं बचेंगे और अगर ऐसा होता है तो रहमान को इस बारे में देश को सूचित करना चाहिए कि उन्होंने जीवन के आखिरी सांस तक आजादी की लड़ाई लड़ी.

बोस के हवाले से रहमान ने बताया, 'जब अपने मुलक वापस जाएं तो मुल्की भाइयों को बताना कि मैं आखिरी दम तक मुल्क की आजादी के लिए लड़ता रहा हूं. वो जंगे-ए-आजादी को जारी रखें. हिंदुस्तान जरूर आजाद होगा. उसको कोई गुलाम नहीं रख सकता.'

लेफ्टिनेंट करर्नल नोनोगाकी बताते हैं उन्होंने बोस के कपड़ों को सुलगते हुए देखा और उनका सहायक उनका कोट उतारने की कोशिश कर रहा था. उनका अनुमान था कि बोस पेट्रोल टैंक के पास बैठे हुए थे और वह पूरी तरह से पेट्रोल से भीगे हुए थे.

नेताजी को गंभीर हालत में पास के नैनम सैन्य अस्पताल ले जाया गया.

अलग-अलग दावे

हालांकि सभी व्यक्तियों के दावे में एकरुपता नहीं है. लेकिन इसके पीछे की वजह को जानना जरूरी है. समिति के सामने सभी संबंधित व्यक्ति हादसे के 11 साल बाद बयान दर्ज करा रहे थे.

उनमें से हालांकि सब इस बात पर सहमत रहे कि विमान क्रैश हुआ था और बोस गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उन्हें गंभीर रून से चोटें लगी थीं.

विमान के क्रैशन के बाद सितंबर 1945 में ब्रिटिश अधिकारियों ने बोस के ठिकानों की तलाशी के लिए अधिकारियों को भेजा ताकि उन्हें गिरफ्तार किया जा सके. हालांकि उन्होंने यह बताया कि बोस की मौत हो चुकी है.

नेताजी की मौत को लेकर संदेह अभी भी बरकरार है. उम्मीद है कि यह संदेश एक हफ्ते से ज्यादा तक जारी नहीं रहेगा. जैसा कि वेबसाइट बताता है, 'अस्पताल में बोस को भर्ती किए जाने के बाद क्या हुआ इसकी जानकारी हम आपको 16 जनवरी को देंगे.'

 

First published: 12 January 2016, 5:04 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @catchnews

एशियन कॉलेज ऑफ़ जर्नलिज्म से पढ़ाई. पब्लिक पॉलिसी से जुड़ी कहानियां करते हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी