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केंद्र सरकार का भाजपा को दो टूक: परिवार ख़ुद तय करे अपना आकार

चारू कार्तिकेय | Updated on: 13 December 2016, 7:52 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • लोकसभा में एक सवाल के जवाब में अनुप्रिया पटेल ने कहा है कि जनसंख्या में वृद्धि केवल जनसंख्या में मोमेंटम की वजह से है. जनसंख्या पर अंकुश लगाने का सरकार का कोई इरादा नहीं है. 
  • सवाल भाजपा के दो सांसदों ने किया था. आरएसएस भी यह दुष्प्रचार करता रहा है कि मुसलमानों की कई बीवियां होती हैं और इस कारण उनके कई-कई बच्चे होते हैं. 

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ इस बात को लेकर हमेशा परेशान रहा है कि केंद्र सरकार दो बच्चों की नीति को सख्ती से लागू क्यों नहीं कर रही. पर सरकार ने साफ कहा कि वह किसी भी परिवार को इसके लिए मजबूर नहीं करेगी. दंपतियों को अपने परिवार का आकार स्वेच्छा से तय करने का अधिकार होना चाहिए. 

भाजपा के दो सांसदों ने जनसंख्या वृद्धि पर लोकसभा में सवाल किया था. इनमें उत्तर प्रदेश में लालगंज से नीलम सोनकर और भोपाल से आलोक संजर थे. इनके सवालों में तीन मुख्य बातें थीं. पहली, क्या 2030 तक भारत की जनसंख्या चीन से आगे बढ़ जाएगी? दूसरी, जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण करने के लिए क्या लक्ष्य तय किए गए हैं? और आख़िरी, क्या सरकार दो बच्चों की नीति सख्ती से लागू करेगी?

परिवार का आकार, दंपति का अधिकार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस सवाल पर काफी दिलचस्प जवाब दिए. उन्होंने कहा कि सरकार को उस रिपोर्ट की जानकारी है. जिसमें कहा गया है कि 2030 तक भारत की जनसंख्या चीन से ज्यादा हो सकती है.

हालांकि उन्होंने इस चिंता को 2011 की जनगणना का आंकड़ा बताकर थोड़ा कम भी किया. इन आंकड़ों के हिसाब से भारत में इसकी वृद्धि दर 4 प्रतिशत गिर गई है, जो अपने आप में काफी है. उन्होंने बताया कि जनसंख्या में वृद्धि केवल जनसंख्या में मोमेंटम की वजह से है.

पटेल ने यह भी कहा कि सरकार ने अभी तक जनसंख्या पर अंकुश लगाने का कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है, और इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण कि दो बच्चों की बाध्यकारी नीति लागू करने की उनकी कोई भी मंशा नहीं है. 

लोकसभा में मंत्री ने सांसदों को जानकारी दी कि भारत ने आईसीपीडी-1994 पर हस्ताक्षर किए थे. इसके अनुसार दंपतियों को प्रजनन का अधिकार है, और उन्हें स्वेच्छा से अपने परिवार की साइज तय करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

अनुप्रिया का जवाब यहीं खत्म नहीं हुआ. उन्होंने दक्षिणपंथियों के एक बहुप्रचारित मिथ को लोकसभा में यह जानकारी देते हुए तोड़ा कि देश में वांछित प्रजनन दर 1.9 है. इसका मतलब साफ है, औसतन भारतीय दंपति दो बच्चों से ज्यादा नहीं चाहते.

दक्षिणपंथियों का विरोध

इस कथन को भाजपा और आरएसएस के कई मंत्रियों के कथन की पृष्ठभूमि में बेहतर समझा जा सकता है. इनमें सबसे आगे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह हैं, जिन्होंने हाल में देश में हो रहे ‘जनसंख्या विस्फोट’ पर काबू पाने के लिए सरकार से नसबंदी कार्यक्रम की अपील की है.

सिंह बिहार में नवादा से सांसद हैं. उन्होंने इस साल अप्रैल में कहा था कि भारत ‘सभी धर्मों’ पर दो बच्चों के नियम को सख्ती से लागू नहीं करेगा तो ‘बेटियां सुरक्षित नहीं रहेंगी और उन्हें पाकिस्तान की तरह परदे में रखना पड़ेगा.’ उनके शब्दों में, ‘हिंदु के दो बेटा हो और मुसलमान को भी दो ही बेटा होना चाहिए...हमारी आबादी घट रही है... जनसंख्या नियंत्रण के नियम को बदलना होगा, तभी हमारी बेटियां सुरक्षित रहेंगी.’

2011 की जनगणना के आंकड़ों का 2015 में धर्म के हिसाब से वर्गीकरण किया गया था. इन आंकड़ों में दक्षिणपंथी अपने प्रचार के लिए हद से ज्यादा ही घुस गए और आंकड़ों की गलत व्याख्या की.  

आरएसएस का दुष्प्रचार

आरएसएस से जुड़े कई नाम तो इस आशंका को बढ़ाने में लगे हैं कि हिंदुओं की जनसंख्या चिंताजनक रूप से गिर गई है. उनकी दलील थी कि मुसलमानों के कई बीवियां होती हैं और इस कारण कई बच्चे होते हैं. यह उनका प्रचार का सबसे पुराना हथियार है, जिसका इस्तेमाल दक्षिणपंथी मुसलमानों को बदनाम करने और हिंदुओं को उनके खिलाफ भडक़ाने में करते हैं. 

इसी के मद्देनजर दो बच्चों की नीति को सख्ती से लागू करने की मांग अक्सर उठाई जाती है. विडंबना है कि इस मांग के समर्थक इसी भावना से वकालत करते हैं कि हिंदु औरतों को भी अपने धर्म के हिसाब से कम से कम चार बच्चों को जन्म देने का अधिकार होना चाहिए.

स्वास्थ्य मंत्री ने बिना किसी धर्म का विचार किए, सीधा तथ्यों को रखते हुए उनके प्रचार को बेअसर किया. कोई यह उम्मीद कर सकता है कि उनका कथन भाजपा और वृहत संघ परिवार के प्रचार का अंत करने के लिए उपयोगी हो सकता है.

First published: 13 December 2016, 7:52 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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