Home » इंडिया » No Your Excellency, India is not a Hindu Israel
 

गुस्ताखी माफ महामहिम: भारत हिंदू इज़राइल नहीं है

आदित्य मेनन | Updated on: 10 February 2017, 1:46 IST
QUICK PILL

दो दिनों में असम के गवर्नर पी बी आचार्य ने दो ऐसे बयान दिए हैं जो कहीं से भी राज्यपाल पद की गरिमा के मुताबिक नहीं है. 22 नवंबर को उन्होंने कहा, 'हिंदुस्तान हिंदुओं के लिए है.' कायदे से इस बयान को वापस लेने की बजाय उन्होंने एक और बयान दे डाला. पिछले बयान को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, 'वह (मुस्लिम) कहीं भी जा सकते हैं. वह चाहे तो भारत में भी रह सकते हैं. अगर वह बांग्लादेश या पाकिस्तान जाना चाहते हैं तो वहां भी जाने के लिए आजाद हैं.' दो पहलुओं से देखने पर आचार्य का बयान बेहद गंभीर है और संविधान की मूल आत्मा के विपरीत है.

पद की गरिमा के मुताबिक आचरण

पहला तो यह कि आचार्य राज्यपाल हैं जो संवैधानिक पद है. उनका आचरण और बयान निश्चित तौर पर संवैधानिक दायरे में होना चाहिए जिसमें साफ तरीके से भारत के धर्मनिरपेक्ष राज्य होने का जिक्र किया गया है.

'हिंदुस्तान हिंदुओं के लिए है' दूसरे देशों में रहने वाले हिंदुओं को यहां आने और रहने की छूट देनी चाहिए. यह बयान धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के खिलाफ है

उन्हें अपनी निजी जिंदगी में किसी भी धर्म विशेष से जुड़े रहने और किसी धार्मिक विचार पर अमल करने की आजादी है लेकिन गवर्नर होने के नाते उनके लिए एक ही पुस्तक पवित्र धर्मग्रंथ हो सकती है और वह है भारत का संविधान.

संवैधानिक पद पर बैठा कोई भी अधिकारी अगर संविधान की मूल आत्मा का अपमान करता है तो उसे उस पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. और यह सिर्फ केवल संवैधानिक पदों के लिए ही लागू नहीं होना चाहिए. यहीं से आचार्य के बयान का दूसरा विवादित पहलू सामने आता है.

गड़बड़ राजनीतिक मान्यता

आचार्य के बयान को केवल अजीब बयान समझकर खारिज नहीं किया जा सकता. यह हिंदुस्तान के हिंदू राष्ट्र होने की गलत व्याख्या से निकली मानसिकता है. इस तरह की विचारधारा को आगे बढ़ाने के मामले में केवल आचार्य ही अकेले इंसान नहीं हैं. यह बीजेपी की केंद्रीय राजनीतिक विचारधारा है जिससे वह जुड़े रहे हैं. बीजेपी लगातार दुनिया भर के हिंदुओं को भारत में शरण देने की वकालत करती रही है.

रवि शंकर प्रसाद जैसे कुछ नेता तो यहां तक कहते हैं कि पाकिस्तान के हिंदुओं के मुद्दे का आगे बढ़ाना भारत सरकार की संवैधानिक जवाबदेही है. यह न केवल बेतुका बयान है बल्कि राजनीतिक रूप से भी यह खतरनाक मान्यता है. इससे पाकिस्तान को भारत में रह रहे मुसलमानों के प्रति किए जाने वाले बर्ताव पर नसीहत देने का मौका मिलता है.

इसरायल यह एक यहूदी राज्य है और वह पूरी दुनिया में रह रहे यहूदियों का अपने यहां आकर बसने का अवसर देता है. यह इसरायल अपने आप को दुनिया के सामने रखने का तरीका है, चाहे गलत हो या सही. लेकिन भारत हिंदू इसरायल नहीं है. इस बात से हालांकि कोई फर्क नहीं पड़ता कि कितने हिंदुत्व के समर्थक इसे इसरायल की तरह बनाना चाहते हैं. निश्चित तौर पर भारत ने दुुनिया भर से आए लोगों को अपने यहां ठिकाना मुहैया कराया है. लेकिन यह काम सिर्फ मानवता के नाते किया जाता रहा है.

साध्वी प्राची, साक्षी महाराज और गिरिराज सिंह को किसी भारतीय को देश छोड़कर चले जाने की बात कहने का अधिकार नहीं है

यही वजह रही कि जोराष्ट्रियन ने सदियों पहले भारत को अपना ठिकाना बनाया. मानवता की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए भारत ने दुनिया भर के उत्पीड़ित और शोषितों को अपने यहां ठिकाना दिया. चाहे वह तिब्बती हो या बहाई या फिर गृहयुद्ध की वजह से अफगानिस्तान छोड़कर आए लोग. इसी भावना के तहत 1971 में पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को भारत ने अपने यहां जगह दी.

यह कहना गलत है कि भारत केवल हिंदुओं के लिए खुला है और उससे भी बुरा जब आप भारतीय मुसलमान को पाकिस्तान या बांग्लादेश जाने के लिए कहते हैं. भारत सभी भारतीयों का है. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कोई किस तरह से अपनी धार्मिक मान्यताओं को आगे बढ़ाता है या फिर उसकी राजनीतिक विचारधारा क्या है. न तो आचार्य और न ही उनकी तरह की विचारधारा रखने वाले साध्वी प्राची, साक्षी महाराज और गिरिराज सिंह को किसी भारतीय को देश छोड़कर चले जाने की बात कहने का अधिकार है.

First published: 25 November 2015, 9:01 IST
 
आदित्य मेनन @adiytamenon22

एसोसिएट एडिटर, कैच न्यूज़. इंडिया टुडे ग्रुप के लिए पाँच सालों तक राजनीति और पब्लिक पॉलिसी कवर करते रहे.

पिछली कहानी
अगली कहानी