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अखिलेश यादव कुछ भी चाहें, राहुल गांधी, मुलायम को प्रधानमंत्री नहीं बनने देंगे

आदित्य मेनन | Updated on: 11 February 2017, 6:43 IST

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस को समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करने का न्यौता दिया है. एचटी लीडरशिप समिट में बोलते हुए अखिलेश ने कहा, ''अगर मुलायम सिंह जी को प्रधानमंत्री और राहुल गांधी को उप प्रधानमंत्री बनाया जाए, तो मैं अभी गठबंधन के लिए हां कहता हूं.''

उस वक्त हॉल में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मौजूद थे. उन्होंने हल्की मुस्कान दी लेकिन कुछ कहा नहीं. वैसे भी इस तरह के ''गठबंधन'' की संभावना नहीं है.

यह दो मान्यताओं पर आधारित है: पहला नरेंद्र मोदी और बीजेपी 2019 के लोकसभा चुनाव में हार जाए. दूसरा बीजेपी के हारने के बावजूद कांग्रेस अपने किसी नेता को प्रधानमंत्री बनवाने की स्थिति में ना हो. फिलहाल दोनों स्थितियां ही अभी दूर की कौड़ी हैं.

अगर बीजेपी हारती है और कांग्रेस के सामने गैर-कांग्रेसी पीएम बनाने की नौबत आएगी, उस स्थिति में भी नेताजी शायद ही कांग्रेस की आखिरी पसंद हों. क्यों?

बिहार में विश्वासघात

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को जीत मिली है. नीतीश-लालू की जीत के बाद ही कुछ लोगों ने 2019 में मोदी की हार की अटकलें लगानी शुरू कर दी है. जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस के गठबंधन ने साबित करके दिखाया है कि संयुक्त विपक्ष बीजेपी को हरा सकती है.

बिहार में चुनाव से पहले मुलायम ने महागठबंधन की जीत के संभावनाओं में पलीता लगाने की कोशिश की. पहले उन्होंने महागठबंधन बनाने की पहल की और उसके बाद इससे निकल गए. चुनाव में उन्होंने महागठबंधन उम्मीदवारों के खिलाफ अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को खड़ा किया.

गठबंधन छोड़ने के कई कारण उन्होंने गिनाए जिनमें से एक गठबंधन में कांग्रेस की उपस्थिति भी शामिल है. लिहाजा अब सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि जेडीयू और आरजेडी भी पीएम के रूप में उनका समर्थन करने से पहले कई बार सोचेंगी.

वास्तव में महागठबंधन की सफलता के बाद तीसरे मोर्चे से नीतीश सर्वाधिक उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में सामने आए हैं

ऐसा लग रहा है कि बिहार में मिले सबक के बाद अखिलेश ने कांग्रेस को लुभाने की कोशिश की और उनकी पार्टी देश की सबसे पुरानी पार्टी के साथ संबंधों के फिर से सुधारना चाहती है.

समाजवादी पार्टी (सपा) की बुनियाद ही बीजेपी के विरोध पर टिकी हुई है लिहाजा वह किसी भी तरह से बिहार में बीजेपी के साथ नहीं दिखना चाहती है.

1998 को सोनिया नहीं भूलीं

बिहार में विश्वासघात अगर पर्याप्त नहीं है तो 1998 को याद करना होगा. अटल बिहारी की सरकार मात्र एक वोट के कारण गिर गई. सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनाने के लिए तैयार थी. कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मिलकर सरकार बनाने का दावा भी पेश किया लेकिन आखिरी समय में मुलायम ने कांग्रेस का साथ देने से मना कर दिया.

पिछले कुछ सालों में कांग्रेस और सपा के रिश्तों में सुधार हुआ है. 2008 में संसद में न्यूक्लियर डील पर वोटिंग होनी थी. कांग्रेस के लिए हालात मुश्किल थे और उस समय सपा ने साथ दिया

इसके बावजूद कई लोगों का मानना है कि सोनिया कभी 1998 में हुए वाकये को नहीं भूली है.

अधूरा सपना

अखिलेश के लिए बुरा लग रहा है. वह एक अच्छे बेटे की तरह पापा मुलायम के सालों से प्रधानमंत्री बनने के सपने को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं.

1996 में मुलायम यूनाइटेड फ्रंट की सरकार में प्रधानमंत्री बनने के सबसे बड़े दावेदार थे लेकिन वह अपने समधी लालू प्रसाद यादव को साधने में असफल रहे.

2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुमत से जीतने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति को ध्यान में रखते हुए अखिलेश को सीएम बनाया लेकिन लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी नाकाम हो गई. मुलायम और उनके परिवार के सदस्यों के अलावा उनकी पार्टी से कोई भी सांसद नहीं बन सका. अब राष्ट्रीय राजनीति दो ध्रुवों में बंट चुकी है. केंद्र की राजनीति में मुलायम कांग्रेस के समर्थन के बिना कुछ नहीं कर सकते.

जनता परिवार का प्रयोग करके मुलायम प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनने का सफल प्रयोग कर सकते थे. इस परिवार में मुलायम सबसे वरिष्ठ थे, अगर यह अस्तित्व में आया होता तो उन्हेें ही अध्यक्ष बनाया जाता. हालांकि जनता परिवार बनने से पहले टूट गया.

मुलायम इस स्थिति के लिए अपने अलावा किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते. सीएम अखिलेश का कार्यकाल अब 16 महीने बचा है. उन्हें सपा का भाग्य बदलने के लिए इन महीनों में अच्छी तरह काम करना होगा.

अखिलेश के इरादों के बावजूद यूपी में अच्छे प्रदर्शन के बिना मुलायम के प्रधानमंत्री पद का सपना पूरा नहीं हो सकता.

First published: 5 December 2015, 8:19 IST
 
आदित्य मेनन @adiytamenon22

एसोसिएट एडिटर, कैच न्यूज़. इंडिया टुडे ग्रुप के लिए पाँच सालों तक राजनीति और पब्लिक पॉलिसी कवर करते रहे.

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