Home » इंडिया » Nitin Gadkari on CJI's remark: As far as Legislative wing is concerned, people have a right to change Govt in case it fails
 

चीफ जस्टिस के बयान पर बोले गडकरी- जनता के पास बदलाव का अधिकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 June 2016, 15:57 IST
(फाइल फोटो)

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर के बयान पर केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की प्रतिक्रिया आई है. गडकरी ने कहा है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के फेल होने पर जनता के पास बदलाव का अधिकार है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि न्यायपालिका तभी दखल देती है, जब कार्यपालिका अपना संवैधानिक दायित्व निभाने में फेल हो जाती है.

गडकरी ने कहा, "जहां तक विधायिका का सवाल है, तो इसके फेल होने की सूरत में जनता के पास बदलाव का अधिकार है. जहां तक कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया का प्रश्न है, उनके अधिकार और कर्तव्य संविधान में साफ तौर पर निर्देशित हैं."

'बहस का मुद्दा दखल'

चीफ जस्टिस ने कहा था कि केंद्र सरकार को दोषारोपण करने की बजाए अपने काम पर ध्यान देना चाहिए. चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि अदालतें केवल अपने संवैधानिक कर्तव्य का पालन करती हैं.

कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच टकराव के तेज होते स्वरों के बीच चीफ जस्टिस ने कहा, "यदि सरकार के स्तर पर विफलता या उपेक्षा दिखाई देगी, तो न्यायपालिका निश्चित रूप से अपनी भूमिका निभाएगी."

पढ़ें: चीफ जस्टिस: कार्यपालिका के फेल होने पर न्यायपालिका का दखल

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, "हर क्षेत्र में विफलता की संभावना होती है, लेकिन किसी दूसरे संवैधानिक संस्थान को किस हद तक दखल की इजाजत होनी चाहिए, ये बहस का मुद्दा हो सकता है."

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, "चीफ जस्टिस के प्रति मेरे मन में काफी सम्मान है. मेरे ख्याल से उन्हें सभी संबंधित संस्थानों की एक बैठक बुलानी चाहिए, जिसमें इन सभी विषयों पर चर्चा हो सके."

गडकरी ने कहा, "संविधान में जो लिखा है, अगर उसके मुताबिक वो आगे बढ़ेंगे, तो ये देश के साथ ही हर किसी के हित में होगा."

जेटली के आरोप पर जवाब

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने न्यायपालिका पर कार्यपालिका के काम में दखल देने का आरोप लगाया था. कार्यपालिका और विधायिका के कार्यक्षेत्र में न्यायपालिका की कथित बढ़ती दखलंदाजी पर जेटली ने कहा था कि टैक्स और वित्तीय मामले अदालतों के हवाले नहीं किए जाने चाहिए.

पढ़ें:अरुण जेटली: न्यायपालिका की बढ़ती दखलंदाजी लोकतंत्र पर हमला

जेटली के आरोप के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "हम केवल संविधान द्वारा तय किए गए दायित्वों का पालन कर रहे हैं. लोग शिकायत लेकर तभी अदालतों में आते हैं जब कार्यपालिका की ओर से उनका अनादर होता है या उपेक्षा की जाती है."

सरकार-न्यायपालिका में तकरार!

मोदी सरकार के मंत्री इन दिनों न्यायपालिका के निर्देशों और फैसलों को लोकतंत्र के अतिक्रमण के तौर पर देख रहे हैं. हाल ही में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने तल्ख लहजे में कहा था कि जजों को इस्तीफा देकर चुनाव लड़ना चाहिए.

इसके अलावा वित्त मंत्री जेटली ने सुप्रीम कोर्ट के सूखे के लिए राहत कोष पर दिए फैसले पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा था कि इन फैसलों के जरिए लोकतंत्र की इमारत को धीरे-धीरे गिराया जा रहा है.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सूखे को लेकर उदासीन रवैया अपनाने पर राज्य सरकारों को कड़ी फटकार लगाई थी और केंद्र सरकार को सूखे से निपटने के लिए एसटीएफ बनाने का भी आदेश दिया था.

First published: 7 June 2016, 15:57 IST
 
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