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NSA अजित डोभाल पर CBI अफसर के सनसनीखेज आरोप- रिश्वत मामले में अस्थाना की कर रहे थे मदद

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 November 2018, 15:47 IST

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर एक याचिका में सीबीआई के संयुक्त निदेशक एमके सिन्हा ने दावा किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ चल रही जांच में हस्तक्षेप किया. सिन्हा ने अपनी याचिका में कहा है कि अस्थाना के घर पर सर्च करने से NSA डोभाल ने उन्हें रोका था. सिन्हा  सीबीआई के उन अफसरों में शामिल थे जो सीबीआई के विशेष निदेशक अस्थाना के खिलाफ जांच कर रहे थे और बाद में उनका अन्य अफसरों के साथ तबादला कर दिया गया था.

मंत्री का भी लिया नाम 

सिन्हा ने यह आरोप लगाया है कि अस्थाना रिश्वत मामले में शिकायतकर्ता, सना सतीश बाबू ने उन्हें बताया था कि कोयला और खान राज्य मंत्री हरिभाई पार्थिभाई चौधरी को संबंधित मामलों में कथित मदद के लिए कई करोड़ रुपये की रिश्वत का भुगतान किया गया था. गौरतलब है कि गुजरात के सांसद चौधरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीब जाना जाता है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि आर एंड एडब्ल्यू अधिकारी सामंत गोयल से जुड़े वार्तालाप पर निगरानी से छेड़छाड़ की गई थी. जिसमे उन्हें यह कहते हुए सुना गया था कि पीएमओ ने सीबीआई मामले का प्रबंधन किया था और उसी रात अस्थाना मामले की जांच करने वाली पूरी सीबीआई टीम हटा दी गई थी. सिन्हा ने यह भी दावा किया है कि सना सतीश बाबू, मोइन कुरेशी मामले में केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त के.वी. चौधरी से मिले थे और केंद्रीय कानून सचिव सुरेश चन्द्र ने 11 नवंबर को उनसे (साना) से संपर्क किया था.

याचिका के मुताबिक, प्रसाद ने दावा किया कि हाल ही में "उनके भाई सोमेश और सामंत गोयल ने एनएसए अजीत डोवाल को एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत मामले पर मदद की थी. सिन्हा ने याचिका में दावा किया है कि 15 अक्टूबर को अस्थाना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने 17 अक्टूबर को एनएसए को सूचित किया. "इसके बाद उसी रात, यह सूचित किया गया कि एनएसए ने राकेश अस्थाना को प्राथमिकी के पंजीकरण के बारे में जानकारी दी है. राकेश अस्थाना ने एनएसए से अनुरोध किया था कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए.

22 अक्टूबर को याचिका में कहा गया है कि मामले के जांच अधिकारी एके बास्सी ने अस्थाना के सेल फोन जब्त करने और एक सर्च के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन एनएसए ने इसकी अनुमति नहीं दी. सिन्हा ने अपनी याचिका में दावा किया है कि 20 अक्टूबर को डीईएसपी देवेंद्र कुमार के घर छापेमारी की गई थी, सीबीआई निदेशक ने उन्हें रोकने के लिए कहा था. सिन्हा ने यह भी दावा किया है कि मनोज प्रसाद की गिरफ्तारी के बाद, बस्सी को दिल्ली पुलिस के विशेष कक्ष के डीसीपी से फोन आया.

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इससे पहले अपने ट्रांसफर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले सीबीआई के डिप्टी एसपी अजय कुमार बस्सी (Ajay Kumar Bassi) ने भी सुप्रीम कोर्ट में कुछ अहम् खुलासे किये थे. इस खुलासे में उन्होंने आरोपियों की कुछ कॉल डिटेल का जिक्र किया. बस्सी ने कहा था कि इन कॉल डिटेल में आरोपी यह बात कर रहे हैं कि 'अस्थाना तो अपना आदमी' है. इसके अलावा बस्सी ने कई और भी गंभीर आरोप भी लगाए हैं.

एडवोकेट सुनील फर्नांडीस ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस के एम जोसेफ की बेंच के सामने अपनी याचिका रखी. बस्सी ने अपनी याचिका में कहा कि सोमेश प्रसाद और मनोज प्रसाद ने अस्थाना के नाम पर दिसम्बर 2017 और अक्टूबर 2018 में रिश्वत मांगी थी. जिसमे पहली बार 2.95 करोड़ की रिश्वत मांगी गई थी जबकि दूसरी बार 36 लाख की रिश्वत मांगी गई थी.

First published: 19 November 2018, 15:38 IST
 
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