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बलात्कार, छेड़छाड़ नहीं, भारतीय महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा हाथ मिलाने से है

रंजन क्रास्टा | Updated on: 4 September 2016, 7:58 IST

इस साल मई में उत्तर प्रदेश को ‘देश का सर्वश्रेष्ठ सांस्कृतिक स्थल घोषित किया गया. इसे इसके लिए पुरस्कार भी दिया गया. हालांकि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के नवीनतम दिशा निर्देशों के अनुसार इस संस्कृति को अब 21वीं सदी में प्रवेश की आवश्यकता है.

एक ओर ट्विटर पर संस्कृति को लेकर माथापच्ची हो रही है तो दूसरी ओर पर्यटन मंत्री महेश शर्मा की ‘नो स्कर्ट्स’ की सलाह पर. इससे एक और अच्छा (या यूं कहें बुरा) कदम आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पश्चिमी देशों से आने वाले पर्यटकों पर यह कहते हुए रोक लगा दी है कि वे स्थानीय लोगों के साथ हाथ मिलाने से बचें, खासकर विपरीत लिंगी लोगों से.

इसके बजाय राज्य में आने वाले पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे सिर्फ मुस्कुरा कर अभिवादन करें और बेहतर है कि अधिक संस्कारी अभिवादन ‘नमस्ते’ का इस्तेममाल करें. हालांकि यह अजीबोगरीब निर्देश यूपी टूरिज्म की ‘क्या करें और क्या न करें’ की सूची में से हटा दिया गया है. राज्य के पर्यटन मंत्री ओम प्रकाश सिंह ने इस तर्क को उचित ठहराया है.

एशियन एज से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह सलाह ‘पर्यटकों को कोई परेशानी न हो’ इसलिए दी गई है. अगर भारत के सर्वश्रेष्ठ सांस्कृतिक स्थल में ही पर्यटक मात्र हाथ मिलाने भर से सुरक्षित नहीं हैं तो यह उत्तर प्रदेश की समस्या है, पर्यटकों की नहीं.

हाथ मिलाना है, हिलाना नहीं

जाहिर है सिंह का यह बयान नाजुक भारतीय महिलाओं के शर्मीले स्वभाव के चलते उनके संरक्षण के मद्देनजर आया है न कि पर्यटकों के लिहाज से क्योंकि वे कहते हैं ‘ज्यादातर महिलाएं हाथ मिलाने के प्रति सहज नहीं हैं.’

परन्तु सच्चाई यह है कि इस निर्देश से किसी को संरक्षण नहीं मिलता. क्या ऐसे अपराधों के उल्लेख मिलते हैं कि उत्तर प्रदेश की महिलाएं हाथ मिलाने भर से डरती हैं. इस तरह की बातों और सुझाावों सें लगता है कि भारत अभी भी सदियों पुराने समय में ही अटका हुआ है और कानून व्यवस्था की समस्याओं की अनदेखी कर रहा है, जो वास्तव में पर्यटकों को झेलनी पड़ती हैं.

भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधि बनने की कोशिश में ओमप्रकाश सिंह यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारतीस महिलाएं चारदीवारी के भीतर रहें और दबी-कुचली रहें. सिंह के लिए महिलाओं की सुरक्षा का मतलब उन्हें सशक्त बनाना या ऐसे समाज का निर्माण करना नहीं है, जिसमें वे निडर होकर रहें बल्कि उनका मानना यह है कि महिलाएं लोगों की नजरों से, स्पर्श से दूर रहें, भले ही वह सामाजिक औपचारिकता का सबसे लोकप्रिय अभिवादन हाथ मिलाना ही क्यों न हो.

महिलाओं की सुरक्षा की सिंह की इस ‘चिंता‘ से स्पष्ट हो गया कि उन्हें देश में महिलाओं द्वारा झेली जा रही वास्तविक समस्याओंकी जानकारी बिल्कुल नहीं है. भारतीय महिलाओं को बहुत सी अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है. वास्तव में देखा जाए तो हाथ मिलाने जैसी समस्या महिलाओं की जिंदगी की समस्याओं की सूची में कहीं है ही नहीं.

भारतीय महिलाओं को बड़ा खतरा

दरअसल भारतीय महिलाओं को पर्यटकों से शायद सबसे कम खतरा है. तो क्या आप जानते हैं भारतीय महिलाओं की असली समस्या क्या है? भारतीय राजनेता और उनकी दकियानूसी सोच. बजाय देश को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित बनाने के राजनेता पार्टी लाइन से उठ कर यह जताने की कोशिश करते रहते हैं कि देश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं.

सिंह की पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव इसका प्रमुख उदाहरण हैं. एक बार उन्होंने बयान दिया था कि दुष्कर्म तो एक ‘गलती‘ है जो लड़कों से अक्सर नादानी में हो जाती है.’ केवल यूपी ही नहीं राजनेताओं के बेवकूफी भरे बोल पूरे देश की समस्या है. मध्य प्रदेश में भाजपा के नेता बाबूलाल गौर ने कहा, ‘बलात्कार कभी सही होते हैं तो कभी गलत.’

तृणमूल कांग्रेस के एक नेता तापस पाल ने तो सारी सीमाएं लांघते हुए अपने विरोधियों के परिजनों का बलात्कार करने का ही आह्वान कर दिया था. इन सबके बाद भी जब वे यौन हिंसा को रोकने में नाकाम रहते हैं तो इसका दोष महिलाओं को ही देते हैं.

मध्यप्रदेश के भाजपा विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, 'दुष्कर्म तो हाोंगे ही अगर महिलाएं नैतिकता की हदें पार करती हैं तो.’ आंध्रप्रदेश कांग्रेस नेता बोत्सा सत्यनारायण ने तो निर्भया कांड के लिए पीड़ित को ही दोषी ठहरा दिया था. उन्होंने कहा- 'निर्भया को इतनी देर रात (साढ़े नौ बजे) बाहर नहीं घूमना चाहिए था और ऐसी बस में नहीं बैठना चाहिए था जिसमें बहुत कम लोग बैठे थे.'

कुछ और लोग महिलाओं के कपड़ों को उनके साथ होने वाली यौन हिंसा का जिम्मेदार मानते हैं. खैर, भारतीय महिलाओं ने इसका विरोध किया है लेकिन हमारे राजनेता उन्हें बस हाथ मिलाने से सुरक्षित कर रहे हैं.

First published: 4 September 2016, 7:58 IST
 
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