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शराबबंदी पर नीतीश कुमार और अखिलेश सरकार में तकरार

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 May 2016, 14:07 IST

लगता है कि उत्तर प्रदेश की सियासत में बिहार के सीएम नीतीश कुमार की सक्रियता समाजवादी पार्टी को रास नहीं आ रही. लखनऊ में किसान मंच के कार्यक्रम में नीतीश ने यूपी में भी पूर्ण शराबबंदी की वकालत की.

अब नीतीश के बयान पर समाजवादी पार्टी ने निशाना साधा है. समाजवादी पार्टी का आरोप है कि यूपी के बारे में नकारात्मक टिप्पणी करके नीतीश सांप्रदायिक ताकतों को मजबूत कर रहे हैं.

नीतीश एक दिन के प्रवास पर लखनऊ में थे. नीतीश अब यूपी चुनाव से पहले शराबबंदी को बड़ा हथियार बनाने की तैयारी में हैं. शायद यही वजह है कि नीतीश ने अखिलेश सरकार से शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. 

दौरे पर सपा का निशाना


समाजवादी पार्टी का आरोप है कि नीतीश अब एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की श्रेणी में आ गए हैं, जो राज्य की जनता को गुमराह करने के लिए दौरा कर रहे हैं.

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि नीतीश शराब पर प्रतिबंध की बात करते हैं, लेकिन विकास के बारे में वो एक भी शब्द नहीं बोले. 

पूर्ण शराबबंदी की मांग

नीतीश ने किसान मंच के एक कार्यक्रम में कहा कि घबराइये नहीं अखिलेश जी, पूर्णतया शराबबंदी लागू कीजिए. नीतीश ने कहा कि जब बिहार में शराबबंदी लागू की गई थी, तो पीने वालों को तीन चार दिन काफी परेशानी हुई, लेकिन उसके बाद सब शांत हो गए.

पढ़ें: बिहार: देसी के बाद विदेशी शराब पर भी बैन

नीतीश कुमार ने बिहार में पूर्ण शराबबंदी के लिए अभियान का भी जिक्र किया. नीतीश ने कहा कि जैसा समर्थन उनके राज्य में मिला, वह उम्मीद करते हैं कि देश के अन्य राज्यों में भी इस मिशन को ऐसा ही समर्थन मिलेगा.

'5 किमी के दायरे में बंद हों दुकानें'

नीतीश ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अपील की है कि वह बिहार से सटे उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में सीमा से कम से कम पांच किलोमीटर की दूरी के भीतर शराब ना बिकने दें, क्योंकि बिहार में शराबबंदी के बाद लोग यहां आकर शराब पी रहे हैं. 

पढ़ें: बिहार: बैन के बाद यूपी पहुंच रहे हैं शराब के शौकीन

नीतीश ने कहा कि अब शराब पीने के बाद विवाद, झगड़ा और घरेलू हिंसा करने वाले पति घर जाकर खाना बनाने में पत्नी का हाथ बंटाते हैं. शराबबंदी में महिलाओं की बड़ी भूमिका है. स्कूली बच्चों ने एक करोड़ 19 लाख शपथपत्र जमा किए. 

खत का नहीं दिया जवाब


नीतीश ने इस दौरान कहा कि बिहार में उन्होंने देसी और विदेशी दोनों ही किस्म की शराब बंद कर दी है. इसके लिए पुराने 1915 के आबकारी कानून में बदलाव करके और सख्त किया गया.

नीतीश ने कहा कि हम एक ओर बिहार में शराब की दुकानें बंद कर रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में शराब की दुकानें सीमावर्ती जिलों में धड़ल्ले से चल रही हैं. इसीलिए सीमावर्ती जिलों में कम से कम पांच किलोमीटर की परिधि में कोई शराब दुकान नहीं होनी चाहिए. 

नीतीश ने बताया कि इस सिलसिले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को उन्होंने पत्र लिखा था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया. नीतीश ने कहा, "मुख्य सचिव (बिहार) ने भी उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र भेजा है, लेकिन अभी कोई फैसला नहीं हुआ है."

आजम की नीतीश को नसीहत


इससे पहले 12 मई को पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नीतीश कुमार ने जनता दल यूनाइटेड का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया था. नीतीश ने इस दौरान एक रैली को भी संबोधित किया था. 

पढ़ें: पीएम मोदी के गढ़ से नीतीश का 'शंखनाद', 'संघमुक्त' भारत का नारा

हालांकि नीतीश के उत्तर प्रदेश दौरे पर समाजवादी पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने निशाना साधा था. आजम ने मुस्लिम वोटों के बंटवारे को लेकर नीतीश को नसीहत भी दी थी.

आजम ने कहा कि चुनाव में नीतीश कुमार मुस्लिम वोटों को बांटने का काम न करें. ऐसा करने से विरोधियों को लाभ मिलेगा. अगर उन्हें अल्पसंख्यकों का भला करना है, तो साथ मिलकर काम करें.

आजम ने इस दौरान कहा था कि अगर नीतीश कुमार मुसलमानों के इतने शुभचिंतक हैं, तो समाजवादी पार्टी के समर्थन की घोषणा करें, जिससे विधानसभा चुनाव के बाद सपा की सरकार बनने में आसानी हो.

First published: 16 May 2016, 14:07 IST
 
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