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सिर्फ इंदिरा ही नहीं, 6 बार मोदी ने अपने बचाव के लिए दूसरों पर आरोप मढ़ा है

चारू कार्तिकेय | Updated on: 7 February 2017, 8:13 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • जब-जब मोदी अपने किए गए वादों को पूरा कर पाने में नाकाम होते हैं, वह इसका दोष दूसरों पर मढ़ देते हैं. 
  • बिना तैयारी नोटबंदी घोषणा करने पर घिरे मोदी ने अब अपने बचाव में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का सहारा लिया है. 

हां, आपने बिल्कुल ठीक सुना. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी के बाद देश के सामने सभी तरह की जो समस्याएं पैदा हुईं हैं, उसके लिए विपक्ष पर आरोप मढ़ दिया है. विशेषकर उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया है. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर तो उन्होंने और तीखा हमला किया है. 

क्यों? पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 45 साल पहले वह फैसला नहीं कर पाईं, जो उन्हें करना था.

नई रणनीति नहीं

अगर आप मोदी के ग्राफ को देखें और उनके काम करने के तौर-तरीकों से परिचित हैं तो वास्तव में इसमें कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है. साल 2014 के लिए अपना चुनावी अभियान शुरू करने के बाद से उनकी मतदाताओं से मुख्य अपील यही थी कि वे एक बार भाजपा को मौका दें ताकि अन्य दलों के 60 साल के 'कुशासन' को समाप्त किया जा सके. साल 2014 में सत्ता में आने के बाद भी मोदी समेत अन्य भाजपा नेताओं ने इस लाइन को बरकरार रखा और यह संदेश देने की कोशिश की कि आजादी के बाद से देश में अब तक कुछ नहीं हुआ है और वे स्थितियां बदल देंगे.

सचमुच में, उनके कार्यकाल की अवधि का आधा भाग बीत जाने के बाद जब उन पर अपने वादों को पूरा न कर पाने पर सवाल उठने लगे हैं तो उन्होंने अपनी असफलता को छिपाए रखने की कोशिश की. मोदी के सवाल ऐसे थे जैसे कि केजी में पढ़ने वाले बच्चे करते हैं. उनका कहना था कि आपने अन्यों को 60 साल दिए हैं. हमें तो सिर्फ एक या दो साल हुए हैं, हम पर सवाल मत उठाइए.

नोटबंदी के मामले में भी मोदी ने अब अपने इसी तर्क को दोहराया है. उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी को दशकों पहले नोटबंदी का फैसला करना था लेकिन उन्होंने पार्टी हित को देश हित से ऊपर मानते हुए ऐसा नहीं किया.

मोदी ने पिछले माह भी इसी तरह का संदर्भ दिया था. नोटबंदी की घोषणा करने के सिर्फ 6 दिन बाद ही. उन्होंने आपातकाल का हवाला देते हुए दलील दी थी कि उन्होंने तो 50 दिन मांगे हैं. यह तो उन 19 महीनों की तुलना में कुछ भी नहीं हैं जब इंदिरा गांधी ने 'पूरे देश को जेल में तब्दील कर दिया था'. 

लेकिन, इसमें भी चांदी की परत है. किसी पर आरोप लगाते समय भी अक्सर अपराध की आधी-स्वीकृति तो हो ही जाती है.

किसी भी इंसान पर आरोप लगाते वक्त अक्सर आधा-अपराध तो मान ही लिया जाता है. क्या ऐसा नहीं है?

ऐसे में अपने इस बयान में मोदी आवश्यक रूप से यह तो कह ही रहे हैं कि वह स्वीकार करते हैं कि चीजें गलत हुईं हैं. वह केवल इस स्वीकृति को यह कहकर छिपाने की कोशिश कर रहे हैं कि अन्य सरकारों ने भी अब तक कुछ नहीं किया है.

दिलचस्प तो यह है कि उनका बय़ान इन खबरों के बाद आया है कि कई भाजपा सांसदों ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से कहा है कि नोटबंदी जनता पर असर नहीं छोड़ पाई है और लोग नगदी की लगातार कमी से काफी नाराज हैं.

ऐसे 6 बिन्दु हैं जिन पर मोदी समय-समय पर विलाप करते रहे हैं कि 'पिछले साठ सालों में' गतिविधियां पूरी तरह निष्क्रिय रहीं और इसके लिए उन्होंने पूर्व सरकारों को दोषी ठहराया है.

1-अच्छे दिन

मई 2015 में अपनी सरकार का पहला साल पूरा होने पर रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए मोदी ने कहा था कि देश को 60 सालों तक लूटा गया. उन्होंने यह भी कहा था कि जो लोग यह शिकायत कर रहे हैं कि अच्छे दिन के वादे कभी पूरे नहीं होंगे, अच्छे दिन कभी नहीं आएंगे, ये वे लोग हैं जिनकी 'दिल्ली के राजनीतिक कॉरिडोर' में मोनोपॉली रही है.

2-किसानों की व्यथा

मोदी ने साल 2015 में लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर अपने दूसरे सम्बोधन में कहा था कि किसानों को संरक्षण की जरूरत है. पिछले 60 सालों से उनके कल्याण पर बहुत ही कम ध्यान दिया गया है. हम इस स्थिति में बदलाव लाना चाहते हैं.

किसानों का व्यथा, विपत्तियां, दुख हमेशा उनकी चिन्ताओं के कारणों में रही हैं. फिर भी किसानों की आत्महत्या घटनाएं सामने आ रहीं हैं. इसके बाद भी अभी तक किसी बड़े सुधार की घोषणा नहीं की गई. वास्तव में, नोटबंदी से किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, खासकर उनके लिए ये दिन बड़ी पीड़ा के हैं और इसका वास्तविक असर तो आने वाले महीनों में ही दिखेगा.

3-सैनिकों का कल्याण

मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक के उद्देश्यों पर बोलते हुए अपने जोशपूर्ण भाषण में कहा था कि पूर्ववर्ती सरकारों ने पूर्व सैनिकों को धोखा दिया है. यह केवल उनकी सरकार है जिसने वन रैंक-वन पेंशन योजना का वादा पूरा किया है.

निश्चित रूप से, यह उनकी सरकार के लिए अप्रासंगिक ही है कि यही पूर्व सैनिक अभी भी यह शिकायत कर रहे हैं कि ओआरओपी को अभी क्रियान्वित नहीं किया गया है.

4-दिव्यांगो के लिए काम

मोदी ने कहा है कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इसके पहले के दशक में दिव्यांगों के लिए कोई सक्षम काम नहीं किया है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा 1992-2014 के बीच उनके लिए केवल 56 कार्यक्रम आयोजित किए गए जबकि उनकी सरकार पहले ही 4,500 कार्यक्रम आयोजित कर चुकी है.

5-उत्तर प्रदेश का विकास

मोदी की कल्पना में पूर्ववर्ती सरकारें और उनके नेता कुछ अवसरों पर आदर्श बन जाते हैं. उप्र में पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू की जयन्ती पर एक कार्यक्रम में मोदी ने पिछले माह कहा कि किसी ने भी राज्य के लोगों के विकास की उनकी इच्छा को पूरा नहीं किया है. लखनऊ में मोदी ने कहा कि किसी ने भी ऐसी श्रद्धांजलि आपको (नेहरू को) नहीं दी होगी जिस तरह से यह राज्य आपको दे रहा है जहां से आप सांसद रहे थे.

6-गोधरा दंगे

विडम्बना तो यह है कि मोदी दूसरों पर तो आरोप लगाते रहते हैं लेकिन 2002 के गोधरा कांड के काले धब्बे उन पर पहले से ही लगे हुए हैं. उस साल मोदी ने कहा था कि दंगों के लिए कांग्रेस, मुस्लिम और पाकिस्तान जिम्मेदार हैं.

First published: 19 December 2016, 7:59 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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