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क्या है परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी)?

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 28 May 2016, 16:44 IST
(कैच न्यूज)

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) 48 देशों का समूह है. इसका लक्ष्य परमाणु सामग्री, तकनीक एवं उपकरणों का निर्यात नियंत्रित करना है. परमाणु हथियार बनाने में इस्‍तेमाल की जाने वाली सामग्री की आपूर्ति से लेकर नियंत्रण तक इसी के दायरे में आता है.

पिछले कुछ दिनों से एनसीजी में भारत के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. वहीं पाकिस्तान और चीन एनएसजी में भारत के शामिल होने पर कड़ा ऐतराज जता रहे हैं.

एनएसजी में शामिल होने वाले देश के लिए परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य हैं. भारत ने अब तक एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किया है. चीन का कहना है कि एनएसजी में शामिल होने वाले सभी नए सदस्यों को एनपीटी पर हस्ताक्षर करना चाहिए.

क्या है एनपीटी

एनपीटी परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने और परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है. एनपीटी की घोषणा 1970 में हुई थी. अब तक 187 देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस पर हस्ताक्षर करने वाले देश भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सकते. हालांकि, वे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन इसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के पर्यवेक्षक करेंगे.

कब बना एनसीजी

इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते भारत ने मई, 1974 में पहला परमाणु परीक्षण किया था. इसी साल एनएसजी की स्थापना हुई थी. वर्तमान में इसके 48 देश सदस्य हैं. चीन इस समूह में 2004 में शामिल हुआ था.

कौन-कौन देश हैं शामिल

अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेलारूस, बेल्जियम, ब्राजील, बुल्गारिया, कनाडा, चीन, क्रोटिया, साइप्रस, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आइसलैंड, आयरलैंड, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, माल्टा, मेक्सिको, नीदरलैंड्स, अमेरिका, स्वीडन, टर्की, यूक्रेन, ब्रिटेन जैसे देश शामिल.

भारत के लिए क्यों जरूरी है सदस्यता

भारत ने अमेरिका और फ्रांस  परमाणु करार किया है. ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ परमाणु करार की बातचीत चल रही है. फ्रांसीसी परमाणु कंपनी अरेवा जैतापुर, महाराष्ट्र में परमाणु बिजली संयंत्र लगा रही है. वहीं अमेरिकी कंपनियां गुजरात के मिठी वर्डी और आंध्र प्रदेश के कोवाडा में संयंत्र लगाने की तैयारी में है.

एनएसजी की सदस्यता हासिल करने से भारत परमाणु तकनीक और यूरेनियम बिना किसी विशेष समझौते के हासिल कर सकेगा. परमाणु संयंत्रों से निकलने वाले कचरे का निस्तारण करने में भी सदस्य राष्ट्रों से मदद मिलेगी. देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये यह जरूरी है कि भारत को एनएसजी में प्रवेश मिले.

2008 में मिल चुकी है एनएसजी से भारत को छूट

साल 2008 में भारत-अमेरिकी परमाणु करार के समय एनएसजी ने भारत से साथ परमाणु व्यापार लगा प्रतिबंध हटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. एनएसजी में भारत कह चुका है कि वह हथियारों की होड़ में शामिल नहीं है और शुरू से ही परमाणु अप्रसार का हिमायती रहा है.

भारत सरकार का कहना है कि उसने स्वेच्छा से परमाणु परीक्षण पर रोक लगा रखी है. भारत के इस रूख के बावजूद 2008 में भारत को एनएसजी से पूर्ण छूट नहीं मिली थी. पिछले कुछ सालों से भारत से परमाणु करार के चलते अमेरिका लगातार भारत के पूर्ण छूट का हिमायती रहा है और एनएसजी में भारत की सदस्यता का समर्थन करता है.

अगले महीने एनएसजी की बैठक प्रस्तावित है. यहां भारत के शामिल होने पर सदस्य देश वोट करेंगे. भारत को बहुमत के आधार पर एनएसजी की सदस्यता मिल सकती है. इस समूह में शामिल हर देश को वीटो का अधिकार होता है.

First published: 28 May 2016, 16:44 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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