Home » इंडिया » No ban for women in shabarimala temple
 

सबरीमाला मंदिर में नहीं रुकेगा महिलाओं का प्रवेश: सुप्रीम कोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 January 2016, 15:59 IST

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को वर्जित करने को गैरकानूनी करार दिया है. न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी रमण की खंडपीठ ने कहा कि मंदिर धर्म के आधार के अलावा और किसी आधार पर प्रवेश वर्जित नहीं कर सकता. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा कि सबरीमाला मंदिर सार्वजनिक है और हर व्यक्ति को इसमें जाने का अधिकार होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने केरल स्थित ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर में प्राचीन परंपरा के नाम पर जिन महिलाओं को मंदिर में प्रवेश वर्जित कर दिया था उसे रद्द कर दिया है. मंदिर प्रशासन ने उन महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित कर दिया था जो मासिक धर्म (पीरियड) की आयु वर्ग में प्रवेश कर चुकी हैं. कोर्ट ने वर्जित करने की व्यवस्था पर आज सवाल उठाया और कहा कि संविधान के तहत इस तरह के नियम गैरकानूनी हैं.

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ ने फैसले में कहा है कि जब तब किसी को संवैधानिक अधिकार प्राप्त न हो वह किसी को मंदिर में प्रवेश से रोक नहीं सकता. उच्चतम न्यायालय वकीलों के संगठन यंग लायर्स एसोसिएशन की जनहित पर सुनवाई कर रहा था. याचिका में सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं और लड़कियों के प्रवेश की अनुमति मांगी गई थी.

जब तब किसी को संवैधानिक अधिकार प्राप्त न हो वह किसी को मंदिर में प्रवेश से रोक नहीं सकता

सबरीमाला मंदिर की परंपरा के अनुसार लड़कियों को तरूण अवस्था में पहुंचने के बाद परिसर में प्रवेश की आज्ञा नहीं है. इस याचिका में आज सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल किया कि मंदिर में महिलायें प्रवेश क्यों नहीं कर सकतीं ? न्यायालय ने टिप्पणी की कि इस परंपरा को किसी मौजूदा भारतीय संवैधानिक व्यवस्था का समर्थन प्राप्त नहीं है.

न्यायालय ने सरकार से प्रश्न किया कि क्या यह सही है कि पिछले 1500 साल से महिलाओं को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली है ? पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सार्वजनिक मंदिर है और हर किसी को मंदिर में प्रवेश का अधिकार होना चाहिए. अधिक से अधिक वहां धार्मिक प्रतिबंध लग सकता है लेकिन सामान्य प्रतिबंध तो किसी भी सूरत में नहीं लागू हो सकता.

केरल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल ने कहा कि आमतौर पर रजोनिवृत्ति की अवस्था प्राप्त नहीं करने वाली महिलायें भी धार्मिक यात्रा कर सकती हैं. ये अवधि 41 दिन की होती है और इस दौरान महिलाएं शुद्धता नहीं बनाये रख सकती हैं.

First published: 12 January 2016, 15:59 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी