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नोटबंदीः शोरगुल और स्थगन के बीच संसद में अटके ज़रूरी बिल

सुहास मुंशी | Updated on: 3 December 2016, 7:37 IST
(मनी शर्मा/एएफ़पी)
QUICK PILL
  • नोटंबदी के बाद से विपक्षी दलों के लगातार हंगामे ने संसद का कामकाज ठप कर दिया है. 
  • कम से कम पांच महत्वपूर्ण बिलों पर अभी तक संसद में चर्चा नहीं हो सकी है. 
  • माना जा रहा है कि कांग्रेस हंगामा इसलिए कर रही है क्योंकि उसकी सरकार के दौरान भाजपा ने भी संसद में ऐसा ही बर्ताव किया था.

संसद में जारी गतिरोध को दो सामान्य से नज़रिये से देखें. एक तो यह कि संसद में गतिरोध रोज़मर्रा की बात हो गई है. प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस आज वही कर रही है जो भाजपा ने इसके साथ किया था, जब वह सत्ता में थी और भाजपा प्रमुख विपक्षी दल.

अफसोस इस बात का है कि एक-दूसरे से हिसाब चुकता करने के पार्टियों के इस कभी न खत्म होने वाले टकराव का खामियाजा आम भारतीय को भुगतना पड़ता है न कि इन पार्टियों को. 

अब दूसरे नज़रिये से देखते हैं, जहां बजाय अतीत की ओर देखने के वर्तमान और भविष्य की बात की जाए और यह विचार करें कि मौजूदा हालात का संसद पर क्या असर पड़ रहा है.

शीतकालीन सत्र करीब आधा बीत चुका है और अभी कई महत्वपूर्ण विधेयक अटके हुए हैं. जो बिल सर्वाधिक महत्वपूर्ण माने जा रहे थे, वे हैं- जीएसटी यानी सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स. इस विधेयक पर अभी तक चर्चा ही नहीं की गई और इस पर पहले ही सारी पार्टियों की राय जुदा हैं. कुछ और विधेयक भी हैं जिन पर चर्चा होनी है. मसलन...

1. गर्भावस्था का चिकित्सीय स्तर पर समापन (एमटीपी) संशोधन विधेयक

इस विधेयक में गर्भपात का वैध समय बढ़ाकर 24 सप्ताह तक करने का प्रस्ताव है. फिलहाल यह 20 सप्ताह के भ्रूण तक के लिए ही वैध है. हाल ही में देश भर में किशोरियों के साथ रेप की घटनाओं, उनके गर्भवती होने की मजबूरियों और औरत को गर्भपात का अधिकार देने जैसे विषय पर काफी बहस हुई थी. इसीलिए यह विधेयक पेश किया जाना है.

2. सरोगेसी (नियमन) विधेयक 2016

अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो किराये की कोख के बाज़ार पर पाबंदी लग जाएगी. इसका उद्देश्य औरतों का शोषण रोकना और सेरोगेसी से पैदा हुए बच्चे के अधिकारों की रक्षा करना है. इस विधेयक के पास होते ही व्यावसायिक सरोगेसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लग जाएगा. हालांकि ज़रूरतमंद निःसंतान दंपत्तियों के लिए ‘नि:स्वार्थ सेरोगेसी’ की सहायता लेना मान्य होगा.

3. नागरिकता संशोधन विधेयक 2016

इस विवादास्पद विधेयक के तहत पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत पहुंचने वाले विविध धर्मों के अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता दे दी जाएगी, भले ही वे सारे ज़रूरी कागजात न पेश कर पाएं. ये हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई; किसी भी धर्म के हो सकते हैं. विधेयक में मुसलमानों को यह अधिकार नहीं दिया गया है.

4. ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक 2016

विधेयक में ट्रांसजेंडरों को हिंसा से बचाने और उन्हें पुरुष या महिलाओं के समान ही तीसरा जेंडर मानने का प्रावधान किया गया है लेकिन कई ट्रांसजेंडरों ने इस विधेयक को ‘भयावह और पिछड़ा’ बताया है. इसके मुताबिक ट्रांसजेंडरों को कोई आरक्षण नहीं दिया जाएगा. हालांकि इसकी पुरज़ोर मांग की गई थी. आरोप है कि इस विधेयक को इसके पहले वाले विधेयक से हल्का कर दिया गया है. कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का तो यहां तक कहना है कि विधेयक ट्रांसजेंडरों के अधिकारों का संरक्षण नहीं करता और इससे उन्हें ‘प्रताड़ना और हिकारत’ का सामना अलग से करना पड़ेगा.

5. मातृत्व लाभ ( संशोधन) विधेयक 2016

इस विधेयक में कहा गया है कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कम्पनियां या नियोक्ता अब मां बनने वाली महिलाओं को 26 सप्ताह का वेतन के साथ अवकाश देंगे, जबकि मौजूदा प्रावधान 12 सप्ताह का है. 

इन सबके अलावा कुछ अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी लंबित हैं. जैसे बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (संशोधन) विधेयक, न्यूनतम मज़दूरी (संशोधन) विधेयक, कर्मचारी भविष्य निधि (संशोधन) विधेयक, लघु कारखाना विधेयक, मज़दूरी भत्ता विधेयक, औद्योगिक संबंधों पर लेबर कोड विधेयक, विवाह कानून (संशोधन) विधेयक, संविधान अनुसूचित जाति (संशोधन) विधेयक और शत्रु संपत्ति (संशोधन एवं वैधता) विधेयक.

First published: 3 December 2016, 7:37 IST
 
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