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कर्नल पुरोहित का पत्र और एनआईए का 'यू-टर्न'

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 April 2016, 20:05 IST

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के डायरेक्टर जनरल शरद कुमार ने बुधवार को कहा कि समझौता एक्सप्रेस धमाके में लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित के शामिल होने का कोई सुबूत नहीं है.

कुमार ने कहा, "वो कभी अभियुक्त नहीं थे. मुझे हैरत है कि उनका नाम समझौता धमाके से क्यों जोड़ जा रहा है."

2007 में भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में हुए धमाके में कम से कम 68 लोग मारे गए थे. मरने वालों में ज्यादातर पाकिस्तानी थे. एनआईए के अनुसार इस धमाके के पीछे कट्टरवादी हिदू संगठनों का हाथ था. सेना के कार्यरत अधिकारी पुरोहित पर धमाके के लिए बारूद उपलब्ध कराने का आरोप लगा था.

एनआईए ने स्वामी असीमानंद समेत कई अन्य लोगों को मामले में अभियुक्त बनाया है. एनआईए के आरोपपत्र में कहा गया है कि ये धमाका हिंदू मंदिरों पर हुए जिहादी हमलों के बदला लेने के लिए किया गया था.

समझौता एक्सप्रेस धमाके में एनआईए ने असीमानंद को मुख्य अभियुक्त बनाया है

हाल ही में एनआईए प्रमुख समझौता धमाके में आरिफ क़ासमानी की भूमिका के बारे में जानकारी लेने अमेरिका गए थे. क़ासमानी को लश्कर-ए-तैयबा का फाइनेंसर माना जाता है. एनआईए प्रमुख के इस कदम से कई लोगों को हैरत हुई क्योंकि एनआईए के आरोपपत्र के अनुसार इस धमाके के पीछ कट्टर हिंदुत्वादी संगठन हैं.

कुछ लोग कहने लगे हैं कि उनका अमेरिका दौरा पूरा मामले की जांच की दिशा बदलने की कोशिश का हिस्सा है. संभव है कि अब पाकिस्तानी स्थित आतंकी संगठनों को केंद्र में रखते हुए आगे की जांच की जाए.

एनआईए के अफसर इस तरह की किसी भी संभावना को बेबुनियाद बताते हैं. उनके अनुसार ये यात्रा बहुत लंबे से लंबित पड़ी थी. अफसरों के अनुसार भारत ने 2011 में पहली बार क़ासमानी के बारे में जानकारी मांगी थी.

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एनआईए ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में मामले के मुख्य अभियुक्त असीमानंद की जमानत का विरोध किया था. एनआईए के अनुसार असीमानंद ने न केवल समझौता एक्सप्रेस धमाके बल्कि, मालेगांव, अजमेर और हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए धमाकों में शामिल होने की बात स्वीकार की है. असीमानंद ने कहा था कि पुरोहित इन धमाकों में शामिल थे.

एनआईए ने अब तक दायर अपने तीन आरोपपत्रों में समझौता एक्सप्रेस धमाके लिए कट्टरपंथी हिंदुत्ववादियों को जिम्मेदार बताया था. एनआईए ने अपने आरोपपत्र में धमाकों की साजिश और उसे अंजाम देने के तौर-तरीकों का विस्तृति ब्योरा दिया है. मामले की सुनवायी 2014 में शुरू हुई थी.

कर्नल पुरोहित ने रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि समझौता एक्सप्रेस धमाके में लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था

एनआईए प्रमुख ने पुरोहित को भले ही समझौता एक्सप्रेस धमाके में क्लीन चिट दे दी हो लेकिन मालेगांव धमाके (2008) में पुरोहित अभी भी अभियुक्त हैं. इस मामले की जांच भी एनआईए ही कर रहा है. मालेगांव धमाकों में सात लोग मारे गए थे.

नवंबर 2008 में हुए मुंबई हमले में मारे गए एटीएस अधिकारी हेमंत करकरे ने अदालत में कहा था कि पुरोहित ने 60 किलोग्राम आरडीएक्स विस्फोटक चुराया था जिसका इस्तेमाल समझौता एक्सप्रेस धमाके और मालेगांव धमाके में किया गया.

एनआईए ने मालेगांव धमाके में भी यू-टर्न ले लिया है. एनआईए ने कुछ दिनों पहले ही मालेगांव धमाके में बरी कर दिए गए नौ मुसलमान युवकों पर दोबारा मामला चलाना चाहता है.

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एनआईए की मंशा पर तब भी सवाल उठे जब स्पेशल प्रोसिक्यूटर रोहिणी सेलियन ने कहा कि उनपर हिंदु कट्टरपंथियों के मामले में नरमी बरतने के लिए कहा गया था.

दूसरी तरफ ने पुरोहित ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर को पत्र लिखकर अपनी नौकरी और सम्मान बहाल किए जाने की मांग की है. पुरोहित ने दावा किया है कि उन्होंने आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन के भीतर घुसपैठ कर ली थी. उन्होंने ये पत्र एनआईए प्रमुख के अमेरिका दौरे के ठीक बाद लिखा.

पुरोहित ने अपने पत्र में लिखा है, "सिमी और आईएसआई पर मेरी रिपोर्ट में इस बात का साफ जिक्र है कि समझौता धमाके में एलईटी का हाथ था."

पुरोहित ने दावा किया है कि सेना में उनके वरिष्ठ अधिकारियों को उनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी थी. उन्होंने दावा किया है कि जिन बैठकों में 'धमाके की साजिश करने' का आरोप लगाया जाता है उनके बारे में मैंने पहले से जानकारी दे रखी थी.

First published: 21 April 2016, 20:05 IST
 
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