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बिहार के 12 विधानपरिषद सदस्यों को पटना हाईकोर्ट का नोटिस

चारू कार्तिकेय | Updated on: 5 February 2016, 22:42 IST
QUICK PILL
  • पटना कोर्ट ने विधान परिषद में मनोनीत किए गए सभी 12 सदस्यों को नोटिस जारी उन्हें उनकी पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देने को कहा है. अदालत ने उनसे पूछा है कि क्यों न उनकी सदस्यता खारिज कर दी जाए.
  • एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह फैसला दिया. एनजीओ का कहना है कि विधान परिषद के सस्दयों की नियुक्ति के दौरान संवैधानिक प्रावधानों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है.

यह बात हर कोई जानता है कि राजनीतिक दल 'नॉमिनेटेड'  कैटेगरी का इस्तेमाल अपनी मर्जी से करते रहे हैं. स्थापित संवैधानिक प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए राजनीतिक दल नॉमिनेटेड कैटेगरी की मदद से उन नेताओं को फायदा पहुंचाने की कोशिश करते हैं जो विधानसभा में अपनी पहुंच नहीं बना पाते हैं. ऐसे नेता या तो चुनाव लड़ना चाहते हैं या फिर चुनाव लड़कर हार चुके होते हैं.

हालांकि अब एक अहम मामले की वजह से इस प्रक्रिया पर दूरगामी असर पड़ सकता है. पटना हाईकोर्ट ने बिहार विधान परिषद के 12 नॉमिनेटेड सदस्यों को नोटिस दिया है. नोटिस में कोर्ट ने यह पूछा कि किस क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता के आधार पर उन्हें विधानपरिषद में मनोनीत किया गया.

कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न विधान पार्षदों की सदस्यता निलंबित कर दी जाए. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने विधान पार्षदों की पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी भी मांगी है. इन सदस्यों में नीतीश कुमार के मौजूदा कैबिनेट में शामिल सदस्य राजीव रंजन सिंह भी है जिन्हें सामाजिक कार्यों की पृष्ठभूमि के तहत विधान परिषद भेजा गया है.

अन्य सदस्य

  1. जावेद इकबाल अंसारी (सामाजिक कार्य)
  2. ललन कुमार सर्राफ (सामाजिक कार्य)
  3. रामचंद्र भारती (सामाजिक कार्य)
  4. राम लसन राम रमन (सामाजिक कार्य)
  5. रामचंद्र रॉय (साहित्य)
  6. राणा गंगेश्वर सिंह (सहकारी आंदोलन)
  7. रणवीर नंदन (विज्ञान)
  8. सम्राट चौधरी (सामाजिक कार्य)
  9. शिव प्रसन्न यादव (सामाजिक कार्य)
  10. विजय कुमार मिश्रा (सामाजिक कार्य)
  11. संजय कुमार सिंह (सामाजिक कार्य)
  12. मशहूर होने का दावा

इन 12 सदस्यों में से परिषद के चेयरपर्सन पहले से ही दल-बदल विरोधी कानून के तहत सम्राट चौधरी की सदस्यता खारिज कर चुके हैं. शिव प्रसन्न यादव को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से नोटिस जारी किया गया है. चौधरी नीतीश कुमार के कैबिनेट में मंत्री थे. उस वक्त जीतन राम मांझी भी मंत्री हुआ करते थे लेकिन बाद में उन्होंने मांझी गुट को अपना लिया जब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ बगावत की थी.

यादव  को बर्खास्त किए जाने की मांग जेडी-यू ने की थी क्योंकि उन्होंने अपने बेटे को पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ उम्मीदवार बनाया था. विडंबना यह है कि संजय कुमार सिंह ने चेयरपर्सन को चिट्ठी लिखकर इन लोगों की सदस्यता खारिज किए जाने की मांग की थी. कोर्ट ने सिंह को भी नोटिस जारी किया है और वह जेडी-यू के मुख्य सचेतक हैं.

अंसारी और राम रमन भी पहले विधायक रह चुके हैं. उन्होंने 2014 में आरजेडी  छोड़ते हुए जेडी-यू ज्वाइन किया था और इसके बाद पार्टी ने उन्हें परिषद का सदस्य बनाकर मांझी कैबिनेट में मंत्री बना दिया था. राणा गंगेश्वर सिंह और विजय कुमार मिश्रा ने बीजेपी छोड़कर जेडी-यू की सदस्या ली थी. राजीव रंजन ने 2014 मे मुंगेर से लोकसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन जीत नहीं पाए. वहीं सर्राफ को नीतीश का भरोसेमंद माना जाता है. रणवीर नंदन पटना यूनिवर्सिटी में जियोलॉजी के प्रोफेसर हैं और वह जेडी-यू में आने से पहले बीजेपी के सदस्य थे.

रॉय हिंदी के लेखक और आलोचक हैं. वह पहले आरजेडी के महासचिव और पार्टी की तरफ से पार्षद बनाए जा चुके हैं. फिलहाल वह जेडी-यू में हैं.

संवैधानिक परिषद को नजरअंदाज किया जाना

हाईकोर्ट ने नागरिक अधिकार मंच की तरफ से दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी को नोटिस जारी किया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन सभी का नामांकन संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए किया गया है.

एनजीओ का आरोप है कि कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक कार्यों की पृष्ठभूमि को नजरअंदाज करते हुए पूर्व नेताओं और विधायकों को विधान पार्षद में मनोनीत किया गया.

नागरिक अधिकार मंच के महासचिव रमेश कुमार चौबे ने कैच को बताया कि सभी सदस्यों के बायो डेटा भी समान ही हैं जो यह बताता है कि इसमें फर्जीवाड़ा किया गया. चौबे ने कहा कि यह बात सभी जानते हैं कि विधान परिषद की सीट बड़ी कीमत पर बेच दी जाती है.

अदालत ने नोटिस का जवाब देने के लिए सभी सदस्यों को 8 मार्च का समय दिया है. 

First published: 5 February 2016, 22:42 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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