Home » इंडिया » Rs. 3173 crores approved to acquire 16.15 lakh VVPAT machines
 

2019 के चुनाव में वोट डालने पर EVM से निकलेगी VVPAT पर्ची, 3173 करोड़ मंजूर

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 April 2017, 16:28 IST

केंद्र सरकार ने वीवीपैट मशीन वाली ईवीएम के लिए चुनाव आयोग की मांग मानते हुए 3173 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं.   

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर मचे विवाद के बीच विपक्ष के लिए मोदी सरकार ने एक राहत भरी ख़बर दी है. 2019 के लोकसभा चुनाव में अब महज दो साल का वक्त है, उससे पहले मोदी कैबिनेट ने वीवीपैट मशीन वाली ईवीएम के इस्तेमाल के लिए चुनाव आयोग की मांग को स्वीकार करते हुए 3173 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं.

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, "16.15 लाख वीवीपैट (वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) मशीन खरीदने के लिए 3173 करोड़ रुपये की मांग पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है."

VVPAT से वोटर को मिलती है संतुष्टि

दरअसल वीवीपैट मशीन वाली ईवीएम से वोट देने के बाद एक पर्ची निकलती है, जिस पर उस पार्टी का सिंबल होता है, जिसे मतदाता ने अपना वोट दिया है. ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों के बीच मतदाता के भरोसे को बरकरार रखने की दिशा में वीवीपैट की प्रभावी भूमिका है. 

चुनाव आयोग ने नए वीवीपैट मशीन ख़रीदने के लिए 3 हज़ार 173 करोड़ रुपए की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम को लेकर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगा था. चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर 2019 लोकसभा चुनाव में वीवीपैट मशीनों के इस्तेमाल की बात कही थी.

क्या है VVPAT मशीन

वीवीपैट यानी वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल. इसे ईवीएम मशीन के साथ जोड़ा जाता है. वोटिंग के दौरान वोटर जैसे ही ईवीएम में अपने प्रत्याशी के पक्ष में बटन दबाता है उसका प्रिंट स्लिप इस वीवीपैट मशीन से निकलता है. इसे रिकॉर्ड के तौर पर चुनाव आयोग सुरक्षित भी रखता है. 

गौरतलब है कि हाल ही में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद बसपा, सपा, आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने ईवीएम में छेड़छाड़ के जरिए चुनाव जीतने का आरोप लगाया था. चुनाव आयोग ने चुनौती दी है कि 10 मई को आरोप लगाने वाले ईवीएम से छेड़छाड़ साबित करके दिखाएं. माना जा रहा है कि 16 लाख से ज्यादा वीवीपैट वाली ईवीएम की व्यवस्था करने में तकरीबन ढाई साल लग सकते हैं.

First published: 19 April 2017, 16:28 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी