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निर्भया गैंगरेप: गुनहगारों की फांसी बरक़रार

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 May 2017, 9:42 IST

देश को हिला देने वाले दिल्ली के निर्भया गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने चार दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई है. सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने इस मामले में चारों मुजरिमों विनय, अक्षय, पवन और मुकेश को हाईकोर्ट से मिली सजा-ए-मौत को बहाल रखा है. 

निचली अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट से फांसी की सजा मिलने के बाद चारों दोषियों ने सुप्रीम में अर्जी दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च को सुनवाई के बाद इस केस में अपना फैसला सुरक्षित रखा था. 

'सदमे की सुनामी'

सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस भानुमती और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए इस दिल दहला देने वाली वारदात को 'सदमे की सुनामी' बताया.  सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनाए जाते वक्त कोर्ट रूम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.

सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि जिस जघन्य तरीके से वारदात को अंजाम दिया गया और मुजरिमों ने निर्भया को गंभीर जख्म दिए, इसकी वजह से हम मौत की सजा को बरकरार रख रहे हैं. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ये एक बर्बर और राक्षसी घटना थी. 

'दिल्ली पुलिस की जांच सही' 

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की जांच को सही ठहराते हुए कहा कि वैज्ञानिक जांच और डीएनए से भी दोषियों का आपराध साबित हो चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस घटना से समाज की सामूहिक चेतना हिली है. इस मामले में रियायत नहीं दी जा सकती. 

निर्भया की मां की आंखों में आए आंसू

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराध में कोई और कसौटी नहीं है, दोषियों ने जो अपराध किया है वो अलग दुनिया की कहानी जैसा है. अदालत ने कहा कि हिंसा और सेक्स के भूख की वजह से जुर्म हुआ.

अदालत ने ये भी माना कि सारे अभियुक्त बस में थे और सबूत मिटाने के भी प्रयास हुए. फैसला सुनाए जाते वक्त कोर्ट रूम में मौजूद निर्भया की मां आशा देवी की आंखों में आंसू आ गए. अदालत ने कहा कि पीड़िता का मृत्यु पूर्व बयान किसी भी संदेह से परे है.

निर्भया कांड अब तक

1. 16 दिसंबर, 2012 और रविवार का दिन. निर्भया शाम को साकेत स्थित सेलेक्ट सिटी वॉक मॉल में ‘लाइफ ऑफ पाई’ मूवी देखने के बाद 23 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट छात्र अपने दोस्त अवनिंद्र के साथ रात 9 बजे ऑटो से मुनिरका पहुंची थी. वहां स्टैंड के पास खड़े होकर दोनों बस का इंतजार कर रहे थे.

2. 9.15 बजे आईआईटी की तरफ से सफेद रंग की आई चार्टर्ड बस के परिचालक ने उन्हें बस में बैठने के लिए कहा था. उनके बस में सवार होते ही परिचालक ने दरवाजा बंद कर दिया था. बस में चालक समेत छह लोग सवार थे. कुछ दूर आगे जाने पर बस के परिचालक व उसके साथियों ने युवती से छेड़खानी शुरू कर दी थी.

3. विरोध करने पर उन्होंने युवती के दोस्त की रॉड से बुरी तरह पिटाई की थी. इसके बाद उन्होंने युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था. इस दौरान बस ने करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी. दोषियों ने महिपालपुर में होटल एरिया के सामने चलती बस से दोनों को निर्वस्त्र हालत में नीचे फेंक दिया था. उस दौरान वहां से गुजरने वाले एक कार सवार की नजर पड़ने पर उसने पुलिस को इसकी सूचना दी थी.

4. 10.22 बजे दिल्ली कैंट थाने को सूचना मिली कि महिपालपुर से दिल्ली कैंट की तरफ आने पर जीएमआर कंपनी के गेट नंबर एक के सामने एक लड़का और लड़की बेहोशी की हालत में पड़े हुए हैं. मौके पर पहुंची पुलिस दोनों को सफदरजंग अस्पताल लेकर गई. घटना के कुछ दिन बाद उसे सिंगापुर के अस्पताल भेजा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी.

 

5. पुलिस ने वारदात में शामिल बस चालक राम सिंह, परिचालक मुकेश कुमार व अक्षय कुमार उर्फ अक्षय ठाकुर, उनके साथियों पवन कुमार और विनय शर्मा को गिरफ्तार किया था. मामले में पुलिस ने एक नाबालिग को भी पकड़ा था. दिल्ली की साकेत कोर्ट ने नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजने का आदेश दिया था, जबकि बाकी सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी.

6. तिहाड़ जेल में 11 मार्च 2013 को राम सिंह ने खुदकशी कर ली थी. अन्य दोषियों ने फांसी की सजा को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां कोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सजा को चुनौती दी है. तीन साल बाल सुधार गृह में बिताकर नाबालिग रिहा हो गया था. पांच मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने फांसी की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया.

First published: 5 May 2017, 14:34 IST
 
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