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2003 में वाजपेयी सरकार के खिलाफ कांग्रेस लाई थी अविश्वास प्रस्ताव, मायावती ने दिया था BJP का साथ

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 March 2018, 11:20 IST

एनडीए में भाजपा की सहयोगी रही तेलुगू देशम पार्टी अब वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रही है. आज लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा सकता है. टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा ना दिए जाने के विरोध में अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं.

मोदी सरकार के खिलाफ लाए जा रहे पहले अविश्वास प्रस्ताव को कई विपक्षी दलों का समर्थन मिल रहा है. कांग्रेस, एआईएडीएमके, टीएमसी, एनसीपी, सीपीएम और एआईएमआईएम जैसे दलों ने अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन देने का ऐलान किया है. हालांकि अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ सरकार मजबूत दिखाई दे रही है, क्योंकि भाजपा अकेले दम पर ही जरुरी बहुमत जुटा लेने की स्थिति में है. इससे लगता नहीं कि सरकार को कोई खतरा होगा.

 

इससे पहले भी भाजपा की एक और सरकार को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था. साल था 2003 और सरकार थी अटल बिहारी वाजपेयी की. तब कांग्रेस पार्टी वाजपेयी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाई थी. अगस्त 2003 में वाजपेयी सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर कांग्रेस प्रस्ताव लेकर आई थी. कांग्रेस का तर्क था कि उन्होंने रक्षा मंत्रालय में जॉर्ज फर्नांडिस को फिर से शामिल किया था. उस समय वाजपेयी के समर्थन में वोट ज्यादा थे.

उस समय विपक्ष की नेता और कांग्रेस अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी ने सदन में चर्चा शुरू की थी. उन्होंने हिंदी में अपना भाषण दिया और वाजपेयी सरकार को कई मोर्चों पर अस्थिर बताया था.

चर्चा में जॉर्ज फर्नांडिस, लालकृष्ण आडवाणी, प्रियदर्शन दासमुंशी, मणिशंकर अय्यर सहित दूसरे नेताओं ने हिस्सा लिया था. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जॉर्ज का पक्ष लेते हुए उन्हें भारत का तब तक का सबसे अच्छा रक्षा मंत्री करार दिया था. वाजपेयी ने अपने जवाब में सोनिया गांधी को ताना मारते हुए कहा था कि चुनावी पारी के लिए मैदान में आइए.

 

तब एनडीए ने बहुत ही आराम से विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान हुई वोटों की गिनती में हरा दिया. एनडीए को 312 वोट मिले जबकि विपक्ष 186 वोटों पर सिमट गया था. जे जयललिता की एआईडीएमके और फारुक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस ने खुद को इस वोटिंग से अलग रखा था. इसके अलावा आज भाजपा की धुर विरोधी बहुजन समाज पार्टी ने वाजपेयी सरकार के पक्ष में वोट दिया था.

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इसके बाद साल 2008 में सीपीएम पार्टी यूपीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाई थी. यह प्रस्ताव अमेरिका के साथ हुए परमाणु समझौते की वजह से लाया गया था. हालांकि कुछ वोटों के अंतर से यूपीए की सरकार गिरने से बच गई.

First published: 19 March 2018, 11:20 IST
 
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