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पंजाब कांग्रेस के खिलाफ जगमीत बरार ने खोला मोर्चा

राजीव खन्ना | Updated on: 31 January 2016, 21:42 IST
QUICK PILL
  • जगमीत बरार ने एक बार फिर से पार्टी नेतृत्व की आलोचना कर पंजाब कांग्रेस को सकते में डाल दिया है. बरार इससे पहले भी विवादित बयान देते रहे हैं.
  • इस बार बरार ने आम आदमी पार्टी की तारीफ कर अमरिंदर सिंह को निशाने पर लेते हुए कहा कि कि उन्होंने अमरिंदर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है.

पंजाब में जगमीत बरार और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है. पार्टी की खुलेआम आलोचना कर बरार एक बार फिर से सुर्खियों में है. बरार ने इस बार सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए कांग्रेस की आलोचना की है. उन्होंने एक के बाद एक ट्वीट कर पार्टी को मुश्किलों में डाल दिया है. 

बरार ने माघी मेला के बाद आम आदमी पार्टी की आलोचना कर उसे सकते में डाल दिया है. आम आदमी पार्टी की रैली की ताकत का जिक्र करते हुए बरार ने ट्वीट किया, 'आप की माघी रैली जबर्दस्त रही है. ऐसा रैली मुक्तसर में पहले कभी नहीं देखी गई.' बरार की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसका मतलब निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

बरार ने सुखबीर सिंह बादल को पिछले चुनाव में भारी मतों के अंतर से हराया था

इसके बाद बरार ने खडूर साहिब उप-चुनाव का मुद्दा उठाते हुए राज्य में कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. रमनजीत सिंह सिक्की की उम्मीदवारी पर पार्टी की तरफ से कोई फैसला किए जाने से पहले बरार ने उनके लिए समर्थन तैयार किया. उन्होंने कहा कि सिक्की जैसे उम्मीदवार के लिए घर-घर जाकर प्रचार करेंगे. उन्होंने सिक्की के नाम पर अंतिम मुहर लगाने के लिए कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी और वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी को चिट्ठी लिखे जाने की बात भी की.

लेकिन कांग्रेस की तरफ से चुनाव नहीं लड़े जाने के फैसले के तत्काल बरार ने यह कहने में देर नहीं लगाई कि कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है. 

उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'यह लिखते हुए मेरा दिल रो रहा है कि हमने बादल और अकाली के सामने समर्पण कर दिया. हमने घुटने टेक दिए. मैंने और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 35 सालों तक संघर्ष किया. हमें बुरा लग रहा है.' इसके बाद उन्होंने कई और ट्वीट कर अमरिंदर और कांग्रेस नेतृत्व को निशाना बनाया.

यह एक तरह से पार्टी के भीतर आंतरिक कलह की शुरुआत है. अमरिंदर के स्थानीय समर्थकों और 20 पूर्व विधायकों ने बरार को पार्टी से बाहर किए जाने की मांग की है जबकि बरार ने इस मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पार्टी के कुछ नेता अक्सर उनका विरोध करते रहे हैं. आखिरकार मसले में पार्टी के महासचिव शकील अहमद को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने दोनों पक्षों को मसले को सार्वजनिक मंच पर नहीं लाए जाने की सलाह दी है.

विवादों के बावजूद बरार पंजाब कांग्रेस में बेहद मजबूत नेता बनकर उभरे हैं

हालांकि बात अब आगे तक जा चुकी है. अमरिंदर के वफादार और गुरदासपुर जिला अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कथित तौर पर बरार को स्वार्थी और हताश नेता बताया. अमरिंदर भी बरार के आरोपों का जवाब दे रहे हैं. आप की माघी रैली पर बरार के ट्वीट का जवाब देते हुए अमरिंदर ने कहा कि उन्हें पता नहीं है कि उनकी वफादारी किस तरफ है.

विवादों के बावजूद बरार कांग्रेस में मजबूत नेता बनकर उभरे हैं. बरार फरीदकोट से दो बार सांसद रहे हैं और उन्होंने 1999 में सुखबीर सिंह बादल को भारी मतों से हराया. नेता होने के अलावा बरार वकील , लेखक और कवि भी हैं. उन्हें शानदार वक्ता के तौर पर जाना जाता है. 

बरार को उस वक्त पार्टी से निलंबित कर दिया गया जब उन्होंने 2014 में राहुल गांधी और सोनिया गांधी को राजनीति से दूर रहने की सलाह दे डाली थी. हालांकि कुछ महीनों बाद उनका निलंबर वापस ले लिया गया. आलोचकों का कहना है कि जनप्रिय नेता होने के बावजूद बरार को अभी तक  वह नहीं मिल पाया है जिसके वह हकदार हैं. बरार करीब तीन दशक से बादल का जबरदस्त आलोचक रहे हैं.

बरार ने पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है

सवाल यह है कि बरार का अब अगला कदम क्या होगा? क्या वह कांग्रेस में रहेंगे या फिर वह अपनी पार्टी बनाएंगे. बरार अपना पता बेहद सावधानी से खोल रहे हैं. वह कह रहे हैं कि उनका कांग्रेस के साथ पुराना रिश्ता है लेकिन उन्होंने दूसरे विकल्प की संभावनाओं से इनकार नहीं किया है. उन्होंने कहा, 'हमें विरोध को विश्वासघात से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. यह मानसिकता हमें खत्म कर सकती है.'

हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि पंजाब के लोग अलग तरह की राजनीति चाहते हैं जो दो परिवारों के बीच में नहीं सिमटी हो. यह लोगों पर आधारित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल पूंजीपतियों का हित साधने के लिए साथ मिलकर काम कर रहे हैं. उन्होंने विधानसभा चुनाव में प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. फिलहाल हर दिन के लिहाज से नई खबर हैं.

First published: 31 January 2016, 21:42 IST
 
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