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नोटबंदी: रद्दी हुए नोटों से दुबई में बनेगा फर्नीचर

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 December 2016, 12:44 IST
(एजेंसी)

नोटबंदी के बाद भारत में अमान्य हुए पुराने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट दुबई भेजे जा रहे हैं, जहां इनका इस्तेमाल घर के फर्नीचर, फोटो फ्रेम जैसी चीजें बनाने में होगा.

खबरों के अनुसार नोटों की रिसाइकिलिंग के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने केरल स्थित पीके मयान मोहम्मद की कंपनी को चुना है.

पीके मयान मोहम्मद ने कहा कि हार्डबोर्ड तथा फाइबर बोर्ड के लगभग 30-40 फीसदी उत्पाद अमान्य या खराब हो चुके नोटों की रिसाइकिलिंग से बनाए जाते हैं.

दुबई में मोहम्मद ने कहा, "हम पुराने नोटों से निर्मित फाइबर बोर्ड को यूरोप, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में निर्यात कर रहे हैं."

बोर्ड का इस्तेमाल वार्डरोब जैसे फर्नीचर, फोटो फ्रेम, आइने के फ्रेम और दीवार का निर्माण करने के लिए किया जाता है.

मोहम्मद ने कहा कि नोटबंदी की घोषणा के कुछ सप्ताह पहले तिरुवनंतपुरम स्थित आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय ने अमान्य नोटों का पुनर्चक्रण करने के लिए हमारी कंपनी की क्षमता के बारे में जानकारी ली थी.

आरबीआई के अधिकारी 20 अक्टूबर को मोहम्मद से मिले. हालांकि मुलाकात के दौरान उन्होंने नोटबंदी के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की.

इस मामले में मोहम्मद ने बताया, "मुझे लगा कि उन्होंने खराब नोटों को जलाने की जगह उनका पुनर्चक्रण करने के लिए सोचा है. मुझे असल बात तब पता चली, जब प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा की."

कंपनी पुनर्चक्रण के लिए थर्मोकेमिकल पल्पिंग तरीके का इस्तेमाल करती है. उन्होंने कहा, "भारत में केवल हमारे पास ही यह प्रौद्योगिकी है. इसमें उच्च विद्युत ऊर्जा, वाष्प दाब और तापमान का इस्तेमाल होता है."

कंपनी ने अमान्य नोटों के पल्प को एक कच्ची सामग्री की तरह इस्तेमाल करना शुरू किया, जिसे वुड पल्प के साथ मिलाकर हार्डबोर्ड तथा फाइबरबोर्ड का निर्माण किया जाता है.

मोहम्मद ने कहा, "भारत से हमने एक सप्ताह में बेकार हो चुके लगभग 60 टन नोट उठा लिये हैं."

First published: 14 December 2016, 12:44 IST
 
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