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मैगी तो छोड़िए, भारत में खाने-पीने की लगभग हर चीज असुरक्षित है

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST
QUICK PILL
  • लेड की निर्धारित से ज्यादा मात्रा के चलते \'असुरक्षित\' और \'खतरनाक\' बताते हुए भारत के कई राज्यों ने मैगी पर प्रतिबंध लगा दिया. 
  • कृषि मंत्रालय के विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय की एक पहल एगमार्क नेट ने हमारे खाने की वस्तुओं मसलन सब्जी, फल, मांस और आईस्क्रीम आदि में 58 मिलावटों को सूचीबद्ध किया है.

लेड की निर्धारित से ज्यादा मात्रा के चलते 'असुरक्षित' और 'खतरनाक' बताते हुए भारत के कई राज्यों ने मैगी पर प्रतिबंध लगा दिया. मजबूरन मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले को अपने टू मिनट्स नूडल्स को बाजार से वापस लेना पड़ा और कंपनी के शेयरों में गिरावट आई.

वर्तमान में 14 राज्यों में मैगी पर प्रतिबंध है जबकि कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने इसे हरी झंडी दे दी है. 

गौरतलब है कि लेह में तैनात भारतीय सैनिकों समेत देश भर के तमाम छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के लिए भी मैगी एक सस्ता और तुरत-फुरत में तैयार होने वाला नाश्ता रहा है. 

हालांकि भारत में कुछ भी सुरक्षित नहीं है. हां, आपने बिल्कुल सही सुना. कृषि मंत्रालय के विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय की एक पहल एगमार्क नेट ने हमारे खाने की वस्तुओं मसलन सब्जी, फल, मांस और आईस्क्रीम आदि में लगभग 58 मिलावटों को सूचीबद्ध किया है.

14 राज्यों में मैगी पर प्रतिबंध है जबकि कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने इसे हरी झंडी दे दी है

दिलचस्प बात यह है कि ऐसे मिलावटी और दूषित खाद्य उत्पाद देश भर में बहुतायत में उपलब्ध हैं. यहां हम ऐसे दूषित तत्वों और दुष्प्रभाव वाले उत्पादों की विस्तृत सूची दे रहे हैं जो पूर्व में विवादों में रह चुके हैं. इससे पता चलता है कि भारत में खाद्य-पेय पदार्थ और यहां तक की पानी भी सुरक्षित नहीं है.

पानी

लगभग एक महीने पहले केंद्रीय भूजल बोर्ड के एक अध्ययन में पता चला कि भारत का आधे से ज्यादा भूजल नाइट्रेट जैसे जहरीले रसायनों से दूषित है और करीब 40 फीसदी में फ्लोराइड मिला है. 

इसका सीधा सा मतलब कि भारी संख्या में भूजल पीने वाले लोग अतिसंवेदनशील मस्तिष्क संबंधी बीमारियों, लिवर की समस्याओं और ट्यूमर से प्रभावित हो सकते हैं.

दूध

हमारे पीने के दूध में से करीब 70 फीसदी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के मानकों (एफएसएसएआई) का पालन नहीं करता है. 

यह पाया गया है कि दूध में भारी मात्रा में रंग और साबुन मिलाया जाता है जिससे फूड प्वॉयजनिंग और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं पैदा हो सकती हैं. 

दिलचस्प बात है कि कुछ दिन पहले मैगी की असफलता से स्वयं को बचाने के प्रयास में लगी नेस्ले कंपनी के ही स्किम्ड मिल्क पाउडर में जिंदा लार्वा मिला था जिसने एक नए विवाद को जन्म दिया था.

आलू के चिप्स

कुछ वक्त पहले कुरकुरे में प्लास्टिक की मौजूदगी का विवाद भी सोशल मीडिया में उछला था, यह शायद सभी को याद होगा. अंत में इसकी रिपोर्ट मीडिया में आने के बाद कुरकुरे को सावधानी का नोटिस जारी करना पड़ा था.

हालांकि, इससे संबंधित एक शोध में पता चला कि कुरकुरे और लेज चिप्स में एक्राइलोमाइड जैसा विषाक्त पदार्थ मिला होता है, जो न्यूरोलॉजिकल नुकसान पहुंचाता है.

सेब, आम और अन्य फल

हम सभी यह सुनते हुए बड़े हुए हैं कि "एन एप्पल ए डे, कीप्स द डॉक्टर अवे", लेकिन रिपोर्ट बताती हैं कि अगर आप सेब और भारत के पसंदीदा फल आम से प्यार करते हैं तो आपको डॉक्टर की ज्यादा जरूरत पड़ सकती है. 

इन फलों को प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड के जरिये पकाया जाता है, जो कैंसर और पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है.

इसके अलावा जो सेब जितना ज्यादा चमकता है उसमें वैक्स (मोम) की पर्त चढ़ाई गई होती है जोकि पाचन के लिए हानिकारक है.

कोक-पेप्सी

शायद आपको प्यास बुझाने के लिए इन दिग्गज कोला कंपनियों का पेय नहीं पीना चाहिए क्योंकि कथित रूप से यह अपने पेय पदार्थों में पेस्टीसाइड (कीटनाशक) का इस्तेमाल करते हैं. विज्ञान और पर्यावरण केंद्र के अनुसार इन पेय पदार्थों में कीट-पतंगों को मारने के काम आने वाला कीटनाशक, सुरक्षा मानकों की तुलना में काफी ज्यादा मात्रा में मिला होता हैै, जिससे कैंसर हो सकता है.

इसके अलावा, कोल्ड ड्रिंक्स में बोमैनेटेड वनस्पति तेल भी मिले होते हैं जो एनीमिया और दिल की बीमारियों का कारण बन सकते हैं.

चाय

यूं तो चाय को भारत का असली राष्ट्रीय पेय माना जाता है. लेकिन भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के अनुसार चाय में लोहे का बुरादा भरकर इसे दूषित किया जा रहा है.

नियमों की अनदेखी के कारण निर्माताओं द्वारा लोहे के बुरादे को मिलाने की वास्तविक मात्रा का कभी पता नहीं लगााया जा सकता. ज्यादा लोहे की मात्रा लीवर सिरोसिस, हृदय रोग और मधुमेह का कारण बन सकती है.

चॉकलेट्स

2003 में कैडबरी डेयरी मिल्क की चॉकलेट में पहली बार कीड़े पाए जाने पर भारत में इसे काफी बदनामी और दुष्प्रचार का सामना करना पड़ा था. 

मुंबई के उपनगरीय इलाके में चॉकलेट के 69 विभिन्न ब्रांडों के जांच अध्ययन से पाया गया कि भारत में चॉकलेटों में एक रासायनिक धातु कैडमियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से बहुत ज्यादा मौजूद होती है.

धीरे-धीरे शरीर में कैडमियम इकट्ठा होने से किडनी और लिवर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.

कड़वा तेल

भारत में मिलावटी सरसों का तेल मिलना आम बात है और इससे शहरों में काफी लोगों की जानें भी जा चुकी हैं.

सरसों के तेल एक ऐसे वर्ग में आता है जिसमें आर्जीमोन मैक्सिकाना नाम का एक बीज भी था है औऱ सरसों के तेल में इसकी सामान्य तौर पर मिलावट होती रहती है. इस मिलावट का उच्च स्तर महामारी और हृदयाघात भी पैदा कर सकता है.

बर्फ गोला

देश भर के स्कूलों-शॉपिंग मॉल्स के नजदीक आसानी से मिलने वाले बर्फ गोला या पॉप्सिकल्स बच्चों को बहुत पसंद आता है. 

इसमें इस्तेमाल होने वाला रंग-बिरंगा मीठा शर्बत बनाने के लिए इसमें कॉपर सल्फेट मिलाया जाता है जिससे कैंसर और मानसिक बीमारी हो सकती है.

हाल ही में, केएफसी के रिजो राइस में भी प्रतिबंधित श्रेणी वाले रंगों का इस्तेमाल सामने आया है.

चाट, गोलगप्पा, मोमोज

एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि सड़क किनारे मिलने वाले मसालेदार, स्वादिष्ट चाट-टिक्की में ई कोलाई बैक्टीरिया पाया जाता है जो कि डायरिया और आंत्रशोध का सबसे बड़ा वाहक है.

सीधे शब्दों में कहे तो दिल्ली की गलियों-सड़कों पर मिलने वाले भोजन में दूषित पदार्थ की बहुत ज्यादा मात्रा होती है. 

कच्ची सब्जियां

नदियों के किनारे पर उगी सब्जियों में अक्सर विषाक्त औद्योगिक अपशिष्ट और अमीबा हिस्टोलिटिका फंगस और कीटनाशक जैसे अन्य दूषित पदार्थ मिले होने का आरोप लगता रहा है.

ऐसी सब्जियों के इस्तेमाल से अमीबी पेचिश, महत्वपूर्ण आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाने वाली विषाक्तता तक हो सकती है.

चिकेन

भारतीयों का पसंदीदा नॉनवेज यानी चिकेन भी कम नुकसानदेह नहीं है. वास्तविकता यह है कि हर दो में से एक चिकेन को स्ट्रांग एंटीबायोटिक्स का डोज दिया जाता है. क्योंकि मुर्गी पालन उद्योग इसका इस्तेमाल चिकेन को भोजन देने में करता है.

केवल चिकन ही नहीं बल्कि एंटीबायोटिक्स की मौजूदगी वाला हर मांस नुकसानदायक होता है. इससे मानव शरीर रोगों के लिए दवा प्रतिरोधक बन जाता है, जिससे धमनियां मोटी हो जाती हैं और हृदय रोगों का खतरा मंडराने लगता है. 

बासमती चावल

पुलाव और बिरयानी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कीमती बासमती चावल को भी अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार आर्सेनिक मिलावट वाला बताया गया है. चावल की अन्य वैराइटी में भी इसके मिले होने का आरोप है. शरीर में आर्सेनिक की वजह से चक्कर आना, लकवा मारना या मौत तक की संभावना होती है.

इन सबसे बड़ी चिंता का विषय आगे आने वाला है.

जहरीली देशी शराब

भारत में स्थानीय स्तर पर बनाई जाने वाली शराब में मेथनॉल मिली होती है. इसकी ज्यादा मात्रा धुंधली दृष्टि, अंधापन या मौत का कारण बन सकती है.

अकेले 2013 में देश भर में करीब 450 लोगों की मौत जहरीली देशी शराब पीने से हुई है.

हैरानी की बात है, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव जैसे मुख्यमंत्रियों ने अवैध शराब पीने से हुई मौतों के बाद ऐसे लोगों के लिए मुआवजे के रूप में 2 लाख रुपये की पेशकश की थी.

इसके अलावा भी आए दिन चिकेन बिरयानी, मिड डे मील जैसे भोजन से होने वाली बीमारियों और मौत की खबरें सामने आती रहती हैं. जिनकी वजह दूषित खाद्य पदार्थ और हानिकारक रसायन होतेे हैं.

कह सकते हैं कि हमारे देश में खान-पान की सुरक्षा भगवान भरोसे है.

First published: 20 December 2015, 10:05 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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