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नई गाइडलाइन से थमेगा किडनी का अवैध कारोबार

आशीष कुमार पाण्डेय | Updated on: 2 January 2016, 20:59 IST
QUICK PILL
  • भारत में किडनी प्रत्यारोपण के अवैध व्यापार को रोकने के लिए कई सालों से चली रही बहस पर विराम लगने की संभावना है.
  • केंद्रीय\r\n स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके लिए विशेष दिशा-निर्देश बनाये हैं. इस संबंध \r\nमें मंत्रालय ने जनता से एक पखवारे के भीतर राय देने के लिए कहा गया है.

भारत में किडनी प्रत्यारोपण के अवैध व्यापार को रोकने के लिए कई सालों से चली आ रही बहस पर अब विराम लगने की संभावना है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके लिए विशेष दिशा-निर्देश तैयार किया है. इस संबंध में मंत्रालय ने जनता से एक पखवारे के भीतर राय देने को कहा है. किडनी के प्रत्यारोपड़ को वैध-अवैध तरीकों को लेकर अतीत में कई बार सवाल उठ चुके हैं. इस पूरी बहस में सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को होती है, जो जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे होते हैं. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए अब स्वास्थ्य मंत्रालय इस नई गाइडलाइन के साथ सामने आया है.

नए दिशा-निर्देश में कई तरह के नए प्रावधान हैं, मसलन किसी मृत दानदाता से किडनी के प्रत्यारोपण को बढ़ावा दिया जाय. वर्तमान में देश में किडनी दान करने की कानूनी प्रक्रिया काफी उलझी हुई है और मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते इसमें हमेशा अवैध व्यापार की आशंका बनी रहती है.

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित नए दिशा-निर्देशों के कुछ मुख्य बिंदु:

1. मरीजों को अस्पताल के जरिए किडनी पाने के लिए आनलाईन पंजीकरण करवाना होगा.

2. किडनी एडवाइजरी कमेटी की अनुशंसा पर ही पंजीकरण हो सकेगा.

3. कमेटी की अनुशंसा और जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर मरीज को 'एक्टिव' और 'प्रायॉरिटी' नामक दो लिस्टों में से किसी एक में जगह दी जायेगी.

4. किडनी पाने वालों मरीजों को शहरों के हिसाब से वरीयता दी जायेगी.

5. यदि शहर में इस तरह के मरीज नहीं रहे तो फिर राज्यवार लिस्ट की समीक्षा की जायेगी.

6. सभी राज्यों में रिजनल आर्गन एण्ड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (आरओटीटीओ) से मिले मरीजों के आंकड़ों को राष्ट्रीय स्तर पर देखा जायेगा.

7. राष्ट्रीय स्तर पर मरीजों को चिन्हित करके किडनी प्रत्यारोपण में पारदर्शिता के साथ-साथ अवैध व्यापार को रोका जा सकता है.

केंद्र सरकार के इस दिशा-निर्देश से पूर्व तमिलनाडु राज्य ने अपने यहा पहले से ही इस तरह की कमेटी बना रखी है, जो अवैध प्रत्यारोपण पर विशेष निगरानी रखती है.

किडनी प्रत्यारोपण के बढ़ते मरीजों की संख्या के कारण कई तरह के अवैध व्यापार को बढ़ावा मिल रहा है और इन मामले में अक्सर अस्पतालों की संलिप्तता भी पायी गई है.

भारत में पैसे लेकर किडनी बेचना गैरकानूनी है, लेकिन देश बढ़ती गरीबी के कारण कुछ में व्याप्त व्यापक बेरोजगारी और गरीबी के चलते लोग अपनी किडनियां बेचने को मजबूर होते हैं. अक्सर लोगों जानकारी और शिक्षा के अभाव में दलालों और बिचौलियों के चंगुल में फंस जाते हैं. इससे किडनी का अवैध कारोबार फलफूल रहा है.

First published: 2 January 2016, 20:59 IST
 
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