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'द्रौपदी' नई भूमिका में, अभिनय से राजनीति में आईं रूपा गांगुली राज्यसभा में मनोनीत

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 6 October 2016, 7:20 IST

भारतीय जनता पार्टी ने अभिनय से राजनीति में आईं रूपा गांगुली को संसद के उच्‍च सदन, राज्‍यसभा के लिए नामित किया है. वर्तमान में वह बंगाल में भाजपा की महिला मोर्चा की अध्यक्ष हैं. राज्‍यसभा में 12 सीटें राष्‍ट्रपति द्वारा नामित की जाती हैं. इस कोटे के तहत चुने गए सदस्‍य साहित्‍य, विज्ञान, खेल, कला और समाजसेवा के क्षेत्रों से शामिल किए जाते हैं.

खबरों के अनुसार रूपा को पूर्व क्रिकेटर व राजनेता नवजोत सिंह सिद्धू की जगह पर सांसद बनाया गया है. सिद्धू ने कुछ महीने पहले भाजपा नेतृत्‍व से नाराज होकर राज्‍यसभा सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया था. उन्होंने अब भाजपा भी छोड़ दी है.

टीवी से संसद तक की यात्रा

रूपा गांगुली को बीआर चोपड़ा के टेलीविजन सीरियल महाभारत में द्रौपदी का किरदार निभाने के लिए जाना जाता है. अपने इसी किरदार के कारण मीडिया में वह छाई रहती हैं, पर उनके चयन की खबर मीडिया में उतनी शानदार जगह नहीं बना पाई. गांगुली ने पिछले साल ही भाजपा की सदस्‍यता ग्रहण की थी.

जो लोग बंगाल की राजनीति से वाकिफ हैं, उनका मानना है कि गांगुली राज्य में एक महत्वपूर्ण राजनेता के रूप में उभरी हैं. उनकी साख बढ़ी है और वे इस पद के लिए योग्य भी हैं. वह राज्य में महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों के दौरान सबसे आगे रहीं हैं और आगे रह कर अपनी जिम्मेदारियों को अंजाम दिया है. चाहे वह बलात्कार पाडि़तों का मदद का मामला हो अथवा तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा से लोगों को सुरक्षा देने का.

वास्तव में, रूपा गांगुली का राजनीतिक करियर ममता बनर्जी की तरह ही शुरू हुआ है (ममता के 2011 में विधान सभा चुनाव जीतने की राजनीतिक यात्रा के पहले वाला). विशेषकर 1980 और 90 के दशक वाला. ममता हमेशा राजनीतिक रूप से सताए गए लोगों के पक्ष में अपनी आवाज बुलन्द करती थीं और ऐसे लोगों के साथ खड़ी रहती थीं जो सीपीएम के अत्याचारों को झेलने को मजबूर थे.

अपने आन्दोलनों के जरिए ममता को व्यापक जन समर्थन मिला. सीपीएम के खिलाफ अपने प्रखर विरोध के चलते उनके साथ एक बार दक्षिण कोलकाता में हाजरा क्रासिंग पर सीपीएम समर्थकों द्वारा हाथपाई भी की गई थी. गांगुली को भी तृणमूल के कार्यकाल में दो बार इस तरह की हिंसक स्थिति का सामना करना पड़ा है. एक बार हाजरा के नजदीक और एक बार हाल में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनावों के दौरान.

बताते हैं कि कथित तौर तृणमूल समर्थकों ने उन पर हमला किया था. इस तरह की घटनाओं से विचलित हुए बिना वे चुनावी अभियान में जुटी रहीं.

दोनों के लिए फायदेमंद

रूपा को भाजपा द्वारा राज्यसभा में भेजना दोनों के लिए फायदेमंद स्थिति है. रूपा ने पहला विधानसभा चुनाव हावड़ा उत्‍तर सीट से चार महीने पहले लड़ा था. उनके सामने तृणमूल कांग्रेस से क्रिकेटर लक्ष्‍मी रतन शुक्‍ला और कांग्रेस के दिग्गज नेता संतोष पाठक थे. इस चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था. पर उन्होंने राजनीति से अवकाश नहीं लिया.

राज्यसभा की यह सीट उन्हें उनके दो-तीन साल तक राजनीतिक रूप से अतिसक्रिय रहने के फलस्वरूप मिली है. इसके पहले इस तरह की खबरें थीं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उनकी लिबरल लाइफस्टाइल के कारण उनसे दूरी रखे हुए है.

हालांकि रूपा को राज्यसभा में भेजना भाजपा के लिए भी फायदेमंद है. राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं है. यहां उसे रूपा के रूप में एक प्रखर वक्ता भी मिल गया है. इसके साथ ही इस निर्णय से पार्टी को राज्य में अपनी जड़ें जमाने में भी आसानी होगी. क्योंकि राज्य में भाजपा अपने जनाधार के लिए संघर्ष कर रही है और अपने विरोधियों के कारण राजनीतिक एकान्तवास को मजबूर है.

First published: 6 October 2016, 7:20 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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