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निजामुद्दीन मरकज मामला: अमित शाह को मस्जिद खाली करवाने रात के 2 बजे डोभाल को भेजना पड़ा

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 April 2020, 13:10 IST

निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मरकज से कोरोना वायरस (coronavirus) के 24 मरीजों की बरामदगी के बाद पुलिस ने यहां से कई लोगों को बाहर निकाला है. एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जब निजामुद्दीन मरकज़ के प्रमुख मौलाना साद ने बंगालीवाली मस्जिद को खाली करने के लिए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की दलील सुनने से इंकार कर दिया तो गृह मंत्री अमित शाह को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को भेजना पड़ा.

रिपोर्ट में कहा गया है कि गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार डोभाल मरकज़ में 28-29 मार्च की रात लगभग 2.00 बजे पहुंचे और मौलाना साद को कहा कि वहां मौजूद लोगों को कोरोना वायरस की जांच करवाने के लिए छोड़ दें. गृह मंत्री अमित शाह और एनएसए डोभाल इस मस्जिद की स्थिति के बारे में जानते थे क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों को तेलंगाना के करीमनगर में नौ कोरोना टेस्ट पॉजिटिव इंडोनेशियाई लोगों का पता चला था, जिन्होंने 18 मार्च को मरकज़ का दौरा किया था.


 

सुरक्षा एजेंसियों ने मरकज़ में संक्रमित लोगों के बारे में सभी राज्य पुलिस और सहायक कार्यालयों को अलर्ट भेजे थे. मरकज़ ने 27, 28 और 29 मार्च को 167 तब्लीगी कार्यकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती करने की अनुमति दी थी लेकिन डोभाल के हस्तक्षेप के बाद ही जमात नेतृत्व ने मस्जिद को खाली किया. डोभाल ने पिछले दशकों में मुस्लिम आंदोलनों के साथ काम करने का अनुभव रहा है. वह कई मुस्लिम उलेमाओं को जानते हैं.

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह उन सभी विदेशियों का पता लगाने की कोशिश रहे हैं जो भारत में मौजूद हैं. दिल्ली में निजामुद्दीन मरकज़ में 216 विदेशी नागरिक थे, जबकि देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 800 से अधिक लोग यहां आये थे. इनमें से ज्यादातर लोग इंडोनेशिया, मलेशिया और बांग्लादेश से थे. जनवरी के बाद से गृह मंत्रालय ने कहा है, लगभग 2,000 विदेशियों ने मरकज़ में भाग लिया है.

प्रारंभिक रिपोर्टों में कहा गया है कि लगभग सभी ने अपने वीजा की शर्तों का उल्लंघन कर ट्रैवल वीजा पर भारत में प्रवेश किया था. तब्लीगी जमात की स्थापना मौलाना साद के परदादा मौलाना इलियास कांधलवी ने की थी. तबलीगी, जिसमें मेवाती ग्रामीण आबादी के मुस्लिम धर्मान्तरित शामिल थे, 1527 में मुगल शासक बाबर के खिलाफ खानपुर के युद्ध में मेवाड़ के राणा सांगा के साथ मुगल शासक बाबर के खिलाफ लड़े थे.

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First published: 1 April 2020, 13:05 IST
 
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