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तीन तलाक़ के खिलाफ निदा खान को मिली जीत, पति पर चलेगा घरेलू हिंसा का मुकदमा

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 July 2018, 14:56 IST

तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह को चुनौती देने वाली निदा खान को बरेली कोर्ट से बड़ी जीत हासिल हुई है. आला हजरत खानदान की पूर्व बहू की दलील को कोर्ट ने मान्य करार दिया है. कोर्ट ने निदा के तीन तलाक़ को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि उसके पति पर घरेलू हिंसा का मुकदमा चलाया जाएगा.
गौरतलब है कि तीन तलाक़ और हलाला जैसी सामाजिक प्रथाओं पर भी कोई कानून नहीं बना है. हालांकि, सरकार इसी संसदीय सत्र में चाहती है कि इन मुद्दों पर कोई कानून लाया जा सके. इसी बीच बरेली कोर्ट से निदा को मिली ये जीत उसकी आगे की मुहिम के लिए एक अच्छा कदम साबित हो सकती है. गौरतलब है कि निदा सिर्फ अपने ही नहीं बल्कि अन्य तलाकशुदा औरतों के लिए भी संघर्ष कर रही हैं. ऐसे में बरेली कोर्ट के इस फैसले ने निदा को काफी ताक़त दी है.

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गौरतलब है कि निदा की शादी 16 जुलाई 2015 को आला हजरत खानदान के शीरान रजा खां से हुई थी. लेकिन लगभग सात महीने बाद ही पांच फरवरी 2016 को उसके पति ने उसे तीन बार 'तलाक़' बोल कर तलाक दे दिया. इसके बाद निदा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

बतौर निदा उसकी शादी के बाद उसे दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया जाता था. और दहेज़ की मांग पूरी न होने पर उसे घर से मार पीट कर निकाल दिया गया. और उसके पति ने तीन बार तलाक़ बोलकर उसे तलाक दे दिया था.

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बरेली के इमाम ने बन्द किया हुक्का पानी

कोर्ट की जंग तो निदा जीत गयी लेकिन बरेली के शहर इमाम ने निदा के खिलाफ फतवा जारी कर दिया है. इमाम का कहना है कि निदा अल्लाह के बनाए कानून का विरोध इमाम ने कहा है कि निदा का हुक्का पानी बंद कर दिया जाए. और अगर किसी ने निदा की मदद की तो उस मदद करने वाले मुसलमान को भी इस्लाम से खारिज कर दिया जाएगा.

मुफ़्ती आलम के अनुसार निदा अगर बीमार हुई तो उसे दवा भी नहीं दी जाएगी. यहां तक की निदा की मौत पर जनाजे के वक़्त पढ़ी जाने वाली नमाज पर भो रोक लगा दी गयी है. बात यही नहीं ख़त्म नहीं होती फतवे के अनुसार निदा के मरने के बाद उसे कब्रिस्तान में दफ़नाने की भी इजाजत नहीं है.

निदा ने कहा फतवा देने वाले चले जाएं पाकिस्तान

इतना सब होने के बाद निदा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत को लोकतान्त्रिक देश बताते हुए कहा कि फतवा जारी करने वाले पकिस्तान चले जाएं. निदा ने लोकतंत्र में अपना यकीन दिखाते हुए कहा कि इस लोकतान्त्रिक देश में दो कानून नहीं चलेंगे. इमाम के खिलाफ निदा ने कहा कि किसी की इतनी हैसियत नहीं है की किसी भी मुसलमान को इस्लाम से ख़ारिज किया जा सके. गौरतलब है कि बरेली कोर्ट का ये फैसला निदा के तीन तलाक़, बहुविवाह और हलाला जैसी प्रथाओं के खिलाफ लड़ाई को मजबूती देगा.

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First published: 18 July 2018, 14:56 IST
 
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