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पंजाब: जमीनी बदलाव को व्याकुल कांग्रेस

राजीव खन्ना | Updated on: 8 June 2016, 23:18 IST
(गेटी)

पंजाब में होने वाले आगामी चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति में आमूल परिवर्तन किया है और आक्रामक रुख अपनाते हुए जनता से सीधा संपर्क साधना शुरू किया है. अबतक आम आदमी पार्टी (आप) चुनावों में इस रणनीति का पालन करती आई है.

देश की इस सबसे पुरानी पार्टी ने राज्य में सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल गठबंधन सरकार के खिलाफ बिल्कुल निचले स्तर से अभियान प्रारंभ करने की योजना तैयार की है.

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों का चुनाव कर लिया है जिनका सहारा लेकर वे आने वाले दिनों में चुने हुए क्षेत्र-विशेष में विरोध प्रदर्शन कर राज्य सरकार को घेरने का प्रयास करेंगे. इस बीच पार्टी कार्यकर्ताओं ने पहले से ही पंजाब के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क साधना भी शुरू कर दिया है.

पार्टी की कार्ययोजना

पार्टी की योजना क्षेत्र के गन्ना किसानों के भुगतान में हो रही देरी को आधार बनाते हुए 8 जून को गुरुदासपुर के दीनानगर जिले से धरने की एक श्रृंखला प्रारंभ करने की है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह के अनुसार, ‘राज्य सरकार को गन्ना किसानों का 200 करोड़ रुपए से अधिक चुकाना है और उसने अबतक ऐसा करने की दिशा में कोई प्रयास तक नहीं किया है.’

पार्टी ‘काॅफी विद अमरिंदर’’ और ‘‘पंजाब दा कैप्टन’’ के दूसरे दौर को भी जल्द ही शुरू करने वाली है

इस विरोध-प्रदर्शन के बाद उसका इरादा राज्य की बिगड़ती हुई कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर 13 जून को जालंधर में एक धरना देने की है.

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अमरिंदर ने करोड़ों रुपये के कथित भर्ती घोटाले में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के एक नजदीकी के शामिल होने के आरोप लगाते हुए 18 जून को खुद बादल के गांव में एक विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व करने का फैसला किया है.

करोड़ों के इस भर्ती घोटाले में बादल के नजदीकी सहयोगी दयाल सिंह कोलियनवाली के शामिल होने का जिक्र करते हुए अमरिंदर उनकी तुलना पंजाब लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष रवि सिंधु से करते हैं. सिंधु भर्ती घोटाले के चलते जेल गए और सजा भी पाई.

पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज काॅर्पोरेशन के अध्यक्ष कोलियनवाली ने अमरिंदर के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज करवाने की धमकी के साथ पलटवार किया है. आने वाले दिनों में इन दोनों के बीच शब्दों की लड़ाई और तेज होने की पूरी उम्मीद है.

अमरिंदर करीब प्रतिदिन ही प्रदेश की बिगड़ती हुई कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाकर बादल सरकार पर हमला बोलते आ रहे हैं. हाल ही में मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब पूरी तरह से अपराधियों की शरणस्थली बन चुका है.

इस बातचीत के दौरान उन्होंने विशेष रूप से नामधारी संप्रदाय के सतगुरु जगजीत सिंह की 88 वर्षीय पत्नी चांद कौर की कुछ महीनों पूर्व हुई हत्या के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि इतने दिन बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं.

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साथ ही उन्होंने कहा कि दो सप्ताह बीतने के बाद भी पुलिस अभी तक एक और सिख उपदेशक संत सणजीत सिंह ढिंढरावाले पर हुए हमले के मामले में भी कुछ करने में नाकाम रही है.

उन्होंने बादल के उस बयान की भी खुलकर निंदा की जिसमें उन्होंने पंजाब को देश का सबसे शांतिपूर्ण और सामंज्य से भरपूर राज्य कहते हुए कहा था कि, ‘‘छोटी-मोटी घटनाएं तो दुनिया के किसी भी कोने में किसी भी समय हो सकती हैं.’’ अमरिंदर ने कहा कि बादल सिलेक्टिव एमनीशिया की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और वर्तमान से आंखें मूंदकर सिर्फ गुजरे हुए समय को याद कर रहे हैं.

किशोर के दिमाग की उपज?

बादल ने कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों को राजनीतिक हथकंडा कहकर खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार पहले से ही उनके द्वारा उठाये गए मामलों की जांच करवा रही है. लेकिन चुनावों से काफी पहले ही कांग्रेस का जमीनी स्तर पर अपनी पहुंच बनाने का फैसला वास्तव में बेहद दिलचस्प है.

कांग्रेस राज्य की बिगड़ती हुई कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर 13 जून को जालंधर में एक रैली करेगी

एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं, ‘‘यह निश्चित रूप से पहले की रणनीतियों के बिल्कुल उलट है. यह पार्टी अपनी पांच सितारा संस्कृति के लिये जानी जाती है जहां सारा ध्यान चुनावों से कुछ समय पहले सिर्फ कुछ बड़ी रैलियों को आयोजित करने में रहता है. लेकिन बिल्कुल निचले स्तर तक जाना और ग्रामीण स्तर तक फैले हुए कार्यकर्ताओं को साथ लेकर सरकार के खिलाफ धरने-प्रदर्शन आयोजित करना जैसी नई पहल चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के दिमाग की उपज लगती हैं.

मिल रही सूचनाओं के अनुसार पार्टी सभी 117 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को लक्षित करते हुए 200 दिन की कार्ययोजना तैयार कर रही है. पार्टी का इरादा राज्य को छः क्षेत्रों में विभाजित कर प्रत्येक क्षेत्र का प्रभार अमरिंदर सिंह के एक-एक विरोधी को सौंपने का है.

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ऐसी भी खबरें हैं कि पार्टी विशिष्ट मुद्दों पर मतदाताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिये तमाम निर्वाचन क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय प्रोफाइल तैयार करवा रही है.

जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने ग्रामीण स्तर पर मतदाताओं से संपर्क साधाना प्रारंभ कर दिया है. संगरूर के एक कांग्रेस कार्यकर्ता बताते हैं, ‘‘हमारी रणनीति हर मतदाता तक पहुंचने की है. हम अपने कामों के लिये गांवों का रुख करते हैं लेकिन इसके साथ ही साथ उन्हें अपने साथ जोड़ते भी हैं. हमें मूल रूप से दिल्ली विधासभा चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा अपनाई गई रणनीति का पालन करने को कहा गया है.’’

वे आगे कहते हैं, ‘‘अमरिंदर पूरा प्रयास कर रहे हैं कि वे पिछली बार की गई गलतियों को न दोहराएं. वे अपने विरोधियों को भी साथ ले रहे हैं, उन्हें जिम्मेदारियां सौंप रहे हैं और पिछली बार की तरह उनकी चिंताओं की अनदेखी नहीं कर रहे हैं जब उम्मीदवार काफी कम अंतर से हार गए थे.’’

इस बार कांग्रेस पार्टी चुनावों से काफी पहले ही अपने उम्मीदवार भी घोषित कर देगी

पार्टी कार्यकर्ताओं को इस बात का पता है कि उनके सामने आप के रूप में एक नई चुनावी चुनौती होने के अलावा सत्ता विरोधी लहर के बावजूद अकाली भी काफी कठिन चुनौती की तरह खड़े हैं.

इसके अलावा उनका कहना है कि इस बार पार्टी चुनावों से काफी पहले ही अपने उम्मीदवार भी घोषित कर देगी. पटियाला के एक पार्टी कार्यकर्ता कहते हैं, ‘‘हमें पता है कि आप के पास काफी अच्छे कार्यकर्ता हैं लेकिन जब नेताओं को जनता के सामने प्रस्तुत करने की बात आती है तो वे पीछे रह जाते हैं. यहां तक कि उनके पास राज्य स्तर पर कोई चेहरा भी नहीं है. इसी वजह से पार्टी अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने से बच रही है. यही हमारी ताकत है और पार्टी इसका पूरा फायदा उठायेगी.’’

कांग्रेस की राह चलते अकाली

इस बीच पार्टी जल्द ही मतदाताओं को सीधे तौर पर अपने साथ जोड़ने के इरादे से ‘‘काॅफी विद अमरिंदर’’ और ‘‘पंजाब दा कैप्टन’’ के दूसरे दौर को भी जल्द ही शुरू करने वाली है.

ऐसा लगता है कि अकाली भी कांग्रेस की चुनावी रणनीति से प्रभावित हुए हैं और उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई में शुरू हुआ ‘‘इक शाम सरकार दे नाल’’ इस ओर सीधा इशारा करता है. शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी सरकार द्वारा लोगों के कल्याण के लिये उठाये गए कदमों के बारे में मतदाताओं को सूचित करने के उद्देश्य के साथ यह कार्यक्रम 10 जून से प्रारंभ होने वाला है.

सुखबीर ने पार्टी के नेताओं को जल्द से जल्द चुनावों के लिये कमर कसने को कहते हुए ग्रामीण और सर्कल स्तर की समितियों को साथ लेकर जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिये हैं. दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी अपने पंजाब डायलाॅग कार्यक्रम के माध्यम से कदम आगे बढ़ा रही है.

First published: 8 June 2016, 23:18 IST
 
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