Home » इंडिया » Nitish Kumar's Bihar Vikas Mission is a bold experiment: Will it work?
 

नीतीश ने की बिहार विकास मिशन की घोषणा

चारू कार्तिकेय | Updated on: 30 January 2016, 9:36 IST
QUICK PILL
  • नीतीश कुमार ने बिहार विकास मिशन की घोषणा करते हुए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को उसका डायरेक्टर नियुक्त कर दिया है. बिहार विकास मिशन सरकार की उन सभी महत्वाकांक्षी योजनाओं को लागू करेगी जिसे नीतीश कुमार ने चुनाव के दौरान पूरा करने का वादा किया था.
  • कुमार ने कहा कि मिशन का काम समाधान की दिशा में सरकारी मशीनरी को सलाह देने के साथ प्रक्रियागत खामियों को भी दूर करने की होगी.

कुछ लोग कह सकते हैं कि नरेंद्र मोदी को लोगों को उपकृत करना नहीं आता जैसा कि नीतीश कुमार करने में सफल रहे हैं. कुमार ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा देते हुए उन्हें बिहार विकास मिशन (बीवीएम) का डायरेक्टर बना दिया है. यह कहीं से भी साधारण नियुक्ति नहीं है.

सबसे पहला तरीका तो यह रहा कि नीतीश कुमार ने यह घोषणा 27 जनवरी को की जबकि उनके कैबिनेट ने इस बारे में दो दिन पहले ही फैसला कर लिया था. उन्होंने बिहार विकास मिशन की घोषणा के लिए ट्विटर का सहारा लिया. कुमार ने कहा कि बिहार विकास मिशन राज्य में विकास कार्यों को तेज करते हुए यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा कि सेवाओं को समयबद्ध तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाए.

रशांत किशोर को बिहार विकास मिशन का डायरेक्टर बनाना कहीं से भी साधारण नियुक्ति नहीं है

कुमार ने कहा कि मिशन का काम समाधान की दिशा में सरकारी मशीनरी को सलाह देना होगा. इसके अलावा वह प्रक्रियागत खामियों को भी दूर करने की दिशा में काम करेगा. बिहार विकास मिशन के सरकार के समानांतर होने की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि मिशन मौजूदा सरकारी ढांचे के मुताबिक ही काम करेगा.  हालांकि इसकी भूमिका सहयोगात्मक बॉडी की होगी. 

बाहर से प्रतिभावान लोगों को हायर किए जाने का संकेत देेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार विकास मिशन में युवा प्रोफेशनल्स और विशेषज्ञों को तरजीह दी जाएगी. कुमार ने 'कमिंग सून' का ट्वीट कर सबको इंतजार करते रहने के लिए मजबूर कर दिया है.

पूरे होंगे वादे

बिहार कैबिनेट सचिवालय ने 25 जनवरी को घोषणा करते हुए बताया था कि बिहार विकास मिशन का मकसद 'राज्य सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना और उसकी निगरानी करनी होगी.' इसमें वह सातों योजनाएं भी होंगी जिसका कुमार ने चुनाव के दौरान वादा किया था.

  • युवाओं को शैक्षणिक और कारोबारी सहयोग देना
  • सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 फीसदी आरक्षण
  • राज्य में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति
  • सभी परिवारों को पीने का पानी
  • बिहार में सड़क और नालियों के नेटवर्क को दुरुस्त करना
  • हर घर में टॉयलेट को बनाया जाना
  • राज्य में नए शैक्षणिक और प्रशिक्षण केंद्रों को बनाया जाना

इसके अलावा बिहार विकास मिशन कृषि, उद्योग प्रोत्साहन, मानव संसाधन, कौशल एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की निगरानी करेगी. बिहार विकास मिशन की कमान मिशन के डायरेक्टर के अलावा मुख्यमंत्री, सभी मंत्री, मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, पुलिस प्रमुख और सभी विभागों के प्रधान सचिवों की होगी.

कैबिनेट को-ऑर्डिनेशन के प्रिंसपल सेक्रेटरी ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि मिशन का पंजीकरण सोसाएटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत किया गया है. इस वजह से यह एक एनजीओ की तरह काम करेगी . इसे योजना आयोग की तरह देखना सही नहीं है.

खबरों के मुताबिक बिहार विकास मिशन निजी क्षेत्रों से करीब 1,200-1,500 विशेषज्ञों की नियुक्ति करेगा जो कि यूपीए के राष्ट्रीय सलाहकार परिषद से कहीं बड़ा होगा. ऐसा समझा जाता है कि किशोर इस संगठन में अपने लोगों की भर्ती करेंगे. यह संयोग ही है कि उनकी कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी लगातार लोगों की नियुक्ति कर रही है.

किशोर सक्रियता के साथ इस संगठन की निगरानी करेंगे और वह सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करेंगे. किशोर पहले ही कैबिनेट मिनिस्टर के दर्जे के साथ कुमार के सलाहकार रह चुके हैं.

गर्वनेंस का निजीकरण?

पटना कॉलेज के प्रोफेसर नवल किशोर चौधरी इस कदम को सरकार के काम काज को एनजीओ को सौंपा जाना बताया. उन्होंने कहा कि यह कदम अपने आप में गर्वनेंस की खराब हालत को जाहिर करता है और इसने सरकार की नौकरशाही पर सवाल उठाए हैं.

बिहार विकास मिशन को जनता के पैसों की बर्बादी बताते हुए चौधरी ने कहा, 'अगर सरकार को अपने कार्यक्रमों को लागू करने के लिए अलग से किसी निकाय की जरूरत है तो फिर सरकार की मशीनरी क्या करेगी?'

वहीं एशियाई डिवेलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट पटना के मेंबर सेके्रेटरी शैबाल गुप्ता ने बताया कि वह इस मिशन को सकारात्मक पहल के तौर पर देखते हैं. गुप्ता ने कहा कि उनका यह विचार हालांकि अभी तक सार्वजनिक हुई जानकारी पर ही आधारित है.

First published: 30 January 2016, 9:36 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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