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जिसे बिहार का निर्भया कांड बताया जा रहा है, उसमें बलात्कार हुआ ही नहीं

अभिषेक पराशर | Updated on: 25 June 2016, 10:31 IST
QUICK PILL
  • मोतिहारी में \'सामूहिक बलात्कार\' की जिस घटना को बिहार का \'निर्भया कांड\' बताया जा रहा है, वह इतना सीधा मामला नहीं है.
  • स्थानीय पुलिस, डॉक्टर, समाजसेवी और लड़की के इलाज से जुड़े तमाम लोगों से पड़ताल में जो सच सामने उभर कर आ रहा है वह एक अलग कहानी बताता है.
  • मोतिहारी जिले के रामगढ़वा थाना क्षेत्र में रहने वाली कथित पीड़िता फिलहाल जिला सदर अस्पताल में भर्ती है. पीड़ित पूरी तरह से स्वस्थ है और उसकी जिंदगी को किसी तरह का खतरा भी नहीं है.
  • मोतिहारी सदर के सिविल सर्जन डॉ. प्रशांत कुमार बताते हैं, \'पीड़ित लड़की के शरीर पर ऐसे कोई निशान नहीं है जिससे हाल में उसके साथ बलात्कार की पुष्टि होती हो. न ही उन्हें किसी तरह की आंतरिक चोट लगी है और न ही उसके शरीर पर किसी चोट के निशान है.\'
  • मामले को लेकर जारी सियासत के बीच लड़की की मेडिकल जांच के लिए सिविल सर्जन प्रशांत कुमार के नेतृत्व में मेडिकल बोर्ड के गठन की घोषणा कर दी गई है. बोर्ड अपनी रिपोर्ट दो से तीन दिनों के भीतर सौंप देगा.

मोतिहारी में 'सामूहिक बलात्कार' की जिस घटना को बिहार का 'निर्भया कांड' बताया जा रहा है, उसकी सच्चाई पर कई तरह के संशय खड़े हो गए हैं. कैच की पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं उनके आधार पर कहा जा सकता है कि यह मामला गैंगरेप का नहीं बल्कि कुछ औऱ है.

मोतिहारी जिले के रामगढ़वा थाना क्षेत्र में रहने वाली पीड़ित लड़की फिलहाल जिला सदर अस्पताल में भर्ती है. पीड़ित पूरी तरह से स्वस्थ है और उसके जीवन को किसी तरह का खतरा नहीं है. 

लड़की ने दावा किया ता कि उसके गांव के छह लोगों ने उसका 'सामूहिक बलात्कार' किया और फिर उसके प्राइवेट पार्ट्स में बंदूक की नली डाल दी.

मोतिहारी के सिविल सर्जन डॉ. प्रशांत कुमार बताते हैं, 'पीड़ित लड़की के शरीर पर ऐसे कोई निशान नहीं है जिससे हाल में उसके साथ बलात्कार की पुष्टि होती हो. न ही उन्हें किसी तरह की आंतरिक चोट लगी है और नहीं शरीर पर किसी चोट के निशान है.'

कुमार ने बताया कि सामूहिक बलात्कार के मामले में पीड़ित लड़की को जिस तरह की चोटें आती हैं, वह एक हफ्ते या दस दिनों के भीतर ठीक नहीं हो सकता. पीड़िता जब सदर अस्पताल में आई थी तब वह पूरी तरह से सामान्य हालत में थी और अपने पैरों पर चलकर अस्पताल आई था. उसे पेट दर्द औैर पीठ दर्द की शिकायत थी. 

गौरतलब है कि इस मामले के सामने आने के बाद बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने बयान दिया था कि सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई लड़की जहां मौत से जूझ रही हैं वहीं प्राथमिकी के बावजूद एक भी आरोपी अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है. 

मेडिकल रिपोर्ट में पीड़ित लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है

मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए मोतिहारी सदर अस्पताल के एक जूनियर डॉक्टर ने नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताया,'गैंगरेप की कहानी में कोई सच्चाई नहीं है. स्थानीय मीडिया ने बिना तथ्योंं की पड़ताल किए सिर्फ एक बयान के आधार पर गैंगरेप की कहानी खड़ी कर दी. मीडिया एक ऐसी घटना को बिहार का निर्भया बता रहा जिसमें बलात्कार हुआ ही नहीं है.'

पीड़ित लड़की का आरोप है कि गांव के 'दबंग' उसका 'सामूहिक बलात्कार' कर उसे सड़क पर तड़पता छोड़ फरार हो गए. 

मोतिहारी के एसपी जितेंद्र राणा ने इस मामले पर रोशनी डालते हुए बताया कि यह पूरा मामला आपसी मारपीट का है. आरोपी और पीड़ित दोनों पड़ोसी हैं और गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं. दोनों की सामाजिक हैसियत एक तरह की है. राणा ने इस मामले में मामले में वर्चस्व को लेकर होने वाले विवाद की संभावना को भी खारिज कर दिया.

बलात्कार की झूठी कहानी!

रामगढ़वा पुलिस के मुताबिक यह घटना 13 जून की है, जब मुख्य आरोपी समीउल्लाह ने उसके साथ बलात्कार की कोशिश की थी. बचाव में लड़की ने समीउल्लाह के गुप्तांग को ब्लेड से काट दिया था. इसके बाद समीउल्लाह वहां से भाग खड़ा हुआ. 

15 जून को समीउल्लाह अपने परिवार के सदस्यों के साथ वापस लौटा और उसने लड़की एवं उसके परिवार वालों के साथ मारपीट की. सूचना मिलने के बाद घटनास्थल पर पहुंची पुलिस लड़की को मेडिकल जांच के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई. जैसा कि आम तौर पर पुलिस किसी भी पीड़ित या आरोपी को ले जाती है.

रामगढ़वा थाना प्रभारी राजेश प्रसाद बताते हैं, 'उस समय न तो लड़की ने न ही उसके परिजनों ने किसी भी तरह के छेड़छाड़ या बलात्कार की कोई जानकारी दी. लड़की ने यह जरूर बताया कि 13 जून को समीउल्लाह ने उसके साथ बलात्कार की कोशिश की थी और इस कोशिश में उसने उसके निजी अंग पर ब्लेड मार दिया था.' 

प्रसाद बताते हैं कि लड़की के बयान के आधार पर पुलिस ने मारपीट की घटना वाले यानी 15 जून को ही समीउल्लाह समेत पांच आरोपियों के खिलाफ बलात्कार की कोशिश, छेड़छाड़ और मारपीट से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया.

पुलिस ने इस मामले में समीउल्लाह और उसके पिता समेत छह लोगों को आरोपी बनाया है. पुलिस समीउल्लाह को गिरफ्तार कर चुकी है जबकि पांच अन्य आरोपी फरार है.

पुलिस के मुताबिक पीड़ित ने एक बार भी मेडिकल जांच के दौरान बलात्कार की जानकारी नहीं दी. घटना के तीन दिन बाद लड़की ने रामगढ़वा के स्थानीय अस्पताल में जाकर पेट दर्द की शिकायत की और वहां के डॉक्टर से खुद को मोतिहारी सदर रेफर किए जाने की मांग की.

लड़की ने बदला बयान

मोतिहारी सदर अस्पताल में 18 जून को भर्ती होने के बाद अगले दिन यानी यानी 19 जून को लड़की ने बयान बदलते हुए कहा कि  उसके साथ समीउल्लाह और उसके छह सहयोगियों ने सामूहिक बलात्कार किया. पीड़िता की माने तो समीउल्लाह ने अपने पिता के साथ मिलकर उसका बलात्कार किया.

मोतिहारी थाने में काम कर चुके एक पुलिस अधिकारी बताते हैं, 'पिता और पुत्र किसी महिला से एक साथ बलात्कार नहीं कर सकते. हालांकि यह कोई नियम नहीं है लेकिन मैंने पुलिस की नौकरी के दौरान ऐसे कई मामले देखे हैं जिसमें अपने मुकदमे को मजबूत बनाने के लिए पूरे परिवार के लोगों को आरोपी बना दिया जाता है. लेकिन जांच के बाद पूरा मामला ही उलट जाता है.'

मोतिहारी के एसपी जितेंद्र राणा भी लड़की के झूठे दावों की पुष्टि करते हैं. उन्होंने कहा, 'पीड़ित लड़की के साथ बलात्कार की पुष्टि मेडिकल जांच में नहीं हुई हैं. फिलहाल हम पांच अन्य आरोपियों की तलाश कर रहे हैं.'

20 जून को सदर अस्पताल में हुई जांच में डॉक्टर ने लड़की के साथ बलात्कार किए जाने के दावों को खारिज कर दिया. डॉ. कुमार बताते हैं कि लड़की की मेडिकल जांच बताती है कि उसके साथ 'बलात्कार हुआ ही नहीं.'

विवाहेत्तर संबंध पर नजर

मामले की पड़ताल के दौरान पुलिस ने आरोपी समीउल्लाह और पीड़ित लड़की के पिछले 6 महीनों के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (सीडीआर) निकाले. सीडीआर से यह बात सामने आई है कि दोनों के बीच लंबे समय से बातचीत होती रही है. 

समीउल्लाह की करीब पांच साल पहले शादी हुई थी लेकिन उसकी शादी ज्यादा दिनों तक चल नहीं सकी. करीब छह महीने पहले ही उसने दूसरी शादी की है. पुलिस की माने तो कुछ दिनों पहले ही इस बात को लेकर दोनों के बीच जमकर लड़ाई भी हुई थी.

पुलिस इस पहलू को लेकर भी जांच कर रही है. रामगढ़वा के एसएचओ ने बताया कि समीउल्लाह लड़की के साथ अपने संबंधों की बात कबूल कर चुका है.

लड़की ने क्यों बदला बयान?

पीड़ित लड़की ने मोतिहारी सदर अस्पताल आने के बाद बयान बदला. पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक लड़की ने मोतिहारी में एनजीओ चलाने वाली और एक कथित सामाजिक कार्यकर्ता के कहने पर अपना बयान बदला है.

कथित सामाजिक कार्यकर्ता पेशे से वकील हैं. मोतिहारी कोर्ट के एक वकील बताते हैं, 'वह खुद को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए इस तरह के विवादित मसलों में खुद ब खुद कूद पड़ती हैं. इस मामले में भी वह लड़की को शह दे रही हैं.' 

बरहाल अब पूरा मामला अब सियासी रंग ले चुका है. बीजेपी ने इस मामले को विधानसभा में उठाए जाने की घोषणा की है. पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने इस मामले में सरकार से जवाब मांगा है. उनका कहना है कि लड़की मौत से जूझ रही है और प्राथमिकी के बावजूद अभी तक एक भी आरोपी को पकड़ा नहीं जा सका है.

मामले की संवेदनशीलत को देखते हुए जिला प्रशासन ने पीड़ित की मेडिकल जांच के लिए देर शाम मेडिकल बोर्ड बनाए जाने की घोषणा की है. जिसकी रिपोर्ट के बाद स्थिति और साफ हो पाएगी.

First published: 25 June 2016, 10:31 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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