Home » इंडिया » notorious samajik ekta manch desolve
 

सलवा जुडूम के पॉकेट संस्करण का विसर्जन

राजकुमार सोनी | Updated on: 16 April 2016, 9:08 IST
QUICK PILL
  • कथित रूप से आदिवासियों को नक्सली बताकर उनके पीछे पड़ा साममाजिक एकता \r\nमंच पांच महीने पहले गठित हुआ था और शुरुआत से ही विवादों से घिरा रहा.
  • मंच\r\n से जुड़े लोगों पर मानवाधिकार, सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित पत्रकारों पर \r\nहमले और उन्हें प्रताड़ित करने के आरोप लग रहे थे.
रायपुर में शुक्रवार का दिन बड़े घटनाक्रम वाला रहा. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह का दौरा होना था और उनके आगमन से कुछ घंटे पहले ही माओवादियों के उन्मूलन के मकसद से सलवा जुड़ूम की तर्ज पर गठित किए गए सामाजिक एकता मंच को भंग कर दिया गया. मंच उस वक्त विवादों के दायरे में आ गया जब इसके सदस्यों पर मानव अधिकार, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगे.

मंच के एक कर्ता-धर्ता सुब्बाराव ने बताया, दिसंबर 2015 में माओवादी मोर्चे पर केंद्र, राज्य सरकार और जिला पुलिस को सहयोग करने के लिए मंच का गठन किया गया था, लेकिन इसकी आड़ में कुछ लोग सरकार, प्रशासन और पुलिस को बदनाम कर रहे थे. इस वजह मंच को भंग किया जा रहा है.

अपने गठन के कुछ समय के भीतर ही इसे सलवा जुडूम पार्ट-2 के नाम से पुकारा जाने लगा

अपने गठन के कुछ समय के भीतर ही इसे सलवा जुडूम पार्ट-2 के नाम से पुकारा जाने लगा. कुछ लोगों ने इस मंच के वॉट्सएप ग्रुप का नया नाम दंडक संवाद भी रख दिया गया था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया.

मंच के लोगों पर मामला दर्ज करने की मांग

SEM1

अचानक हुए इस घटनाक्रम के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सामाजिक एकता मंच के मुखिया सुब्बाराव और संपत झा सहित अन्य लोगों के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है. इन कार्यकर्ताओं का तर्क है कि यह मंच बस्तर के आईजी एसआरपी कल्लूरी के संरक्षण में संगठित गिरोह की तरह संचालित किया जा रहा था.

सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि मंच से जुड़े लोग वर्दी का समर्थन पाकर बेकसूर आदिवासियों और शोषित-पीड़ितों की आवाज उठाने वाले लोगों को कुचलने में लगे थे. मंच के लोग बस्तर में लोकतंत्र की हत्या करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे.

ये हो सकती है वजह

मंच से जुड़े लोगों का कहना है कि स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया ने उनकी छवि को खराब करने की कोशिश की है इसलिए अब इसे भंग करने का निर्णय लिया गया है. सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी का कहना है, 'माओवादियों के उन्मूलन के नाम पर मंच से जुड़े लोग गुंडागर्दी कर रहे थे.

मंच की असंवैधानिक गतिविधियों को लेकर देश की प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता नंदिनी सुंदर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इससे मंच की राष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी हो रही थी. नंदिनी सुंदर वही महिला हैं, जिनकी वजह से सलवा-जुड़ूम आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी.

विवादों का मंच

मंच अपने गठन के बाद से ही विवादों का मंच बन गया था. दिसंबर-2015 में गठित होने के  महज पांच महीनों में ही मंच को तमाम नकारात्मक सुर्खियां मिलीं. यह पहली बार सुर्खियों में तब आया, जब एक कुख्यात माओवादी जोड़े लक्ष्मण और कोसी का धूमधाम से विवाह करवाया गया. इस समारोह में बस्तर के आईजी कल्लूरी सहित कई प्रमुख अफसर शामिल हुए थे.

उस वक्त यह सवाल उठा कि एक आदिवासी की इतनी भव्य शादी का खर्च किसने उठाया? बस्तर के पत्रकारों ने आरोप लगाया कि मंच के लोगों ने उनके मुताबिक खबरें प्रकाशित नहीं करने पर सुनियोजित तरीके से उन्हें फंसाने की धमकी दी. महिला पत्रकार मालिनी सुब्रह्मण्यम ने अपने ऊपर हुए हमले के लिए सीधे तौर पर मंच के लोगों को जिम्मेदार ठहराया था.

जगदलपुर लीगल एड से जुड़ी शालिनी गेरा, ईशा खंडेलवाल और सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया को बस्तर छोड़ने के लिए विवश करने के मामले में भी मंच की भूमिका बताई गई.

शालिनी गेरा, ईशा खंडेलवाल और सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया को बस्तर छोड़ने के लिए विवश करने के मामले में मंच की भूमिका बताई गई

यही बात आदिवासी कार्यकर्ता सोनी सोरी के ऊपर किए गए कैमिकल हमले के बाद भी कही गई. बस्तर के आईजी और मंच के लोगों पर ही इन हमलों का शक जताया गया था. मंच के सदस्य कथित तौर पर माओवादियों के समर्पण के दौरान पुलिस के आलाधिकारियों के साथ भी मंच साझा करते थे.

आईजी कल्लूरी का वरदहस्त होने की वजह से इस गैर पंजीकृत सामाजिक मंच से बस्तर के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, सीएसपी और थानेदार खौफ खाते थे. मंच से जुड़े एक सदस्य के बारे में यह बात भी फैली कि उसने एक थानेदार को उसके घर पर रोज सुबह डिब्बाबंद दूध सप्लाई करने का आदेश दिया था. माओवादियों ने अपने बयान में इसे पुलिस की गुंडावाहिनी भी करार दिया था.

हेलिकॉप्टर पर सैर-सपाटा

SEM3

मंच के सदस्य पुलिस के आलाधिकारियों के साथ एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर पर भी सैर-सपाटा करते हुए देखे गए. कुछ दिनों पहले बीजापुर के एक राजनैतिक कार्यकर्ता को जब माओवादियों ने गोली चलाकर घायल किया तो मंच के सुब्बाराव हेलिकॉप्टर में थे.

सामाजिक एकता मंच का असली पदाधिकारी कौन था, इसे कभी स्पष्ट नहीं किया गया. इसके कर्ताधर्ता के तौर पर सुब्बाराव, संपत झा के अलावा भाजपा नेता मनीष पारेख और सलवा-जुडूम के पूर्व सदस्य पी.विजय के नाम ही सामने आते रहे. मंच में सलवा-जुडूम के संस्थापक सदस्य महेंद्र कर्मा के करीबी सहयोगी सादिक अली के भाई फारूख अली भी जुड़े थे. नंदिनी सुंदर ने अपनी याचिका में इस बात को भी आधार बनाया कि मंच सलवा-जुडूम की तरह ही काम कर रहा है.

लीगल एड की सदस्या ईशा खंडेलवाल ने सामाजिक एकता मंच के बंद होने पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है, बस्तर की पुलिस ने मंच की तर्ज पर आदिवासी महिला एकता मंच, संघर्ष समिति सहित दो दर्जन से ज्यादा कथित संगठन खड़े कर दिए हैं. केवल एक एकता मंच के बंद होने से कुछ नहीं होगा. पुलिस अन्य संगठनों को पाल-पोसकर खड़ा करेगी और असंवैधानिक कार्यों को अंजाम देगी. अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत हैं.

हालांकि संगठन के मुख्य संचालन सुब्बा राव इसे ज्यादा गंभीर नहीं मानते. उन्होंने कहा,  'भले ही हमने अभी सामाजिक एकता मंच को भंग कर दिया है, लेकिन माओवाद के खात्मे के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा. हम जिस किसी भी संगठन के जरिए अपनी गतिविधियां संचालित करेंगे, उसकी सूचना मीडिया को जरूर दी जाएगी. हम किसी याचिका-फाचिका से नहीं डरते.'

जाहिर है छत्तीसगढ़ में मंच भंग हुआ है टकराव के कई दूसरे छद्म मंच बने हुए हैं.

First published: 16 April 2016, 9:08 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी