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मलेर कोटला: सियासी मुनाफ़े के लिए क़ुरान अपमान कांड में आप विधायक को फंसाया गया

राजीव खन्ना | Updated on: 6 November 2016, 7:52 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • चार महीने पहले पंजाब के मुस्लिम बाहुल्य इलाके मलेरकोटला में कुरआन के अपमान का मामला सामने आया था. 
  • मगर इस मामले में अभी तक हुई तफ़्तीश बताती है कि राजनीति और ध्रुवीकरण के लिए राजनीतिक दल कितने निचने स्तर तक गिर गए हैं.
  • राजनीतिक हितों के लिए धर्म और पवित्र पुस्तकों तक का इस्तेमाल किया जा रहा है. 

इस केस के मुख्य आरोपी और दिल्ली के एक कारोबारी विजय कुमार का दावा है कि पंजाब पुलिस ने उनपर यह कहने के लिए दबाव डाला था कि वह इस विवाद में आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश यादव को फंसा दें. इसके बाद विजय कुमार ने कथिततौर पर संगरूर की अदालत में यह बयान दिया और बाद में मीडिया के सामने भी यही बात दोहराई.

कानूनी सलाह

इस खुलासे के बाद आप नेतृत्व ने पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को निशाने पर ले लिया है, जो गृह मंत्रालय देखते हैं. पुलिस विभाग गृह मंत्रालय के ही अधीन आता है. आप नेताओं ने नैतिक आधार पर सुखबीर का इस्तीफा मांगा है. साथ ही, उन्होंने मांग की कि महरौली से पार्टी विधायक यादव को कथित तौर पर फंसाने के आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. 

पंजाब में आप के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख हिम्मत सिंह शेरगिल ने कहा, 'हम विचार कर रहे हैं कि मामले को कानूनी तौर पर कैसे आगे ले जाया जाए. सत्ता में आने के बाद हम सुखबीर के खिलाफ तो कड़ी कार्रवाई करेंगे ही'. उन्होंने कहा, 'यह सीधे-सीधे सत्ता का दुरूपयोग है. सिर्फ कुमार के बयान के आधार पर आप विधायक को गिरफ्तार किया गया था. शेरगिल ने पूछा कि यादव के जेल में बिताए गए छह दिनों की जिम्मेदारी कौन लेगा?'

शेरगिल ने कैच से कहा, 'फिलहाल हम सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज मामले से जुड़े सभी गवाहों के सारे बयान हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. हमने यादव और कुमार के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत का भी रिकॉर्ड मांगा है, जिसे पुलिस इस मामले में अहम सबूत बता रही है. दोनों कुछ समय के लिए किसी कोचिंग संस्थान में एक साथ थे और उन्होंने फोन पर बात की थी. हम मामले में अगली सुनवाई वाले दिन यानी 1 दिसम्बर को अदालत के सामने ये सब चीजें पेश कर देंगे'.

क्या हुआ था मलेरकोटला में?

24 जून की रात संगरूर जिले के मलेरकोटला में जर्ग चौक क्षेत्र में कुरआन के फटे पन्ने सड़कों पर बिखरे मिले थे. इसके बाद वहां गुस्साई भीड़ ने हिंसा और आगजनी कर दी थी. बाद में, पुलिस ने कुमार, उसके साथी नंद किशोर और उसके बेटे गौरव को पठानकोट से गिरफ्तार किया था. उस वक्त कथिततौर पर कुमार ने पुलिस को कहा था कि यादव ने उसे कुरआन का अपमान करने के लिए 1 करोड़ रूपए का ऑफर दिया था लेकिन उन्हें यह पैसे अभी नहीं मिले.

गुरुवार को अदालत में हुई सुनवाई के बाद कुमार ने संवाददाताओं को कहा कि वह बेगुनाह हैं और उसके पास इस बात का सबूत भी है. साथ ही यह भी कहा कि पुलिस के दबाव में आकर उसने यादव का नाम लिया. पुलिस ने उसे हत्या या हत्या के आरोप में फंसाने की धमकी दी थी. यादव को 25 जुलाई को गिरफ्तार किया गया और छह दिन बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया.

पुलिस पर अकालियों का कंट्रोल

मगर यादव को क्यों निशाना बनाया गया? आप प्रदेश इकाई के संयोजक गुरप्रीत सिंह ने कहा, 'वे कोई ऐसा व्यक्ति ढूंढ रहे थे, जो लो प्रोफाइल हो, वह कोई भी हो सकता था'. यादव ने बाद में कैच से कहा, मैं पहले ही दिन से यह कह रहा हूं और यह साम्प्रदायिक उन्माद भड़काने के लिए रची गई राजनीतिक साजिश से बढ़ कर और कुछ नहीं है. मैं सुखबीर से इस्तीफे की मांग करता हूं. साथ ही जानना चाहता हूं कि उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ वे क्या कार्रवाई कर रहे हैं, जिन्होंने यह सब किया'.

गुरप्रीत ने कहा, 'कोई गारंटी नहीं है कि वे कुमार पर फिर से दबाव डाल सकते हैं. दरअसल पंजाब में एक तरह से अकालियों का खौफ है. अकाली नेता सीमावर्ती इलाकों में जाकर लोगों को धमकाते हैं कि उनके पास चित्ता (सिंथैटिक ड्रग) और सिरोपा (पगड़ी) दोनों हैं. यह गांव वालों को चुनना है कि उन्हें क्या चाहिए. मलेरकोटला से आप नेता अरशद अली ने कहा, 'यहां यह समझने की जरूरत है कि राज्य पुलिस पर पूरी तरह से अकालियों का नियंत्रण है. वे कहते हैं, 'पंजाब से बाहर भी यही हो रहा है. क्या यही अच्छे दिन हैं, जिनका वादा किया गया था?'

अधर में है पंजाब

धार्मिक हिंसा के बढ़ते मामलों को लेकर पंजाब के हालात खराब हैं. पवित्र धार्मिक किताबों के अपमान की यहां और भी घटनाएं हुई हैं लेकिन इन मामलों में बमुश्किल ही कोई गिरफ्तारी हुई है. कुछ ऐसी भी घटनाएं हुई हैं, जहां धार्मिक स्थलों के प्रमुखों को निशाना बनाया गया. कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक ओर सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी गठबंधन पर प्रदेश में एक तरह का नियंत्रित उग्रवाद फैलाने का आरोप लगया है तो दूसरी ओर अकाली दल प्रदेश की छोटी-मोटी घटनाओं का दोष पाकिस्तान के मत्थे मढ देता है. पर्यवेक्षकों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस तरह की घटनाएं बढ़ने की आशंका  है.

First published: 6 November 2016, 7:52 IST
 
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